भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा स्वदेशी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘तारागिरी’, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह करेंगे समर्पण
सारांश
Key Takeaways
- तारागिरी का शामिल होना भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा।
- यह फ्रिगेट 3 अप्रैल को नौसेना में शामिल किया जाएगा।
- तारागिरी में अत्याधुनिक तकनीक जैसे ब्रह्मोस मिसाइल और बराक-8 शामिल हैं।
- इसका निर्माण स्वदेशी कंपनियों ने किया है।
- तारागिरी भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त होगा।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना अपने सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए लगातार स्वदेशी युद्धपोतों को शामिल कर रही है। 2047 तक पूर्ण आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं, और नए स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म नियमित रूप से नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में, प्रोजेक्ट 17ए के तहत नीलगिरी क्लास का अत्याधुनिक गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी अब नौसेना का हिस्सा बनने जा रहा है। नौसेना द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में इस फ्रिगेट का औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह स्वयं इसे नौसेना को समर्पित करेंगे। वर्ष 2026 में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ भी नौसेना में शामिल किया गया था।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास के युद्धपोतों में से पहला, आईएनएस नीलगिरी, जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था। इसके बाद, इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल किया गया। अब तारागिरी की बारी है।
गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ में ब्रह्मोस मिसाइल है, जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में बेहद सक्षम है। इसके अलावा, एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बराक-8, एयर डिफेंस गन, तथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं।
तारागिरी में लंबी दूरी से आने वाले खतरों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए अत्याधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार मौजूद हैं। इस फ्रिगेट में एक हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं। इसका डिजाइन और निर्माण भी स्वदेशी है, जिसे नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास के गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं। इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं। वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है।
तारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो अब नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं। इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद भारतीय समुद्र में शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिज़ाइन नेवल डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है। प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।