भारतीय नौसेना में शामिल हुआ नवीनतम युद्धपोत ‘तारागिरी’, दुश्मनों पर हमला और मानवीय सहायता में सहायक
सारांश
Key Takeaways
- तारागिरी युद्धपोत ने भारतीय नौसेना में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है।
- यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है।
- इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा किया गया है।
- यह युद्धपोत मानवीय सहायता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- भारत का रक्षा निर्यात बढ़ रहा है।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस) भारतीय नौसेना में आज एक अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत, ‘तारागिरी’, का समावेश हुआ है। यह युद्धपोत विशाखापत्तनम में 3 अप्रैल की दोपहर को नौसेना में कमीशन किया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित थे। ‘तारागिरी’ युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से सुसज्जित है।
ये मिसाइलें सतह से सतह पर प्रहार कर सकती हैं। इसके अलावा, इसमें मध्य दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी मौजूद है। अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली और घातक हथियारों के साथ यह युद्धपोत दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को एक स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप बताया। उन्होंने कहा कि तारागिरी की कमीशनिंग, भारत की समुद्री शक्ति में वृद्धि का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आईएनएस तारागिरी की कमीशनिंग भारतीय नौसेना की ताकत, मूल्यों और प्रतिबद्धता में बढ़ोतरी करेगी। यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय नौसेना मानवीय मूल्यों के प्रति सजग है और आपात स्थितियों के दौरान न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी राहत कार्यों में भाग लेती है। यह नया युद्धपोत तारागिरी भी मानवीय संकट और आपदा के समय राहत पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए एक आदर्श समुद्री जहाज बनाती है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘तारागिरी’ हमारे राष्ट्रीय गौरव और सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जब यह जहाज समुद्र की लहरों को चीरता हुआ आगे बढ़ेगा, तो यह पूरी दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत की ताकत इसके लोगों की मेहनत, क्षमता और अटूट संकल्प में है।
इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतीक है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय नौसेना समेत सभी देशवासियों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। दशकों से यह संस्थान देश के लिए उन्नत नौसैनिक प्लेटफार्म तैयार कर रहा है। कुशल वर्कफोर्स, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने इसे एक विश्वसनीय नाम बना दिया है। भारत में बड़े पैमाने पर स्वदेशी रक्षा उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे देश का रक्षा निर्यात भी बढ़ा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। इसमें हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, जहाज निर्माण और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा खर्च किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया गया, जैसे मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, नौसेना के विशेष जहाज और मिसाइल सिस्टम।
-राष्ट्र प्रेस
जीसीबी/पीएम