दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय: ऑनलाइन बाल यौन शोषण मामले में आरोपियों को राहत देने का आदेश पलटा
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटा।
- दो आरोपियों, रमन कुमार और संदीप सिंह, के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे।
- सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी।
- इस मामले में सोशल मीडिया का उपयोग किया गया था।
- बच्चों के संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ऑनलाइन बाल यौन शोषण से संबंधित मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दो आरोपियों, रमन कुमार और संदीप सिंह उर्फ लवली, को बरी किया गया था।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएं। यह जानकारी सीबीआई द्वारा सोमवार को जारी एक प्रेस नोट में साझा की गई।
सीबीआई के प्रेस नोट के अनुसार, यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें मुख्य आरोपी रमन गौतम और अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर बच्चों से जुड़े अश्लील एवं शोषणकारी सामग्री (बाल यौन शोषण सामग्री - सीएसएएम) के प्रसार का आरोप लगाया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से लिंक, वीडियो, चित्र, टेक्स्ट और पोस्ट साझा कर रहे थे, साथ ही ऐसे आपत्तिजनक सामग्रियों को होस्ट भी कर रहे थे।
सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं और पोक्सो एक्ट की धारा 15(2) के तहत चार्जशीट प्रस्तुत की थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपियों को पोक्सो एक्ट की धारा 15(2) से मुक्त कर दिया था कि कथित अश्लील वीडियो में दिख रहे बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है और उनकी उम्र निर्धारित करने के लिए आवश्यक मानदंड पूरे नहीं किए गए हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के इस तर्क को अस्वीकार करते हुए उसके आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इस निर्णय के बाद अब निचली अदालत में दोनों आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।