13 जुलाई 2026
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सेल का 'आईएनएस तारागिरी' युद्धपोत निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान; 4,000 टन स्टील की सप्लाई

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सेल का 'आईएनएस तारागिरी' युद्धपोत निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान; 4,000 टन स्टील की सप्लाई

सारांश

सेल ने 'आईएनएस तारागिरी' युद्धपोत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह चौथी स्टेल्थ फ्रिगेट है जो हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल हुई है।

मुख्य बातें

सेल ने आईएनएस तारागिरी के लिए 4,000 टन स्टील की सप्लाई की।
युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग।
आईएनएस तारागिरी भारतीय नौसेना का चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है।
रक्षा मंत्री ने इसे आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।
युद्धपोत विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन्स में सक्षम है।

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकारी 'महारत्न' कंपनी सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड - एसएआईएल) ने 'आईएनएस तारागिरी' के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह परियोजना 17ए के तहत निर्मित चौथी स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है।

इस युद्धपोत का वज़न 6,670 टन है और इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में विशाखापट्टनम में कमीशन किया गया।

इस जहाज का डिजाइन नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है और इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह मल्टी-रोल ऑपरेशन्स के लिए सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है।

सेल के अनुसार, इस युद्धपोत के निर्माण में लगभग 4,000 टन विशेष ग्रेड की स्टील प्लेट्स की पूरी सप्लाई कंपनी ने की है।

यह स्टील सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला प्लांट्स में बनाई गई है, जो कंपनी की उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा ग्रेड मटेरियल बनाने की क्षमता को दर्शाता है।

आईएनएस तारागिरी में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसमें रडार, सोनार और मिसाइल सिस्टम जैसे आधुनिक विशेषताएँ शामिल हैं, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी शामिल हैं, जिससे इसकी लड़ाकू और समुद्री सुरक्षा क्षमता में वृद्धि होती है।

कमीशनिंग के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि भारत का अधिकांश व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा समुद्री मार्गों पर निर्भर है, इसलिए मजबूत नौसेना क्षमता अत्यंत आवश्यक है।

यह युद्धपोत लंबे समय तक समुद्र में तेज गति से संचालन कर सकता है और उच्च तीव्रता के युद्ध, समुद्री डाकियों के खिलाफ ऑपरेशन, तटीय निगरानी और मानवीय सहायता जैसे कई मिशनों को अंजाम दे सकता है।

सेल ने इससे पहले भी आईएनएस विक्रांत और प्रोजेक्ट 17ए के अन्य जहाजों के लिए विशेष स्टील की सप्लाई की है।

आईएनएस तारागिरी का कमीशन होना भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और समुद्री ताकत को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस बीच, गुरुवार को एनएसई पर सेल के शेयर लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 154.40 रुपए पर बंद हुए। कंपनी का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 168.21 रुपए और न्यूनतम स्तर 101.13 रुपए है। वहीं कंपनी का मार्केट कैप 64.07 हजार करोड़ रुपए है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस तारागिरी का निर्माण किसने किया?
आईएनएस तारागिरी का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है।
इस युद्धपोत में कितनी स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है?
आईएनएस तारागिरी में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
सेल का पूरा नाम क्या है?
सेल का पूरा नाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड है।
आईएनएस तारागिरी कब कमीशन किया गया?
आईएनएस तारागिरी को 4 अप्रैल को कमीशन किया गया।
इस युद्धपोत का वजन क्या है?
आईएनएस तारागिरी का वजन 6,670 टन है।
राष्ट्र प्रेस
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