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मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद में देरी पर कांग्रेस का राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन

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मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद में देरी पर कांग्रेस का राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन

सारांश

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद में देरी के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें किसानों ने अपनी समस्याओं को उजागर किया। क्या यह स्थिति आगे चलकर राजनीतिक संकट का रूप लेगी?

मुख्य बातें

कांग्रेस ने गेहूं खरीद में देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
किसानों ने घेराव कर अपनी समस्याओं को उजागर किया।
सरकार ने खरीद प्रक्रिया चार संभागों में शुरू की है।
किसान 2,625 रुपए प्रति क्विंटल में गेहूं बेच रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया।

भोपाल, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद में हुई कथित देरी को लेकर गुरुवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया। इस बीच, भोपाल और इंदौर सहित चार संभागों में खरीद प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है।

राज्य के विभिन्न जिलों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और किसानों ने कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया और भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए।

रबी विपणन सीजन की शुरुआत के साथ ही गेहूं खरीद का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि गेहूं की खरीद में देरी के कारण किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है।

सिंघार ने यह भी बताया कि पंजीकृत किसानों की संख्या और अब तक की गई गेहूं खरीद के बीच बड़ा अंतर है, और आरोप लगाया कि इस स्थिति का लाभ बिचौलियों को मिल रहा है, न कि किसानों को।

इसी दौरान जीतू पटवारी ने सागर जिले की कृषि उपज मंडी का दौरा कर किसानों से बातचीत की।

किसानों ने अव्यवस्था, खरीद में देरी, बोरी (गन्नी बैग) की कमी और मंडियों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत की।

पटवारी ने कहा कि ये समस्याएं सरकार के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर खराब व्यवस्था को दर्शाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को कई दिनों तक अपनी फसल के साथ कठिन परिस्थितियों में इंतजार करना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है।

कांग्रेस ने सरकार पर बेहतर मूल्य और समय पर खरीद के वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है, जिससे किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य खरीद के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने बताया कि हजारों खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं और गन्नी बैग सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। किसानों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क और कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं।

गुरुवार से भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभागों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जबकि जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल सहित अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से आरंभ होगी।

राज्य सरकार किसानों से 2,625 रुपए प्रति क्विंटल (जिसमें 40 रुपए बोनस शामिल है) की दर से गेहूं खरीद रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दर्शाता है कि राजनीतिक दलों के बीच कृषि से जुड़े मुद्दों पर गहरी प्रतिस्पर्धा हो रही है। सरकार की प्रतिक्रिया और किसानों की भलाई के लिए उठाए गए कदम इस संकट का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण होंगे।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने गेहूं खरीद में देरी को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने गेहूं खरीद में देरी की है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
किसान अपनी समस्याओं को कैसे उजागर कर रहे हैं?
किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं।
सरकार गेहूं की खरीद की प्रक्रिया कब शुरू करेगी?
सरकार ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि अन्य संभागों में यह 15 अप्रैल से शुरू होगी।
सरकार किसानों को कितना मूल्य दे रही है?
राज्य सरकार किसानों से 2,625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है।
कांग्रेस ने सरकार पर कौन सा आरोप लगाया है?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बेहतर मूल्य और समय पर खरीद का वादा पूरा नहीं किया है।
राष्ट्र प्रेस
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