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भारतीय नौसेना में शामिल हुए आईएनएस दूनागिरी और आईएनएस अग्रय, समुद्री युद्ध क्षमता को मिली नई धार

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भारतीय नौसेना में शामिल हुए आईएनएस दूनागिरी और आईएनएस अग्रय, समुद्री युद्ध क्षमता को मिली नई धार

सारांश

भारतीय नौसेना को एक साथ दो स्वदेशी युद्धपोत मिले — स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी और पनडुब्बी-रोधी क्राफ्ट आईएनएस अग्रय। पहला रडार को चकमा देकर ब्रह्मोस से वार करता है, दूसरा गहरे पानी में छिपी पनडुब्बियों का शिकार करता है। दोनों के नाम और इंसिग्निया पौराणिक प्रेरणा से लिए गए हैं — द्रोणागिरी और गांडीव।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को आईएनएस दूनागिरी को भारतीय नौसेना में कमीशन किया।
आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत जीआरएसई द्वारा निर्मित नीलगिरी क्लास का पाँचवाँ स्टेल्थ फ्रिगेट है; वजन 6,700 टन , अधिकतम गति 30 नॉट ।
फ्रिगेट ब्रह्मोस , बराक-8 मिसाइल, स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और मल्टी-फंक्शन रडार से लैस है; 75% उपकरण स्वदेशी।
आईएनएस अग्रय 2019 में स्वीकृत 16 एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना का हिस्सा है; 25 नॉट की गति, 3,300 किमी की रेंज।
अग्रय तटीय क्षेत्रों में 100–150 नॉटिकल मील तक दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत पहले नीलगिरी (जनवरी 2025) , हिमगिरी , उदयगिरी और तारागिरी (मार्च 2026) नौसेना में शामिल हो चुके हैं।

भारतीय नौसेना ने 21 जून 2026 को दो अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों — एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय — को अपने बेड़े में शामिल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएनएस दूनागिरी को नौसेना में कमीशन किया। ये दोनों युद्धपोत असममित युद्ध और पनडुब्बी-रोधी अभियानों में भारत की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ाएंगे।

आईएनएस दूनागिरी: स्टेल्थ और सटीकता का संगम

आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित नीलगिरी क्लास का पाँचवाँ गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट है। 30 मार्च 2026 को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने इसे औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपा था। इस युद्धपोत का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है।

इस फ्रिगेट का वजन 6,700 टन है और यह 30 नॉट की अधिकतम गति से चलने में सक्षम है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, स्वदेशी टॉरपीडो 'वरुणास्त्र', एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार और आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं। यह सर्फेस, एयर और पानी के अंदर — तीनों डोमेन में एक साथ खतरों का मुकाबला कर सकता है। इसके लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।

आईएनएस दूनागिरी के कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा, 'यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे इस जहाज का कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। दूनागिरी का नाम द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है। जिस प्रकार हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए पूरा पर्वत उठा लाए थे, हम भी उसी जज्बे और समर्पण की भावना को अपने साथ लेकर चलते हैं।' उन्होंने बताया कि बेहद कम रडार क्रॉस-सेक्शन के चलते दुश्मन के लिए इस जहाज की पहचान करना अत्यंत कठिन है, और सेंसरों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम तत्काल करता है, जिससे प्रतिक्रिया समय न्यूनतम हो जाता है।

गौरतलब है कि पुराना आईएनएस दूनागिरी लींडर क्लास का फ्रिगेट था, जो 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना में सेवारत रहा। प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इससे पहले जनवरी 2025 में आईएनएस नीलगिरी, उसके बाद हिमगिरी, उदयगिरी और मार्च 2026 में तारागिरी को नौसेना में शामिल किया गया था।

आईएनएस अग्रय: पनडुब्बी-रोधी युद्ध का 'गांडीव'

आईएनएस अग्रय एक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसका इंसिग्निया महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के गांडीव धनुष से प्रेरित है। यह युद्धपोत एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार, वेरिएबल डेप्थ सोनार, उन्नत डिकॉय सिस्टम और स्टेबलाइज्ड रिमोट-कंट्रोल्ड गन से सुसज्जित है। यह 25 नॉट की गति से 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है और तटीय क्षेत्रों में 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है।

इस युद्धपोत के प्रथम कमांडिंग ऑफिसर सुनील मल्होत्रा ने कहा, 'आकार में छोटा दिखने के बावजूद यह जहाज आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस एक घातक प्लेटफॉर्म है।' उन्होंने आगे कहा कि 'अर्जुन का गांडीव हमें प्रेरणा देता है — गांडीव अपना लक्ष्य कभी नहीं चूकता था, और हम उम्मीद करते हैं कि युद्ध क्षेत्र में यह जहाज भी अपना लक्ष्य नहीं चूकेगा।'

परियोजना का व्यापक संदर्भ

दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। 2019 में 16 युद्धपोतों के निर्माण का अनुबंध दिया गया था, जिनमें से आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इससे पहले इसी परियोजना के तहत आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

यह ऐसे समय में आया है जब आधुनिक युद्ध की प्रकृति तेज़ी से बदल रही है — कुछ लाख रुपये के ड्रोन भी हजारों करोड़ रुपये के सैन्य प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। ऐसी विषम चुनौतियों के मद्देनज़र भारतीय नौसेना का स्वदेशी तकनीक पर जोर रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत और नौसेना का भविष्य

दोनों युद्धपोत भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति की ठोस अभिव्यक्ति हैं। आईएनएस दूनागिरी में 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण हैं, जबकि आईएनएस अग्रय में स्वदेशी सोनार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं। नौसेना विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों प्लेटफॉर्म के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और प्रतिरोध क्षमता उल्लेखनीय रूप से मज़बूत होगी। प्रोजेक्ट 17ए के शेष दो फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट की शृंखला के आने वाले जहाजों के साथ भारतीय नौसेना का बेड़ा और अधिक सशक्त होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की रक्षा औद्योगिक नीति की दिशा का संकेत है — जहाँ जीआरएसई और कोचिन शिपयार्ड जैसे सार्वजनिक उपक्रम अब जटिल युद्धपोत निर्माण में विश्वसनीय भूमिका निभा रहे हैं। असली परीक्षण यह है कि 75 प्रतिशत स्वदेशीकरण का दावा क्या महत्वपूर्ण प्रणालियों — जैसे कॉम्बैट मैनेजमेंट और सोनार — पर भी लागू होता है, या केवल सहायक उपकरणों पर। हिंद महासागर में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधि के मद्देनज़र एएसडब्ल्यू क्षमता का विस्तार रणनीतिक रूप से सही कदम है, लेकिन 16 शैलो वॉटर क्राफ्ट की पूरी शृंखला के समय पर पूरा होने की गति पर निगाह रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस दूनागिरी क्या है और इसे कब नौसेना में शामिल किया गया?
आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत जीआरएसई द्वारा निर्मित नीलगिरी क्लास का पाँचवाँ एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे 21 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना में कमीशन किया। यह ब्रह्मोस मिसाइल, बराक-8 और वरुणास्त्र टॉरपीडो से लैस है और तीनों डोमेन — सतह, हवा और पानी के नीचे — में खतरों का मुकाबला कर सकता है।
आईएनएस अग्रय की विशेषताएँ क्या हैं?
आईएनएस अग्रय एक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है जो 25 नॉट की गति से 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। यह हल-माउंटेड सोनार, वेरिएबल डेप्थ सोनार, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन और उन्नत डिकॉय सिस्टम से सुसज्जित है तथा तटीय क्षेत्रों में 100 से 150 नॉटिकल मील तक पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत कितने फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं?
प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। अब तक नीलगिरी (जनवरी 2025), हिमगिरी, उदयगिरी, तारागिरी (मार्च 2026) और दूनागिरी (जून 2026) नौसेना में शामिल हो चुके हैं।
आईएनएस दूनागिरी और अग्रय के नाम किससे प्रेरित हैं?
आईएनएस दूनागिरी का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है, जो रामायण में हनुमान जी द्वारा संजीवनी लाने की कथा से जुड़ा है। आईएनएस अग्रय का इंसिग्निया महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के गांडीव धनुष से प्रेरित है, जो अचूक निशाने का प्रतीक है।
एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना कितनी बड़ी है?
2019 में स्वीकृत इस परियोजना के तहत कुल 16 युद्धपोत बनाए जाने हैं — आठ कोचिन शिपयार्ड में और आठ जीआरएसई में। अब तक आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे, आईएनएस अंजदीप और अब आईएनएस अग्रय नौसेना में शामिल हो चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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