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21 जून को PM मोदी नौसेना में शामिल करेंगे तीन स्वदेशी युद्धपोत — दूनागिरी, अग्रेह और संशोधक

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21 जून को PM मोदी नौसेना में शामिल करेंगे तीन स्वदेशी युद्धपोत — दूनागिरी, अग्रेह और संशोधक

सारांश

21 जून को कोलकाता में एक ही दिन में तीन स्वदेशी युद्धपोत — दूनागिरी, अग्रेह और संशोधक — नौसेना में शामिल होंगे। यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है, जो युद्धक, पनडुब्बी-रोधी और हाइड्रोग्राफिक तीनों मोर्चों को एक साथ मजबूत करता है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर तीन स्वदेशी युद्धपोत नौसेना को सौंपेंगे।
तीनों युद्धपोत हैं — गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी , ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और लार्ज सर्वे वेसेल संशोधक ।
दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए का पाँचवाँ फ्रिगेट है; 6,700 टन वजनी, 75% स्वदेशी उपकरणों से लैस और 30 नॉट की गति सक्षम।
अग्रेह तटीय जल में 100-150 नॉटिकल मील तक पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम; 2019 में स्वीकृत 16-जहाज ASW परियोजना का हिस्सा।
संशोधक चार बड़े सर्वे जहाजों की श्रृंखला का अंतिम जहाज है; 110 मीटर लंबा, 80%+ स्वदेशी सामग्री, 25 दिन तक समुद्र में रहने में सक्षम।
इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में भी एक दिन में तीन युद्धपोत नौसेना में शामिल किए गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित एक विशेष समारोह में एक ही दिन में तीन स्वदेशी युद्धपोतों को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे। इन तीन वॉरशिप में गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और लार्ज सर्वे वेसेल संशोधक शामिल हैं। यह आत्मनिर्भर भारत के तहत नौसेना की स्वदेशी क्षमता विस्तार की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम है।

तीनों युद्धपोत: एक परिचय

दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित पाँचवाँ नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट है। इसे 30 मार्च 2026 को नौसेना को सौंपा गया था। यह पूर्ववर्ती आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक सेवा में रहा।

पिछले चार जहाजों के निर्माण अनुभव के आधार पर दूनागिरी का निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया — यह भारतीय जहाज निर्माण दक्षता में उल्लेखनीय सुधार का संकेत है। 6,700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉट की अधिकतम गति से चलने में सक्षम है।

दूनागिरी की युद्धक क्षमता

दूनागिरी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली, बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, स्वदेशी टॉरपीडो 'वरुणास्त्र', एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक प्रणालियाँ लगी हैं। इसके लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इससे पहले आईएनएस नीलगिरी (जनवरी 2025), हिमगिरी, उदयगिरी और तारागिरी (मार्च 2026) को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

अग्रेह: पनडुब्बी-रोधी शक्ति का नया अध्याय

दुश्मन की पनडुब्बियों से तटीय जलक्षेत्र की रक्षा के लिए 2019 में 16 एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) शैलो वॉटर क्राफ्ट के निर्माण का अनुबंध दिया गया था — आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ GRSE में। अग्रेह इसी परियोजना की नवीनतम कड़ी है।

इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को बेड़े में शामिल किया जा चुका है। अग्रेह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। यह 25 नॉट की गति से चलने और लगभग 3,300 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है। तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।

संशोधक: समुद्री मानचित्रण का अंतिम स्तंभ

भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर 2018 को चार बड़े सर्वे जहाजों के निर्माण का अनुबंध दिया था। इस श्रृंखला में आईएनएस संध्याक और आईएनएस निर्देशक को 2024 में तथा आईएनएस इक्षक को 2025 में शामिल किया गया। संशोधक इस श्रृंखला का चौथा और अंतिम जहाज है।

GRSE, कोलकाता में निर्मित यह जहाज 110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी है। दो डीजल इंजनों से संचालित यह पोत 18 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है और 25 दिनों से अधिक समय तक समुद्र में रह सकता है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। यह समुद्र तल की स्कैनिंग, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और सुरक्षित नेविगेशन के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने में सक्षम है।

ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब एक ही दिन में तीन युद्धपोत नौसेना में शामिल हो रहे हों। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस सूरत और पनडुब्बी आईएनएस वागशीर को एक साथ नौसेना में शामिल किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और भारत अपनी नीली जल नौसेना क्षमता को तेज़ी से सुदृढ़ कर रहा है। इन तीनों युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्धक, पनडुब्बी-रोधी और हाइड्रोग्राफिक क्षमताओं में एक साथ वृद्धि होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की जहाज निर्माण गति में आए संरचनात्मक बदलाव का संकेत है — दूनागिरी का निर्माण समय 93 से 80 महीने पर आना इसकी पुष्टि करता है। हालाँकि असली परीक्षा परिचालन तत्परता की है: युद्धपोत कमीशन होना और उनका पूर्ण युद्धक क्षमता पर तैनात होना दो अलग मील के पत्थर हैं, जिन्हें अक्सर एक ही माना जाता है। हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच ASW और हाइड्रोग्राफिक क्षमताओं का एक साथ विस्तार यह दर्शाता है कि नौसेना केवल सतह पर नहीं, समुद्र के भीतर और उसकी भूगोल को समझने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है — यह दूरदर्शिता सराहनीय है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 जून को कौन-से तीन युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल होंगे?
21 जून 2026 को गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और लार्ज सर्वे वेसेल संशोधक को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह समारोह कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होगा।
दूनागिरी फ्रिगेट की खासियत क्या है?
दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत GRSE द्वारा निर्मित पाँचवाँ नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट है। यह 6,700 टन वजनी है, 30 नॉट की गति से चलता है और ब्रह्मोस मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस मिसाइल, स्वदेशी टॉरपीडो 'वरुणास्त्र' तथा आधुनिक सोनार प्रणाली से लैस है। इसके लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं।
अग्रेह ASW क्राफ्ट क्या काम करेगा?
अग्रेह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जो तटीय क्षेत्रों में 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है। यह 25 नॉट की गति से चलने और लगभग 3,300 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है।
सर्वे वेसेल संशोधक की भूमिका क्या होगी?
संशोधक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करेगा, समुद्र तल की स्कैनिंग करेगा और सुरक्षित नेविगेशन के लिए समुद्री चार्ट तैयार करेगा। 110 मीटर लंबा और 3,800 टन वजनी यह जहाज 25 दिनों से अधिक समय तक समुद्र में रह सकता है और इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है।
क्या पहले भी एक दिन में तीन युद्धपोत नौसेना में शामिल हुए हैं?
हाँ, 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस सूरत और पनडुब्बी आईएनएस वागशीर को एक साथ नौसेना में शामिल किया गया था। 21 जून 2026 का समारोह इस परंपरा की अगली कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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