2 अगस्त 2026
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स्वदेशी डीएससी ए24 कोलकाता में लॉन्च: 70% स्वदेशी उपकरणों से लैस भारतीय नौसेना का पाँचवाँ डाइविंग सपोर्ट पोत

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स्वदेशी डीएससी ए24 कोलकाता में लॉन्च: 70% स्वदेशी उपकरणों से लैस भारतीय नौसेना का पाँचवाँ डाइविंग सपोर्ट पोत

सारांश

भारतीय नौसेना ने 2 अगस्त को कोलकाता में डीएससी ए24 — डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना का पाँचवाँ और अंतिम पोत — लॉन्च किया। 70% स्वदेशी उपकरणों से लैस यह कैटामरन-हल पोत आत्मनिर्भर भारत मिशन की ठोस मिसाल है और नौसेना की अंडरवाटर परिचालन क्षमता को नई ऊँचाई देगा।

मुख्य बातें

डीएससी ए24 को 2 अगस्त 2026 को कोलकाता के टीटागढ़ शिपयार्ड में लॉन्च किया गया।
यह डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना का पाँचवाँ और अंतिम पोत है, जिसे यार्ड 329 भी कहा जाता है।
पोत में 70 प्रतिशत मुख्य व सहायक उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं।
कैटामरन-हल डिज़ाइन के कारण बेहतर स्थिरता; विस्थापन 300 से 400 टन के बीच।
जलावतरण में वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह , कार्मिक प्रमुख, उपस्थित रहे।
इन पोतों से नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवाटर इंस्पेक्शन और बचाव क्षमता में बड़ा इज़ाफा होगा।

भारतीय नौसेना ने 2 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित टीटागढ़ शिपयार्ड में डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) ए24 को जलावतरण कर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। यह डीएससी परियोजना का पाँचवाँ और अंतिम पोत है, जिसे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत पूर्णतः स्वदेशी क्षमता से निर्मित किया गया है। इस पोत में प्रयुक्त 70 प्रतिशत मुख्य एवं सहायक उपकरण भारतीय निर्माताओं द्वारा आपूर्ति किए गए हैं।

लॉन्च समारोह और उपस्थित अधिकारी

जलावतरण समारोह नौसेना की पारंपरिक औपचारिक रीति-रिवाजों के अनुरूप आयोजित किया गया। भारतीय नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में पोत को जल में उतारा गया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना और एम/एस टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

पोत की तकनीकी विशेषताएँ

डीएससी ए24 को यार्ड 329 के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा आईआरएस और नौसेना नियमों के अनुपालन में किया गया है। पोत को कैटामरन-हल डिज़ाइन दिया गया है — इस संरचना में एक बड़े ढाँचे के बजाय समान आकार के दो समानांतर पतवार होते हैं, जो ऊपर एक साझा डेक या ब्रिजडेक से जुड़े होते हैं। इस डिज़ाइन के कारण पोत को बेहतर स्थिरता, विस्तृत डेक क्षेत्र और उच्च समुद्री प्रदर्शन प्राप्त होता है।

पोत का विस्थापन लगभग 300 से 400 टन के बीच है। यह अत्याधुनिक डाइविंग सिस्टम से सुसज्जित है और विशेष रूप से परिचालन डाइव्स के लिए डिज़ाइन किया गया है।

स्वदेशीकरण की उपलब्धि

गौरतलब है कि इस पोत में इस्तेमाल होने वाले 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं। यह तथ्य डीएससी ए24 को आत्मनिर्भर भारत मिशन का एक सशक्त प्रतीक बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा उत्पादन में विदेशी निर्भरता घटाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

नौसेना की परिचालन क्षमता पर असर

डीएससी परियोजना के सभी पाँच पोतों के बेड़े में शामिल होने से भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवाटर इंस्पेक्शन, बचाव सहायता और तटीय परिचालन तैनाती की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ये पोत न केवल समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करेंगे, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की इंजीनियरिंग दक्षता का भी प्रमाण हैं।

आगे की राह

डीएससी ए24 के जलावतरण के बाद अब पोत को समुद्री परीक्षणों और नौसेना के परिचालन मानकों के अनुरूप अंतिम रूप दिया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस श्रृंखला की सफलता भविष्य में और अधिक विशेष-उद्देश्यीय स्वदेशी नौसैनिक पोतों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली कसौटी परिचालन तैनाती और दीर्घकालिक रखरखाव में होगी — जहाँ स्वदेशी प्रणालियाँ अक्सर चुनौतियों का सामना करती हैं। टीटागढ़ जैसी निजी शिपयार्ड को नौसेना परियोजनाओं में शामिल करना रक्षा-औद्योगिक साझेदारी की दिशा में सही कदम है, लेकिन इस मॉडल को बड़े और जटिल युद्धपोतों तक विस्तारित करने की गति अभी धीमी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएससी ए24 क्या है और इसे क्यों लॉन्च किया गया?
डीएससी ए24 भारतीय नौसेना के डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) परियोजना का पाँचवाँ और अंतिम पोत है, जिसे 2 अगस्त 2026 को कोलकाता के टीटागढ़ शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। यह पोत नौसेना की अंडरवाटर डाइविंग, निरीक्षण और बचाव क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए बनाया गया है।
डीएससी ए24 में कैटामरन-हल डिज़ाइन क्यों अपनाया गया?
कैटामरन-हल डिज़ाइन में दो समानांतर पतवार होते हैं जो एक साझा डेक से जुड़े होते हैं। यह संरचना पोत को बेहतर स्थिरता, विस्तृत डेक क्षेत्र और उच्च समुद्री प्रदर्शन प्रदान करती है, जो डाइविंग ऑपरेशन के लिए अनिवार्य हैं।
डीएससी ए24 में स्वदेशीकरण का स्तर कितना है?
इस पोत में प्रयुक्त 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं। यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
इस पोत का निर्माण किसने किया और इसकी देखरेख किसने की?
डीएससी ए24 का निर्माण एम/एस टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल), कोलकाता द्वारा आईआरएस और नौसेना नियमों के अनुपालन में किया गया है। जलावतरण समारोह में भारतीय नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह उपस्थित रहे।
डीएससी परियोजना के पोत भारतीय नौसेना को कैसे मज़बूत करेंगे?
इन पाँचों पोतों के बेड़े में शामिल होने से भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवाटर इंस्पेक्शन, बचाव सहायता और तटीय परिचालन तैनाती की क्षमता में बड़ा इज़ाफा होगा। ये पोत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रतीक भी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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