11 अगस्त 2026
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भारतीय नौसेना को मिली स्वदेशी गश्ती पोत 'श्रुति', GRSE कोलकाता में हुआ जलावतरण

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भारतीय नौसेना को मिली स्वदेशी गश्ती पोत 'श्रुति', GRSE कोलकाता में हुआ जलावतरण

सारांश

'श्रुति' सिर्फ एक पोत नहीं — यह भारत की उस रणनीतिक महत्वाकांक्षा का प्रतीक है जो हिंद महासागर को अपना गृह-क्षेत्र मानती है। GRSE कोलकाता में जलावतरित यह स्वदेशी गश्ती पोत 'आत्मनिर्भर भारत' की नौसैनिक अभिव्यक्ति है — और यह संकेत देती है कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए विदेशी निर्भरता कम कर रहा है।

मुख्य बातें

यार्ड 3037 'श्रुति' का जलावतरण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता में किया गया।
पोत का नाम भारत की वैदिक परंपरा से लिया गया है — 'श्रुति' चारों वेदों का सामूहिक संदर्भ है।
भूमिकाएँ: समुद्री डकैती-रोधी अभियान, निगरानी, खोज-बचाव, आपदा राहत और महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा।
निर्माण एक साथ गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और GRSE कोलकाता — दोनों भारतीय कंपनियों में हो रहा है।
जलावतरण समारोह में वाइस एडमिरल संजय साधु उपस्थित; मनिका साधु ने पोत का जलावतरण किया।
परियोजना केंद्र सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान का हिस्सा है।

भारतीय नौसेना के बेड़े में 12 अगस्त 2025 को एक नई ताकत जुड़ी — नई पीढ़ी की स्वदेशी अपतटीय गश्ती पोत यार्ड 3037 'श्रुति' का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता में विधिवत जलावतरण किया गया। यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी और त्वरित कार्रवाई क्षमता को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

पोत 'श्रुति' की पहचान और प्रतीक

पोत का नाम 'श्रुति' भारत की वैदिक परंपरा से लिया गया है — यह शब्द चारों वेदों को एक साथ संदर्भित करता है, जो ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रतीक हैं। पोत के प्रतीक चिह्न में उर्सा मेजर तारामंडल और लाल व सफेद रंग का प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है। प्रकाशस्तंभ समुद्री सुरक्षा और मार्गदर्शन का, जबकि तारामंडल नौवहन की सदियों पुरानी परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।

मुख्य भूमिकाएँ और अभियान-क्षमता

इस श्रेणी की गश्ती पोतों को बहु-उद्देशीय समुद्री अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनकी प्रमुख भूमिकाओं में समुद्री डकैती-रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, समुद्र में स्थित महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा, तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत शामिल हैं। विशेष रूप से हिंद महासागर के व्यस्त समुद्री मार्गों पर निगरानी में इनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

जलावतरण समारोह

इस अवसर पर नौसेना के युद्धपोत निर्माण एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु उपस्थित रहे। मनिका साधु ने पारंपरिक रीति से पोत का जलावतरण किया। समारोह में भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और GRSE के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

दो शिपयार्ड में एक साथ निर्माण

नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों का निर्माण एक साथ दो प्रमुख भारतीय पोत निर्माण कंपनियों में किया जा रहा है — गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता। गौरतलब है कि इन पोतों को पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और निर्मित किया जा रहा है, जो देश की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का प्रमाण है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

'श्रुति' का जलावतरण केंद्र सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान के अनुरूप है। स्वदेशी युद्धपोत और गश्ती पोत निर्माण से न केवल देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को बल मिलता है, बल्कि इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी मजबूती मिलती है। यह परियोजना भारतीय नौसेना की स्वदेशी जहाज निर्माण यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है — और आने वाले वर्षों में इस श्रृंखला की और पोतें बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि परिचालन प्रभावशीलता में भी विदेशी विकल्पों को पीछे छोड़ें।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय नौसेना की गश्ती पोत 'श्रुति' क्या है?
'श्रुति' (यार्ड 3037) नई पीढ़ी की एक स्वदेशी अपतटीय गश्ती पोत है, जिसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता में निर्मित किया जा रहा है। इसका जलावतरण भारतीय नौसेना के बेड़े को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पोत 'श्रुति' का नाम किस आधार पर रखा गया?
'श्रुति' नाम भारत की वैदिक परंपरा से लिया गया है — यह शब्द चारों वेदों को एक साथ संदर्भित करता है और ज्ञान व मार्गदर्शन का प्रतीक है। पोत के प्रतीक चिह्न में उर्सा मेजर तारामंडल और प्रकाशस्तंभ भी इसी भाव को दर्शाते हैं।
गश्ती पोत 'श्रुति' किन अभियानों में काम आएगी?
यह पोत समुद्री डकैती-रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, महत्वपूर्ण समुद्री परिसंपत्तियों की सुरक्षा और मानवीय सहायता व आपदा राहत अभियानों में तैनात की जाएगी। हिंद महासागर के व्यस्त समुद्री मार्गों पर निगरानी इसकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतें कहाँ बनाई जा रही हैं?
इस श्रृंखला की पोतें एक साथ दो भारतीय कंपनियों — गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता — में निर्मित की जा रही हैं। इन्हें पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और निर्मित किया जा रहा है।
यह परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' से कैसे जुड़ी है?
स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण पर आधारित यह परियोजना केंद्र सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान का प्रत्यक्ष उदाहरण है। इससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ती है और विदेशी जहाज निर्माण पर निर्भरता कम होती है।
राष्ट्र प्रेस
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