29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारतीय नौसेना को मिला स्वदेशी ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम', 80% स्वदेशी सामग्री से निर्मित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारतीय नौसेना को मिला स्वदेशी ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम', 80% स्वदेशी सामग्री से निर्मित

सारांश

एक सप्ताह में दो स्वदेशी ASW युद्धपोत — 'मछलीपट्टनम' और 'आईएनएस मालवन' — भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुए। 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित ये पोत आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमता और हिंद महासागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति का प्रमाण हैं।

मुख्य बातें

29 जुलाई 2026 को स्वदेशी ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' का जलावतरण हुआ।
यह आठ ASW शेलो वाटर क्राफ्ट की श्रृंखला का सातवाँ युद्धपोत है।
युद्धपोत 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित; निर्माता — कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ।
जलावतरण गुलरुख आनंद ने किया; वाइस एडमिरल अतुल आनंद समारोह में उपस्थित रहे।
एक सप्ताह पहले 22 जुलाई को आईएनएस मालवन को करवार में नौसेना में शामिल किया गया था।
यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता में 29 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा, जब स्वदेशी एंटी सबमरीन वॉरफेयर शेलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) 'मछलीपट्टनम' का विधिवत जलावतरण किया गया। यह युद्धपोत नौसेना के लिए निर्मित की जा रही आठ ASW शेलो वाटर क्राफ्ट की श्रृंखला का सातवाँ पोत है और 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है।

युद्धपोत की क्षमताएँ और विशेषताएँ

'मछलीपट्टनम' को पानी के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान तथा बारूदी सुरंग रोधी अभियानों के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है। नौसेना के अनुसार, इसके बेड़े में शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों की समग्र क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा को और सुदृढ़ करेगा।

जलावतरण समारोह और उपस्थित गणमान्य

युद्धपोत का जलावतरण गुलरुख आनंद ने किया। इस अवसर पर सैन्य कार्य विभाग के अतिरिक्त सचिव व वाइस एडमिरल अतुल आनंद, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के वरिष्ठ अधिकारी तथा भारतीय नौसेना के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस युद्धपोत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है, जो देश के जहाज निर्माण क्षेत्र की बढ़ती तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

नाम की ऐतिहासिक विरासत

युद्धपोत का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के ऐतिहासिक बंदरगाह नगर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है। भारत के पूर्वी तट पर स्थित यह नगर अपनी समृद्ध समुद्री परंपरा और प्राचीन व्यापारिक विरासत के लिए सदियों से प्रसिद्ध रहा है। यह नामकरण भारतीय नौसेना की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जिसमें ऐतिहासिक तटीय नगरों के नाम पर युद्धपोतों का नामकरण किया जाता है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के उपयोग से यह स्पष्ट होता है कि भारत का जहाज निर्माण उद्योग अब जटिल नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार करने में सक्षम हो चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारत हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को लगातार विस्तार दे रहा है।

आईएनएस मालवन: एक सप्ताह में दूसरा ASW युद्धपोत

गौरतलब है कि इससे ठीक एक सप्ताह पहले, 22 जुलाई को, आईएनएस मालवन को करवार में औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह भी एक स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी का ASW शेलो वाटर क्राफ्ट है। नौसेना के अनुसार, आईएनएस मालवन बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वित अभियान चलाने में पूरी तरह सक्षम है। एक सप्ताह के भीतर दो ASW युद्धपोतों का बेड़े में शामिल होना भारत की रक्षा उत्पादन गति और नौसैनिक आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इन पोतों में लगी अत्याधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियाँ किस हद तक स्वदेशी हैं — क्योंकि अक्सर 'स्वदेशी सामग्री' में पतवार और संरचना का बड़ा हिस्सा होता है, जबकि महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स आयातित रहते हैं। हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बी गतिविधियों के बढ़ते दबाव के बीच इन ASW क्षमताओं का विस्तार रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' क्या है और इसे कब जलावतरित किया गया?
'मछलीपट्टनम' एक स्वदेशी एंटी सबमरीन वॉरफेयर शेलो वाटर क्राफ्ट है, जिसे 29 जुलाई 2026 को जलावतरित किया गया। यह भारतीय नौसेना के लिए निर्मित आठ ASW पोतों की श्रृंखला का सातवाँ युद्धपोत है और इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है।
'मछलीपट्टनम' युद्धपोत की मुख्य क्षमताएँ क्या हैं?
यह युद्धपोत पानी के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और बारूदी सुरंग रोधी अभियानों के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस है। इसके शामिल होने से तटीय सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस युद्धपोत का नाम 'मछलीपट्टनम' क्यों रखा गया?
युद्धपोत का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के ऐतिहासिक बंदरगाह नगर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है। यह नगर भारत के पूर्वी तट पर अपनी समृद्ध समुद्री परंपरा और प्राचीन व्यापारिक विरासत के लिए सदियों से जाना जाता है।
आईएनएस मालवन कब और कहाँ नौसेना में शामिल हुआ?
आईएनएस मालवन को 22 जुलाई 2026 को करवार में औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। यह भी एक स्वदेशी माहे श्रेणी का ASW शेलो वाटर क्राफ्ट है और बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों तथा नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वित अभियान चलाने में सक्षम है।
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
'मछलीपट्टनम' में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह भारत के जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करती है और रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले