क्या तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल हुआ सबसे बड़ा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’?

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क्या तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल हुआ सबसे बड़ा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’?

सारांश

समुद्र प्रताप का तटरक्षक बल के बेड़े में समावेश भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को दर्शाता है। यह केवल प्रदूषण नियंत्रण के लिए नहीं, बल्कि सर्च और रेस्क्यू में भी सक्षम है। इसके साथ ही, इसमें महिला अधिकारियों की नियुक्ति से महिला सशक्तिकरण का भी परिचय मिलता है।

मुख्य बातें

स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ का समावेश तटरक्षक बल की सुरक्षा में नई उपलब्धि महिला अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका समुद्री प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सशक्त कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को तटरक्षक बल के बेड़े में स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ का समावेश किया। समुद्र प्रताप को खासतौर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसकी क्षमताएँ यहीं तक सीमित नहीं हैं। यह सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशनों में भी कुशल है, तटीय गश्त में प्रभावी है, और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसका अर्थ यह है कि इस पोत में एक ही प्लेटफार्म पर कई क्षमताएँ समाहित की गई हैं। रक्षा मंत्री के अनुसार, यही आधुनिक दृष्टिकोण आज की समुद्री चुनौतियों की मांग है, जहाँ लचीलापन और तैयारी दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। ‘समुद्र प्रताप’ का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ की लंबाई 114.5 मीटर और वजन लगभग 4,200 टन है। यह शक्तिशाली पोत 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित है और इसकी गति 22 नॉट से अधिक है। ये क्षमताएँ इसे लंबी दूरी के परिचालनों के लिए अत्यधिक सक्षम बनाती हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा, “इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है। हमारी मेक इन इंडिया पहल का असली अर्थ ऐसे प्रोजेक्ट में प्रकट होता है। इस जटिल प्लेटफार्म में इतनी मात्रा में स्वदेशी सामग्री यह दर्शाती है कि हमारा डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम अब काफी परिपक्व हो चुका है।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि समुद्र प्रताप, भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई प्रदूषण नियंत्रण वेसल है और तटरक्षक बल की अब तक की सबसे बड़ी पोत है। इसका आकार, 4,170 टन वजन और 115 मीटर की लंबाई इसकी विशालता को दर्शाती है।

रक्षामंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में समुद्री प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक चुनौती बनकर उभरा है, जो मछुआरों की आजीविका और तटीय समुदायों के भविष्य पर प्रभाव डालता है। इसलिए, तटरक्षक बल द्वारा चलाए गए तटीय स्वच्छता अभियान और प्रदूषण रिस्पांस अभियान वास्तव में सराहनीय हैं।

उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल ने देशवासियों में जो विश्वास पैदा किया है, वह सराहनीय है। यह हमारे किसानों और मछुआरों के लिए सुरक्षा का प्रतीक है। इसके अलावा, यह हमारे दुश्मनों में भी विश्वास पैदा करता है कि अगर वे गलती से भी भारत की समुद्री सीमा की ओर देखें, तो भारतीय तटरक्षक बल उन्हें देखने लायक नहीं छोड़ेगा।

रक्षामंत्री ने कहा, “समुद्र हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और भविष्य का आधार है। एक सुरक्षित और स्वच्छ समुद्र ही सुरक्षित व्यापार और पर्यावरण की गारंटी दे सकता है। समुद्र प्रताप जैसे प्लेटफार्म हमें विश्वास दिलाते हैं कि भारत अपनी समुद्री प्रतिबद्धताओं को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

समुद्र प्रताप पर, दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ये अधिकारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरी हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि तटरक्षक बल अवसर और विकास का माध्यम बना रहेगा। यह गर्व का विषय है कि आज महिला अफसरों को महत्वपूर्ण दायित्वों में नियुक्त किया गया है।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इससे देश की समुद्री सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति होती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समुद्र प्रताप की विशेषताएँ क्या हैं?
समुद्र प्रताप 114.5 मीटर लंबा, 4,200 टन वजनी और 60% से अधिक स्वदेशी तकनीक से बना है।
यह पोत किन कार्यों के लिए सक्षम है?
यह प्रदूषण नियंत्रण, सर्च और रेस्क्यू, तथा तटीय गश्त में कुशल है।
समुद्र प्रताप में महिला अधिकारियों की क्या भूमिका है?
इसमें दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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