16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारतीय नौसेना में 22 जुलाई को शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत 'मालवन', 80% स्वदेशी तकनीक से लैस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारतीय नौसेना में 22 जुलाई को शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत 'मालवन', 80% स्वदेशी तकनीक से लैस

सारांश

'मालवन' सिर्फ एक युद्धपोत नहीं — यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता का जीवंत प्रमाण है। 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से लैस इस पोत का 22 जुलाई को नौसेना में शामिल होना हिंद महासागर में भारत की पनडुब्बी रोधी क्षमता को नई धार देगा।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना 22 जुलाई 2025 को एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट 'मालवन' को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल करेगी।
यह माहे श्रेणी का दूसरा पोत है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) , कोच्चि में निर्मित किया गया है।
पोत में 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का उपयोग, 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल की बड़ी उपलब्धि।
कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी.
वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन (पश्चिमी नौसेना कमान) सहित वरिष्ठ अधिकारी और CSL प्रतिनिधि समारोह में उपस्थित रहेंगे।
पोत उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी का पता लगाने और निष्क्रिय करने की विशेष क्षमता से लैस है।

भारतीय नौसेना 22 जुलाई 2025 को अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट 'मालवन' को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि में निर्मित यह पोत माहे श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का उपयोग किया गया है। यह कमीशनिंग भारत की आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

कमीशनिंग समारोह का विवरण

कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह करेंगे। इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन, CSL के प्रतिनिधि, पूर्व नौसैनिक और अन्य विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहेंगे। यह समारोह भारतीय नौसेना और देश के रक्षा उद्योग के लिए एक संयुक्त उत्सव का अवसर होगा।

युद्धपोत की विशेषताएँ और क्षमताएँ

'मालवन' को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। आकार में अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद यह पोत तेज़ गति, फुर्ती, सटीक संचालन क्षमता और लंबी परिचालन सहनशक्ति से सुसज्जित है। नौसेना के अनुसार, माहे श्रेणी के ये पोत तटीय सुरक्षा सुदृढ़ करने के साथ-साथ समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे।

स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की बढ़ती ताकत

गौरतलब है कि 'मालवन' में 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण और प्रणालियाँ शामिल हैं, जो भारत के घरेलू रक्षा उद्योग की परिपक्वता को रेखांकित करता है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने इस पोत के डिज़ाइन और निर्माण में जो विशेषज्ञता दिखाई है, वह 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल की व्यावहारिक सफलता का प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत आयात पर निर्भरता घटाकर रक्षा निर्यात बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

समुद्री सुरक्षा पर असर

भारतीय नौसेना के बेड़े में 'मालवन' के शामिल होने से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी गतिविधियों की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए इस श्रेणी के पोत रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में माहे श्रेणी के और पोतों के कमीशन होने की उम्मीद है, जो नौसेना की समग्र युद्धक क्षमता को और सशक्त बनाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि माहे श्रेणी के शेष पोत कितनी तेज़ी से और किस लागत पर बेड़े में जुड़ते हैं। CSL की यह सफलता रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की क्षमता को रेखांकित करती है, पर निजी शिपयार्ड के साथ प्रतिस्पर्धात्मक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किए बिना आत्मनिर्भरता का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युद्धपोत 'मालवन' क्या है और इसे नौसेना में कब शामिल किया जाएगा?
'मालवन' एक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है जिसे 22 जुलाई 2025 को भारतीय नौसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। यह माहे श्रेणी का दूसरा पोत है और इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में हुआ है।
'मालवन' में कितनी स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है?
इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का उपयोग किया गया है। यह भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता और युद्धपोत डिज़ाइन में बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।
माहे श्रेणी के पोत किस काम के लिए बनाए गए हैं?
माहे श्रेणी के पोत विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित किए गए हैं। ये तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
'मालवन' के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता कौन करेगा?
कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह करेंगे। इसके अलावा वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन और CSL के प्रतिनिधि सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
भारतीय नौसेना के लिए 'मालवन' की कमीशनिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
'मालवन' के शामिल होने से नौसेना की उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम है, जो आयात पर निर्भरता घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले