सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी: चिराग शेट्टी के साथ कॉमनवेल्थ पुरुष डबल्स में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण
सारांश
मुख्य बातें
बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी आज भारतीय और वैश्विक बैडमिंटन के सबसे चमकदार नामों में से एक हैं। अपने जोड़ीदार चिराग शेट्टी के साथ मिलकर उन्होंने पुरुष डबल्स में ऐसा दबदबा बनाया है जो भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। 13 अगस्त 2000 को अमलापुरम, आंध्र प्रदेश में जन्मे रंकीरेड्डी अब 26 वर्ष के हो रहे हैं और देश की खेल उम्मीदों के केंद्र में हैं।
शुरुआती जीवन और प्रशिक्षण
रंकीरेड्डी ने बैडमिंटन की प्रेरणा अपने पिता और बड़े भाई से ली, जिनमें उनके पिता राज्य स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं। 2014 में उन्होंने हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में दाखिला लिया और डबल्स में करियर बनाने का निर्णय किया। यहीं उनकी मुलाकात चिराग शेट्टी से हुई, जो उसी अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे थे।
साझेदारी की नींव और अंतरराष्ट्रीय शुरुआत
2015 में दोनों ने एक साथ खेलना शुरू किया और जल्द ही यह जोड़ी भारतीय बैडमिंटन की सबसे भरोसेमंद पहचान बन गई। उनकी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता 2018 में गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में आई, जहाँ दोनों ने मिश्रित टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता और विश्व बैडमिंटन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
ऐतिहासिक स्वर्ण और प्रमुख उपलब्धियाँ
2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने पुरुष डबल्स में स्वर्ण पदक जीता — कॉमनवेल्थ गेम्स बैडमिंटन के इतिहास में पुरुष डबल्स में यह भारत का पहला स्वर्ण था। इसके अलावा दोनों की उपलब्धियों की सूची प्रभावशाली है:
टोक्यो विश्व चैंपियनशिप 2022 और पेरिस विश्व चैंपियनशिप 2025 में पुरुष डबल्स में कांस्य पदक। बैंकॉक थॉमस कप 2022 में पुरुष टीम के साथ स्वर्ण और 2026 थॉमस कप में कांस्य पदक। 2022 एशियन गेम्स में डबल्स में स्वर्ण और पुरुष टीम के साथ रजत पदक। 2023 एशियन चैंपियनशिप में डबल्स में स्वर्ण पदक।
सरकारी सम्मान
रंकीरेड्डी की उत्कृष्ट उपलब्धियों को भारत सरकार ने भी मान्यता दी। उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार और 2023 में भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार से नवाज़ा गया। यह दोनों पुरस्कार एक ही खिलाड़ी को मिलना उनकी निरंतर श्रेष्ठता का प्रमाण है।
भविष्य की उम्मीदें
गौरतलब है कि 26 वर्ष की उम्र में ही रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने जितनी उपलब्धियाँ हासिल की हैं, वे किसी भी भारतीय बैडमिंटन जोड़ी के लिए अभूतपूर्व हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत बैडमिंटन में वैश्विक महाशक्ति के रूप में अपनी पहचान मज़बूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में इस जोड़ी से ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में और बड़े पदकों की उम्मीद देश को बनी हुई है।