अमेरिका-ईरान वार्ता पर स्विट्जरलैंड का स्वागत, 60 दिन के रोडमैप को बताया कूटनीतिक सफलता
सारांश
मुख्य बातें
स्विट्जरलैंड के विदेश मामलों के संघीय विभाग (एफडीएफए) ने 22 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत किया, जिसमें दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर एक अंतिम परमाणु समझौते तक पहुँचने का रोडमैप तैयार किया है। बर्गेनस्टॉक में 21-22 जून की रात हुई गहन कूटनीतिक बैठकों में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
वार्ता में क्या हुआ
बर्गेनस्टॉक में हुई इन वार्ताओं के दौरान अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देशों के बीच रचनात्मक प्रगति दर्ज की गई। दोनों पक्षों ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आधार पर उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर सहमति जताई, जो राजनीतिक और तकनीकी वार्ताओं के अगले चरण को व्यवस्थित करेगी। ईरान के अनुसार, वार्ता के परिणामस्वरूप तेल निर्यात के लिए छूट और कुछ जब्त परिसंपत्तियों को मुक्त करने पर भी सहमति बनी है।
स्विट्जरलैंड की भूमिका
एफडीएफए ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड अपनी पारंपरिक 'गुड ऑफिसेज' नीति के तहत इस प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्विस सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य मध्य पूर्व में तनाव कम करना, क्षेत्रीय स्थिरता को मज़बूत करना और स्थायी शांति की दिशा में योगदान देना है। गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड दशकों से अमेरिका और ईरान के बीच एक विश्वसनीय संवाद-सेतु की भूमिका निभाता रहा है।
युद्धविराम निगरानी पर सहमति
वार्ता के एक अहम पहलू के रूप में दोनों पक्षों ने लेबनान में युद्धविराम की निगरानी के लिए एक 'डि-कन्फ्लिक्शन सेल' स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की है। यह कदम मध्य पूर्व में जारी व्यापक तनाव के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि लेबनान में संघर्ष की स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
स्विस सरकार के अनुसार, 60 दिन का यह रोडमैप नई तकनीकी वार्ताओं को तुरंत फिर से शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगा। उच्चस्तरीय समिति के गठन से बातचीत की प्रक्रिया को एक ठोस संस्थागत आधार मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की माँग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ हो रही है।