यूएस-ईरान बर्गेनस्टॉक वार्ता: 18 घंटे बाद 'प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता' पर सहमति, लेबनान संघर्ष विराम भी एजेंडे में
सारांश
मुख्य बातें
स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न झील क्षेत्र में 22 जून 2026 को शुरू हुई अमेरिका-ईरान वार्ता 18 घंटे से अधिक समय तक चली, जिसके बाद ईरान के शीर्ष वार्ताकार तेहरान के लिए रवाना हो गए। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार, इस दौर की वार्ता में 'रचनात्मक प्रगति' हुई और दोनों पक्षों ने 'प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता' के सिद्धांत पर आगे बढ़ने की सहमति जताई है।
वार्ता का विवरण और समयरेखा
यह वार्ता रविवार, 22 जून को शुरू होकर सोमवार तड़के तक जारी रही। बाघेई ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने संघर्ष समाप्ति से संबंधित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर गहन चर्चा पूरी करने के बाद स्वदेश लौटने की तैयारी की। यह वार्ता बर्गेनस्टॉक प्रक्रिया के तहत आयोजित की गई थी।
मध्यस्थों की भूमिका और संयुक्त बयान
इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, ईरान और अमेरिका के परामर्श से समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र पर सहमति बनी है। यह भी तय हुआ कि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशेषज्ञ और तकनीकी स्तर की वार्ताएँ आगे भी जारी रहेंगी।
तीन प्रमुख मुद्दों पर प्रगति
ईरानी पक्ष के अनुसार, इस दौर में विशेष रूप से तीन अहम मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। पहला, लेबनान में युद्ध और सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए एक संघर्ष-नियंत्रण तंत्र स्थापित करना। दूसरा, ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाना। तीसरा, ईरान की जमी हुई विदेशी परिसंपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया पर सहमति।
ईरान का रुख और आगे की राह
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह दूसरे पक्ष की ओर से किए जाने वाले वादों और दायित्वों के क्रियान्वयन पर कड़ी नज़र रखेगा और अपने सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग करके यह सुनिश्चित करेगा कि प्रतिबद्धताओं का पालन हो। गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर ऊँचा बना हुआ है और लेबनान में स्थायी संघर्ष विराम की माँग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यकारी तंत्र पर सहमति एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी।