बर्गेनस्टॉक में शुक्रवार को अमेरिका-ईरान वार्ता, सीजफायर के बाद समझौते के क्रियान्वयन पर होगी बात
सारांश
मुख्य बातें
स्विस विदेश मंत्रालय ने 18 जून 2026 को पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक स्थित पर्वतीय रिसॉर्ट में होगी। यह बैठक उस सीजफायर समझौते के ठीक एक दिन बाद निर्धारित है, जिस पर बुधवार रात फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्साय में हस्ताक्षर किए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
स्विस विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, 'स्थिति अभी भी यही है कि योजना के अनुसार अमेरिका और ईरान, मध्यस्थों पाकिस्तान और कतर तथा अन्य संबंधित देशों के साथ मिलकर कल बर्गेनस्टॉक में मिलेंगे, ताकि समझौते के क्रियान्वयन पर प्रारंभिक वार्ता की जा सके।' मंत्रालय ने बैठक के कार्यक्रम या अन्य विवरणों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।
वर्साय समझौते की पृष्ठभूमि
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को विराम देने के लिए एक अंतरिम समझौते (एमओयू) पर बुधवार रात पैलेस ऑफ वर्साय, फ्रांस में हस्ताक्षर हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस अवसर पर उपस्थित रहे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ईरान की ओर से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि पहले यह समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड के लुकर्ने के पास होना तय था, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इसे अंतिम रूप दे दिया गया।
समझौते में क्या शामिल है
इस अंतरिम समझौते के तहत ईरान और लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने का प्रावधान भी इसमें शामिल है। यह समझौता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान का रुख
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पेजेश्कियन द्वारा हस्ताक्षर हो जाने के बाद अब स्विट्जरलैंड में एमओयू पर कोई आमने-सामने हस्ताक्षर समारोह आयोजित नहीं होगा। इस प्रकार बर्गेनस्टॉक बैठक का उद्देश्य नए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि पहले से हुए समझौते के क्रियान्वयन पर चर्चा करना है।
आगे क्या होगा
बर्गेनस्टॉक में होने वाली यह वार्ता समझौते को व्यावहारिक धरातल पर उतारने की दिशा में पहला ठोस कदम होगी। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर की भूमिका इस प्रक्रिया में केंद्रीय रहेगी। आने वाले दिनों में सैन्य वापसी और होर्मुज की नाकेबंदी हटाने की समयसीमा पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है।