होर्मुज स्ट्रेट नेविगेशन पर ओमान-ईरान सहमत, ट्रंप ने सीजफायर खत्म होने का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
ओमान और ईरान ने 12 जुलाई 2026 को मस्कट में हुई बैठक के बाद होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी एवं राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समाप्त हो चुका है।
मस्कट वार्ता का मुख्य घटनाक्रम
ओमान न्यूज़ एजेंसी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप एक आवश्यक समझौते तक पहुँचने के उद्देश्य से तकनीकी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर संवाद जारी रखने पर सहमत हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने शुक्रवार को पुष्टि की कि ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची होर्मुज स्ट्रेट पर परामर्श के लिए शनिवार को ओमान की यात्रा पर जाएंगे।
गौरतलब है कि जून 2026 में दोनों देश पहले ही इस बात पर सहमत हो चुके थे कि एक संयुक्त कार्यकारी समूह (जॉइंट वर्किंग ग्रुप) के माध्यम से स्ट्रेट में नेविगेशन और संबंधित समुद्री सेवाओं के भविष्य के प्रबंधन पर आपसी समझ विकसित की जाएगी।
तनाव की पृष्ठभूमि
यह वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच हाल के सैन्य टकराव के बाद उपजे गहरे तनाव के बीच हुई है। फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद, तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी सामरिक पकड़ और मज़बूत कर ली। इसके परिणामस्वरूप इजरायल और अमेरिका से संबद्ध व्यावसायिक जहाजों के मार्ग पर प्रतिबंध लग गया।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है — दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा समुद्री तेल व्यापार इसी मार्ग से होता है। इस पर किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक तेल बाज़ारों को सीधे प्रभावित कर सकती है।
ट्रंप का बयान और सीजफायर का अंत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा: 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने हमसे बातचीत जारी रखने को कहा है। हम ऐसा करने के लिए राजी हो गए हैं, लेकिन अमेरिका ने उन्हें साफ-साफ बता दिया है कि सीजफायर खत्म हो गया है!'
ट्रंप के बयान में स्पष्ट किया गया कि पिछले महीने बातचीत के ज़रिए बनाई गई सीजफायर की रूपरेखा भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन कूटनीतिक संपर्क जारी रहेंगे। यह स्थिति एक विरोधाभासी संकेत देती है — एक ओर सैन्य तनाव, दूसरी ओर वार्ता की इच्छाशक्ति।
आम जनता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज स्ट्रेट पर अनिश्चितता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और समुद्री बीमा दरों पर पड़ता है, जो अंततः भारत सहित आयातक देशों में ईंधन की कीमतों को प्रभावित करती है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी मार्ग से मँगाता है।
आगे क्या होगा
अराघची की ओमान यात्रा के बाद दोनों देशों के जॉइंट वर्किंग ग्रुप की अगली बैठक की तारीख तय होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की मध्यस्थ भूमिका इस संकट में महत्वपूर्ण है, क्योंकि मस्कट के तेहरान और वाशिंगटन दोनों से संतुलित संबंध हैं।