अराघची का दावा: ईरान को तेल प्रतिबंधों में छूट, लेबनान युद्धविराम की दिशा में बड़ी प्रगति
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 22 जून 2026 को दावा किया कि अमेरिका के साथ हालिया वार्ताओं के बाद तेहरान को महत्वपूर्ण आर्थिक राहत मिली है — तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई है और विदेशों में जब्त कुछ ईरानी संपत्तियाँ भी जारी कर दी गई हैं। यह घोषणा स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका के बीच तकनीकी स्तर की वार्ताओं के समापन के तुरंत बाद आई।
इस्लामाबाद समझौते की पृष्ठभूमि
स्विट्जरलैंड में हुई यह बातचीत 14-सूत्रीय इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत पहली उच्च-स्तरीय वार्ता थी। यह एमओयू 18 जून 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई हफ्तों की कूटनीतिक कोशिशों के बाद हस्ताक्षरित हुआ था। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को 'तुरंत और स्थायी रूप से' समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है।
समझौते की मुख्य शर्तें
ईरानी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज की रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते में कई बड़े प्रावधान शामिल हैं। 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाएगी, ईरान की अरबों डॉलर की जब्त संपत्तियाँ जारी की जाएंगी, ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का कोष स्थापित किया जाएगा और युद्ध के कारण बंद होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोला जाएगा।
अराघची का एक्स पर बयान
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान और कतर की लगातार मध्यस्थता से लेबनान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है।' उन्होंने यह भी कहा, 'तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर छूट दी गई है, नाकाबंदी हटा ली गई है, कुछ जब्त संपत्तियाँ जारी कर दी गई हैं और ईरान के लिए एक बड़ा पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यक्रम शुरू किया गया है।'
आगे की कूटनीतिक राह
अराघची के अनुसार, एक अंतिम समझौते पर 60 दिनों के भीतर बातचीत पूरी की जाएगी। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सभी प्रतिबंधों को पूर्णतः हटाने और युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने जैसे जटिल मुद्दे शामिल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'पहला वास्तविक परीक्षण लेबनान में तनाव कम करने के लिए बनाए गए समन्वय तंत्र का होगा।'
क्षेत्रीय महत्व और आगे का परिदृश्य
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर रहा है और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा था। गौरतलब है कि पाकिस्तान और कतर की संयुक्त मध्यस्थता ने इस कूटनीतिक सफलता में निर्णायक भूमिका निभाई। हालाँकि, विशेषज्ञ इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की प्रतीक्षा में हैं, क्योंकि अमेरिकी पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।