ईरान-अमेरिका वार्ता ठप: अराघची बोले — एमओयू उल्लंघन बंद हो तभी बातचीत संभव
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 9 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच इस समय कोई भी वार्ता नहीं चल रही है। विदेश मंत्रालय के सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज में पत्रकारों को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि जब तक अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) के उल्लंघन बंद नहीं करता और पहले किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता, तब तक बातचीत की कोई संभावना नहीं है।
अराघची का स्पष्ट रुख
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, अराघची ने कहा, 'इस समय हमारी अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, कुछ मध्यस्थ अब भी बातचीत दोबारा शुरू कराने के रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'हमारे नज़रिए से तब तक वार्ता फिर से शुरू नहीं हो सकती, जब तक अमेरिका एमओयू के उल्लंघन बंद नहीं करता और अपनी गलतियों का सुधार नहीं करता।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है और कई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ताएँ परिणाम के बिना समाप्त हो चुकी हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर ओमान से बातचीत
विदेश मंत्री अराघची ने यह भी बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में एक नए समुद्री मार्ग को लेकर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ नए समुद्री मार्गों पर काम कर रहे हैं, जो मौजूदा पुराने मार्गों की जगह लेंगे।
अराघची ने यह भी कहा, 'इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोल दिया जाएगा। इस संबंध में एक समझौता हो सकता है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को खोले जाने का फैसला कई शर्तों पर निर्भर करेगा।' गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अत्यंत संवेदनशील जलमार्ग है।
राष्ट्रपति पेजेशकियन की शर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार, 8 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि तेहरान एमओयू के तहत 'शांति के रास्ते' पर आगे बढ़ता रहेगा, बशर्ते वॉशिंगटन भरोसे का माहौल बनाने में मदद करे।
पेजेशकियन ने कहा, 'समझौते तक पहुँचने के लिए यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि देश में एकता, ताकत और आपसी सहयोग मौजूद है।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'हम एमओयू को आधार बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि अमेरिका उस अविश्वास के माहौल को खत्म करे जिसे उसने पैदा किया है।'
आगे की राह
ईरान की इस दो-टूक स्थिति से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता की संभावना सीमित है। मध्यस्थों की भूमिका और ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट पर चल रही बातचीत आने वाले हफ्तों में क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तय कर सकती है।