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ईरान का अमेरिका पर गंभीर आरोप: संभावित समझौता क्यों हुआ विफल?

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ईरान का अमेरिका पर गंभीर आरोप: संभावित समझौता क्यों हुआ विफल?

सारांश

तेहरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने बातचीत को अंतिम चरण में बाधित किया। विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, दबाव बनाने और बार-बार शर्तें बदलने से सहमति बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। जानिए इस विवाद का क्या है पूरा मामला।

मुख्य बातें

ईरान ने अमेरिका पर बातचीत को विफल करने का आरोप लगाया।
'इस्लामाबाद समझौता' अंतिम चरण में था।
संभावित समझौते में अमेरिका की शर्तें बाधा बनीं।
ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से दृष्टिकोण बदलने की अपील की।
अमेरिका ने समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की।

तेहरान, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान ने अमेरिका पर यह आरोप लगाया है कि उसने एक संभावित समझौते को अंतिम चरण में आकर बिखेर दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के अनुसार, बातचीत के दौरान अमेरिका ने अधिकतम दबाव बनाने, बार-बार शर्तें बदलने (गोलपोस्ट शिफ्ट करने) और नाकाबंदी जैसी रणनीतियों का उपयोग किया, जिससे सहमति बनने की प्रक्रिया बाधित हुई।

अराघची का कहना है कि प्रस्तावित “इस्लामाबाद समझौता” (एमओयू) लगभग पूरा था और दोनों पक्ष अंतिम सहमति के बेहद निकट थे।

उन्होंने कहा कि इन हालातों के चलते 21 घंटे तक चली गहन बातचीत अंततः बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। तेहरान ने यह भी संकेत दिया कि यदि बातचीत के दौरान शर्तों में लगातार बदलाव न किए जाते, तो यह डील संभव हो सकती थी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने 47 सालों में वॉशिंगटन के साथ अपनी सबसे ऊंचे स्तर की सीधी बातचीत ईमानदारी और लगातार चल रहे झगड़े को समाप्त करने की मंशा से की है। अराघची ने अफसोस जताया कि "कोई सबक नहीं मिला"।

उन्होंने लिखा, "47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहन बातचीत में, ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छे इरादे से बातचीत की। लेकिन जब 'इस्लामाबाद एमओयू' से बस कुछ इंच दूर थे, तो हमें गोलपोस्ट बदलने और नाकाबंदी का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं मिला। अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है। दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है।"

ईरानी विदेश मंत्री का यह कहना कि दोनों पक्ष एक समझौते को फाइनल करने से कुछ ही दूरी पर थे, यह दर्शाता है कि अंतिम स्टेज पर तनाव तेजी से बढ़ने के पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत सफलता के कितने करीब आ गई थी।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू की संभावना अभी भी है, बशर्ते वॉशिंगटन अपना नजरिया बदले। उन्होंने अमेरिका से "सर्वाधिकारवाद" को छोड़ने और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की। ऐसा बदलाव एक समझौते का रास्ता बना सकता है। बता दें, सर्वाधिकारवाद एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है, जिसमें राज्य सार्वजनिक और निजी जीवन के हर पहलू पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर एक पोस्ट में बातचीत करने वाले डेलिगेशन के सदस्यों की सराहना करते हुए कहा, "अगर अमेरिकी सरकार अपना सर्वाधिकारवाद छोड़ दे और ईरानी देश के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे।"

इस बीच, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू कर देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां दोनों देशों के बीच बातचीत में बाधाएं स्पष्ट रूप से दिख रही हैं। अमेरिका का बार-बार शर्तें बदलना और दबाव डालना, ईरान के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और अमेरिका के बीच क्या बातचीत हो रही थी?
बातचीत का उद्देश्य एक संभावित समझौते पर पहुंचना था, जिसे 'इस्लामाबाद समझौता' कहा गया।
ईरान ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाया?
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान बार-बार शर्तें बदलकर और दबाव बनाकर सहमति बनने की प्रक्रिया को बाधित किया।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता संभव है?
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि समझौते की संभावना अभी भी है, यदि अमेरिका अपना दृष्टिकोण बदले।
गोलपोस्ट शिफ्ट करने का क्या मतलब है?
गोलपोस्ट शिफ्ट करने का मतलब है बातचीत के दौरान शर्तों को लगातार बदलना, जिससे एक स्थायी सहमति तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
अमेरिका ने क्या नया कदम उठाया है?
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स पर समुद्री नाकाबंदी लागू करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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