ईरान परमाणु वार्ता में जेडी वेंस बने ट्रंप के मुख्य दूत, सफलता-विफलता दोनों का राजनीतिक दांव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जारी उच्च स्तरीय वार्ता की कमान वेंस ने संभाली है — एक ऐसा कदम जो मध्य पूर्व की भू-राजनीति को नया आकार दे सकता है। इसके साथ ही वेंस उस राजनीतिक जोखिम के केंद्र में भी हैं, जिसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के नेता चुनौती दे रहे हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि और वेंस की बढ़ती भूमिका
पिछले सप्ताह ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) की घोषणा के बाद से वेंस की भूमिका में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विदेश सचिव मार्को रुबियो समेत प्रशासन के अधिकांश वरिष्ठ नेता इस प्रक्रिया में पृष्ठभूमि में रहे, जबकि वेंस सरकार के मुख्य वार्ताकार और प्रवक्ता बनकर सामने आए। ट्रंप प्रशासन इस पहल को तेहरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देख रहा है।
वेंस ने इससे पहले कहा था, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे ईरान के लोगों के साथ अपने संबंधों को बदलने के लिए एक नया रास्ता खोलने और मदद के लिए हाथ बढ़ाने को कहा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान की नेतृत्व क्षेत्रीय अस्थिरता और परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा को त्याग दे, तो अमेरिका ईरान के साथ अपने 'संबंधों को पूरी तरह से बदलने' को तैयार है।
ट्रंप का 'क्रेडिट और दोष' वाला बयान
वार्ता शुरू होने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा, 'अगर यह काम कर गया, तो मैं क्रेडिट लूंगा; अगर यह काम नहीं किया, तो मैं जेडी को दोष दूंगा। जेडी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए।' यह टिप्पणी भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई हो, लेकिन इसने वेंस के राजनीतिक जोखिम को सार्वजनिक रूप से रेखांकित कर दिया।
दोनों दलों की आलोचना
डेमोक्रेटिक सीनेटर कोरी बुकर ने इस समझौते को 'एक तरह से सरेंडर' करार देते हुए कहा कि 'ईरान को सचमुच अरबों-खरबों डॉलर के फायदे मिलेंगे' और इसे 'एक भयानक विफलता' बताया। रिपब्लिकन खेमे से भी आलोचना आई — सीनेटर टेड क्रूज, जॉन कॉर्निन, टॉम कॉटन और बिल कैसिडी ने चिंता जताई कि ईरान नई आर्थिक राहत का उपयोग अपनी सैन्य क्षमताओं को पुनर्निर्मित करने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी को समर्थन देने में कर सकता है।
समर्थन में आए वरिष्ठ अधिकारी
आलोचनाओं के बीच संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इस वार्ता को 'एक ऐसा कदम बताया जो कोई दूसरी सरकार कभी नहीं कर पाई', क्योंकि इसमें ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधा संपर्क स्थापित किया गया है। वाल्ट्ज ने कहा, 'हमें इस प्रक्रिया को एक मौका देना होगा। हमें शांति को एक मौका देना होगा।'
पूर्व रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने समझौते के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए भी कहा कि बातचीत को आगे बढ़ने का समय मिलना चाहिए। एस्पर ने कहा, 'मुझे लगता है जैसा उपराष्ट्रपति ने कहा — चलो इसे एक मौका देते हैं और देखते हैं कि यह काम करता है या नहीं।'
वेंस के करियर पर दांव
यह वार्ता वेंस के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक परीक्षा बन गई है। रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली नेता के रूप में उन्हें उस समझौते का सार्वजनिक बचाव करना है, जिसे विदेश नीति के कट्टर समर्थक और ट्रंप के कई समर्थक भी विवादास्पद मानते हैं। 60 दिन की वार्ता के नतीजे केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे — सफलता मिलने पर वेंस राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के एक बड़े नाम के रूप में स्थापित होंगे, जबकि नाकामी उन्हें दोनों पक्षों की आलोचना का शिकार बना सकती है।