जेडी वेंस स्विट्जरलैंड पहुंचे, बर्गेनस्टॉक में ईरान से परमाणु वार्ता शुरू; पाकिस्तान बना मध्यस्थ
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रविवार, 22 जून को स्विट्जरलैंड पहुंचे, जहाँ बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में ईरान के साथ बहुप्रतीक्षित परमाणु वार्ता होनी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे। यह वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच पहले से हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते (MOU) को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर रात ही स्विट्जरलैंड पहुंच गया था। इस प्रतिनिधिमंडल का कोडनेम 'मिनाब 168' बताया गया है। स्विस विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'हम स्विट्जरलैंड में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन का स्वागत करते हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते को लागू करने के हिस्से के रूप में बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट जा रहा है।'
गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच प्रारंभिक वार्ता शुक्रवार को होनी थी, परंतु उसे अंतिम समय पर टाल दिया गया। इस देरी के कारण अभी तक आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
वेंस का बयान और वार्ता के उद्देश्य
वेंस ने जॉइंट बेस एंड्रयूज से रवाना होने से पहले मीडिया को बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार ईरानी वार्ताकार पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं और बातचीत संभवतः कई दिनों तक चल सकती है। उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि हम परमाणु मुद्दे पर प्रगति करेंगे और लेबनान युद्धविराम के मामले में भी आगे बढ़ेंगे। ये दो बड़े विषय हैं जिन पर हमें ध्यान केंद्रित करना है। मुझे यकीन है कि ईरान के भी कुछ मुद्दे होंगे जिन पर वे चर्चा करना चाहेंगे।'
स्विट्जरलैंड की भूमिका
स्विट्जरलैंड ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह अमेरिका और ईरान के बीच MOU को लागू करने की प्रक्रिया में 'सावधान और भरोसेमंद माहौल' प्रदान करना जारी रखेगा। स्विट्जरलैंड परंपरागत रूप से अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक चैनल का काम करता रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
क्षेत्रीय संदर्भ और चुनौतियाँ
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब लेबनान में हाल ही में लागू हुआ युद्धविराम अत्यंत संवेदनशील स्थिति में है और क्षेत्र में दोबारा शुरू हुई हिंसा इन राजनयिक प्रयासों के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। आलोचकों का कहना है कि बिना किसी ठोस सत्यापन तंत्र के परमाणु वार्ता में सफलता की संभावनाएं सीमित रहती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और वाशिंगटन तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दीर्घकालिक समझौते की तलाश में है। पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में शामिल होना इस वार्ता को एक व्यापक क्षेत्रीय आयाम देता है।
आगे क्या होगा
वार्ता के कई दिनों तक चलने की संभावना है। वेंस के अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान युद्धविराम — दोनों मुद्दे एजेंडे में प्रमुख हैं। ईरान सरकारी टीवी आईआरआईबी ने भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल के स्विट्जरलैंड पहुंचने की पुष्टि की है। वार्ता के नतीजे मध्य-पूर्व में शांति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।