ट्रंप प्रशासन की ईरान वार्ता: मध्य पूर्व में नई क्षेत्रीय व्यवस्था की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान के साथ जारी कूटनीतिक वार्ता को मध्य पूर्व में एक व्यापक क्षेत्रीय पुनर्गठन के अवसर के रूप में देख रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ये बातचीत न केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित है, बल्कि इसका दायरा अब्राहम समझौते के विस्तार और सऊदी अरब सहित अन्य अरब देशों को इस कूटनीतिक ढाँचे में लाने तक फैला हुआ है।
स्विट्जरलैंड में वेंस-ईरान मुलाकात
22 जून को स्विट्जरलैंड में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। वेंस ने इस अवसर पर कहा, 'राष्ट्रपति ने हमसे ईरान के लोगों के साथ अपने रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए कहा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान का नेतृत्व क्षेत्रीय अस्थिरता और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ देता है, तो अमेरिका उस देश के साथ अपने संबंधों को 'पूरी तरह से बदलने' के लिए तैयार होगा।
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन वार्ताओं को क्षेत्रीय तनाव घटाने, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और अब्राहम समझौते के दायरे को विस्तार देने के एक सुनहरे मौके के रूप में रेखांकित किया है।
वाल्ट्ज का 'नए मध्य पूर्व' का विज़न
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि इन वार्ताओं से 'एक बिल्कुल अलग क्षेत्रीय व्यवस्था' के लिए ज़मीन तैयार हो सकती है। उन्होंने कहा, 'हमें शांति के लिए एक मौका देना चाहिए।' वाल्ट्ज ने यह भी जोड़ा, 'शायद हम आखिरकार एक नए मध्य पूर्व की ओर बढ़ सकते हैं, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अब्राहम समझौते के साथ किया था।'
वाल्ट्ज ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका 'बर्बाद हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था' और 'बर्बाद हो चुकी ईरानी सेना' की वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए यह कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग का भी उल्लेख किया और कहा कि जो घटनाक्रम कभी असंभव माने जाते थे, वे अब हकीकत बन रहे हैं — जैसे इज़रायल और संयुक्त अरब अमीरात का सैन्य सहयोग।
लिंडसे ग्राहम का बड़ा दावा
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान वार्ता को एक व्यापक क्षेत्रीय रणनीति से जोड़ा। सीबीएस पर एक साक्षात्कार में ग्राहम ने कहा, 'हम साल 2026 में अब्राहम समझौते का विस्तार करने जा रहे हैं।' उन्होंने अनुमान लगाया कि सऊदी अरब अंततः उस सामान्यीकरण ढाँचे में शामिल हो सकता है, जो ट्रंप के पहले कार्यकाल में इज़रायल और कई अरब देशों के बीच स्थापित किया गया था।
ग्राहम ने इसे 'मध्य पूर्व में 5,000 वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया, 'अगर हमें समझौता मिल जाता है, तो ईरान एक तरह से घिर जाएगा। अगर हमें समझौता नहीं मिलता है, तब भी ईरान घिर जाएगा।'
अब्राहम समझौते की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुए अब्राहम समझौते ने इज़रायल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन समेत कई अरब देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे। इन समझौतों को दशकों में इस क्षेत्र के सबसे अहम कूटनीतिक बदलावों में से एक माना गया। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव के कई मोर्चे एक साथ सक्रिय हैं।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस वार्ता को किसी अंतिम समझौते के बजाय एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश के शुरुआती चरण के रूप में देखा जाना चाहिए। आने वाले हफ्तों में बातचीत की दिशा और परमाणु मुद्दे पर ईरान की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह कूटनीतिक प्रयास कितना आगे जा सकता है।