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ईरान शांति वार्ता में खाड़ी सहयोगी निर्णायक: मार्को रुबियो का अबू धाबी में बड़ा बयान

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ईरान शांति वार्ता में खाड़ी सहयोगी निर्णायक: मार्को रुबियो का अबू धाबी में बड़ा बयान

सारांश

स्विट्जरलैंड वार्ता के ठीक बाद अबू धाबी पहुँचे रुबियो का संदेश साफ था — ईरान को या तो अपनी प्रतिबद्धताएँ निभानी होंगी, या राष्ट्रपति 'कुछ फैसले' करेंगे। 47 साल पुराने संकट के समाधान की यह कोशिश खाड़ी देशों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 जून 2025 को अबू धाबी में कहा कि ईरान शांति फ्रेमवर्क में खाड़ी सहयोगियों की भूमिका अहम है।
स्विट्जरलैंड में हुई वीकेंड वार्ता के बाद रुबियो ने कहा — 'पिछले 72 घंटों में अच्छी नींव रखी गई है,' लेकिन काफी काम बाकी है।
रुबियो ने चेतावनी दी कि यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताएँ नहीं निभाता तो 'राष्ट्रपति को कुछ फैसले लेने होंगे।' IAEA निरीक्षण पर ईरानी असहमति के बावजूद रुबियो ने कहा — 'हमें पता है कि वे किस बात पर सहमत हुए थे।' ईरानी प्रॉक्सी ( हमास, हिज्बुल्लाह ) की गतिविधियाँ जारी रहने तक क्षेत्रीय दुश्मनी खत्म करना असंभव: रुबियो।
होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खुला रखने पर अमेरिका अडिग।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 जून 2025 को अबू धाबी पहुँचने पर पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि ईरान के साथ शांति की किसी भी रूपरेखा को आगे बढ़ाने में खाड़ी देशों की भूमिका अहम है। रुबियो ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई वीकेंड वार्ता के बाद भी काफी काम बाकी है, लेकिन 'पिछले 72 घंटों में अच्छी नींव रखी गई है।'

वार्ता की स्थिति और अमेरिका का रुख

रुबियो ने कहा कि अमेरिका को ईरान की ओर से किए गए वादों की 'साफ समझ' है, भले ही ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से उभरते फ्रेमवर्क के कुछ हिस्सों पर असहमति जताई हो। उन्होंने दो-टूक कहा, 'हमें पता है कि वे किस बात पर सहमत हुए थे।' रुबियो ने यह भी जोड़ा कि ईरान की घरेलू राजनीति चाहे जैसी भी हो, अंततः या तो वह अपनी प्रतिबद्धताएँ पूरी करेगा या नहीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अपनी सहमति के अनुसार कदम उठाता है तो 'प्रक्रिया आगे बढ़ेगी', अन्यथा 'राष्ट्रपति को कुछ फैसले लेने होंगे।' यह बयान ट्रंप प्रशासन के उस कूटनीतिक दौरे के बीच आया है जिसमें खाड़ी क्षेत्र में निरंतर राजनयिक संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को वाशिंगटन के सबसे मज़बूत साझेदारों में से एक बताते हुए रुबियो ने कहा कि पिछले एक दशक में यह रिश्ता और गहरा हुआ है। उन्होंने कहा, 'हम यहाँ बात करने से ज़्यादा उनकी बात सुनने आए हैं। हम उनके विचार जानना चाहते हैं — खासकर स्विट्जरलैंड में इस वीकेंड के बाद — और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे हर फैसले में उनकी राय को ध्यान में रखा जाए, क्योंकि वे हमारे साझेदार हैं।'

जब उनसे पूछा गया कि क्या खाड़ी सहयोगी ईरान शांति फ्रेमवर्क का समर्थन करते हैं, तो रुबियो ने कहा कि सभी अमेरिकी साझेदार शांति के पक्ष में हैं, लेकिन बातचीत अभी शुरुआती चरण में है। उन्होंने याद दिलाया, 'यह एक ऐसा मुद्दा है जो 47 सालों से चला आ रहा है।'

आईएईए निरीक्षण और ईरानी प्रॉक्सी पर चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षण को लेकर ईरान की टिप्पणियों पर रुबियो ने कहा कि ईरान की घरेलू राजनीति जो भी हो, उन्हें विश्वास है कि वह उसे 'संभाल लेगा।' उन्होंने ईरान समर्थित समूहों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया — 'जब तक ईरान के प्रॉक्सी इराक से मिसाइल और ड्रोन दागते रहेंगे और हमास या हिज्बुल्लाह की तरह आतंकवाद में शामिल रहेंगे, तब तक इस क्षेत्र में दुश्मनी और संघर्ष खत्म नहीं हो सकते।'

लेबनान, इज़रायल और होर्मुज जलडमरूमध्य

रुबियो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लेबनान और इज़रायल से जुड़ी बातचीत को ईरान के साथ होने वाली वार्ता से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लेबनान का भविष्य वहाँ के लोगों और उनकी संप्रभु चुनी हुई सरकार पर निर्भर है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही की स्वतंत्रता पर रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमेरिका के रुख को दोहराया — 'यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। किसी भी देश को इस पर टोल या फीस वसूलने की इजाज़त नहीं है।' भविष्य के किसी भी आर्थिक अवसर के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अमेरिकी सरकारी धन नहीं होगा — यह निर्भर करेगा ईरानी नेतृत्व के फैसलों और व्यापक सुरक्षा मुद्दों पर हुई प्रगति पर।

गौरतलब है कि यह कूटनीतिक दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर बातचीत चला रहा है। रुबियो की अबू धाबी यात्रा यह संकेत देती है कि वाशिंगटन खाड़ी देशों को ईरान नीति के केंद्र में रख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अमेरिकी कूटनीति में एक उल्लेखनीय बदलाव है। लेकिन '47 साल पुराने मुद्दे' को 'डेढ़ दिन में हल' न होने की स्वीकारोक्ति के साथ-साथ ईरानी प्रॉक्सी पर कोई ठोस कार्रवाई का रोडमैप न होना, इस फ्रेमवर्क की सबसे बड़ी कमज़ोरी है। आलोचकों का कहना है कि बिना प्रॉक्सी नियंत्रण के किसी भी परमाणु समझौते का क्षेत्रीय सुरक्षा पर सीमित असर होगा — और यही वह अंतर्विरोध है जिसे रुबियो ने स्वीकार तो किया, लेकिन हल नहीं बताया।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने अबू धाबी में ईरान को लेकर क्या कहा?
रुबियो ने कहा कि अमेरिका को ईरान की प्रतिबद्धताओं की 'साफ समझ' है और यदि ईरान उन्हें पूरा नहीं करता तो राष्ट्रपति 'कुछ फैसले लेंगे।' उन्होंने स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद 72 घंटों में 'अच्छी नींव' बनने की बात भी कही।
ईरान शांति फ्रेमवर्क में खाड़ी देशों की भूमिका क्यों अहम है?
रुबियो के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी सहयोगी अमेरिका के सबसे मज़बूत साझेदार हैं और ईरान से जुड़े हर अमेरिकी फैसले में उनकी राय को ध्यान में रखा जाएगा। खाड़ी देश भौगोलिक और राजनीतिक रूप से किसी भी ईरान समझौते से सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।
IAEA निरीक्षण पर ईरान और अमेरिका के बीच क्या विवाद है?
ईरानी अधिकारियों ने उभरते फ्रेमवर्क के कुछ हिस्सों पर सार्वजनिक असहमति जताई है, जिसमें IAEA निरीक्षण भी शामिल है। रुबियो ने कहा कि ईरान की घरेलू राजनीति जो भी हो, अमेरिका जानता है कि वह किस पर सहमत हुआ था।
ईरानी प्रॉक्सी समूहों पर रुबियो का क्या रुख है?
रुबियो ने स्पष्ट कहा कि जब तक हमास और हिज्बुल्लाह जैसे ईरान समर्थित समूह इराक से मिसाइल-ड्रोन हमले करते रहेंगे और आतंकवाद में शामिल रहेंगे, तब तक क्षेत्रीय दुश्मनी पूरी तरह खत्म करना असंभव है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का क्या रुख है?
रुबियो ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी भी देश को इस पर टोल या फीस वसूलने का अधिकार नहीं है। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस जलमार्ग को खुला रखने पर अडिग है।
राष्ट्र प्रेस
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