ईरान-अमेरिका MOU पर ट्रंप की अपनी पार्टी में बगावत, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते (MOU) को लेकर वाशिंगटन में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है — और यह असंतोष केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों के सांसदों, पूर्व अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों ने 22 जून को एक स्वर में सवाल उठाया कि क्या इस समझौते में तेहरान को वाशिंगटन की तुलना में अधिक लाभ मिला है।
समझौते की पृष्ठभूमि
पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित इस MOU ने अमेरिका और ईरान के बीच लगभग चार महीने से जारी तनाव को विराम दिया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय निर्धारित किया। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता कर रहे हैं।
सरकार का बचाव
सीबीएस के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' पर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इस समझौते का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा, "हमें इस प्रक्रिया को एक मौका देना होगा। हमें शांति को एक मौका देना होगा।" वाल्ट्ज ने तर्क दिया कि अमेरिका बातचीत की मेज पर 'मजबूत स्थिति' के साथ पहुँच रहा है और भविष्य की किसी भी व्यवस्था की नींव 'भरोसे पर नहीं, बल्कि सत्यापन पर' आधारित होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा, "मुझे पूरा भरोसा है कि हम एक डील पर पहुँच जाएंगे।"
विपक्ष और रिपब्लिकन की आलोचना
डेमोक्रेटिक सीनेटर कोरी बुकर ने एनबीसी के 'मीट द प्रेस' पर इस समझौते को 'एक तरह से सरेंडर' करार दिया। उन्होंने कहा, "ईरान को सारे फायदे मिलते हैं, सचमुच अरबों-खरबों डॉलर। यह उनकी बनाई हुई एक बहुत बड़ी नाकामी है।"
रिपब्लिकन खेमे से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। सीनेटर टेड क्रूज ने चेतावनी दी, "अगर हम ईरान को अरबों डॉलर देते हैं, तो उस पैसे का इस्तेमाल अमेरिकियों की हत्या करने के लिए किया जाएगा।" सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी आगाह किया कि ईरान जारी किए गए फंड का उपयोग अपनी सैन्य क्षमताओं को पुनः खड़ा करने में कर सकता है।
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कूटनीति जारी रखने का समर्थन करते हुए भी माना कि "MOU में कमियाँ हैं।" उन्होंने एक कड़ी चेतावनी भी दी — "अगर यह कूटनीतिक कोशिश विफल हो जाती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा कर लेंगे।"
विशेषज्ञों की राय
पूर्व रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट के पुनः खुलने का स्वागत करते हुए भी अपनी शंकाएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा, "जब मैं समझौते को देखता हूँ, तो इसमें कई ऐसे बिंदु हैं जिनके बारे में मेरे मन में गंभीर सवाल और चिंताएं हैं। मेरे हिसाब से बहुत सारे प्रोत्साहन डील में बाद में देने के बजाय शुरू में ही दे दिए गए हैं।"
व्हाइट हाउस के पूर्व ऊर्जा सलाहकार अमोस होचस्टीन ने तर्क दिया कि इस डील ने तेहरान को बड़ी छूट दी और कहा, "इस समझौते ने अमेरिका को कम सुरक्षित बना दिया।" क्लियरव्यू एनर्जी पार्टनर्स के केविन बुक ने कहा कि यह व्यवस्था ईरान के साथ पहले के समझौतों की तुलना में कहीं अधिक बड़ी प्रतीत होती है, विशेष रूप से तेल निर्यात के संदर्भ में।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह बहस ट्रंप की अपनी पार्टी के भीतर की गहरी दरार को भी उजागर करती है। समझौते के समर्थक इसे परमाणु युद्ध को टालने की दिशा में पहला कदम मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि ईरान को अग्रिम रियायतें देना रणनीतिक भूल है। 60 दिन की वार्ता अवधि में यह स्पष्ट होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में जाता है।