ईरान-अमेरिका MOU पर डेमोक्रेट सीनेटर मार्क वार्नर का हमला: मिसाइल, प्रॉक्सी और परमाणु मुद्दे अनसुलझे
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर मार्क वार्नर ने 19 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते (MOU) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह डील तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क और परमाणु गतिविधियों जैसे बुनियादी मुद्दों को अनसुलझा छोड़ देती है। वार्नर के अनुसार, जबकि ईरान को इस समझौते से व्यापक आर्थिक राहत मिलेगी, अमेरिका की मूल सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं हुआ।
मुख्य आपत्तियाँ: क्या-क्या छूट गया
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के उप-उपाध्यक्ष वार्नर ने कहा कि समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने इसे संघर्ष की शुरुआत में प्राथमिकता बताया था। उन्होंने कहा, 'ट्रंप ने शुरू में जो बातें कही थीं, उनमें से एक यह थी कि हमें उनकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं से छुटकारा पाना होगा। और फिर इस समझौते में मिसाइलों का जिक्र तक नहीं है।'
इसी तरह, वार्नर ने मध्य पूर्व में सक्रिय ईरान-समर्थित समूहों — जैसे हिज्बुल्लाह और यमन के हूती — का MOU में कोई संदर्भ न होने पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 'इस समझौते में प्रॉक्सी का जिक्र तक नहीं है।'
परमाणु प्रतिबद्धता पर सवाल
वार्नर ने यह भी कहा कि MOU में शामिल यह शर्त कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, तेहरान की दशकों पुरानी सार्वजनिक स्थिति से अलग नहीं है। उन्होंने कहा, 'पिछले 15 से 20 सालों से ईरानी सरकार की यही स्थिति रही है। इसमें कुछ भी नया नहीं है।' साथ ही उन्होंने बताया कि परमाणु मुद्दे पर वार्ता के लिए समझौते में 60 दिनों की अवधि तय की गई है, जो उन्हें अपर्याप्त लगती है।
होर्मुज स्ट्रेट और आर्थिक राहत पर चिंता
सीनेटर ने MOU में होर्मुज स्ट्रेट — दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा पारगमन मार्गों में से एक — के उल्लेख को भी अपर्याप्त बताया। उनका तर्क था, 'होर्मुज स्ट्रेट युद्ध शुरू होने से पहले ही खुला था।' इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि प्रतिबंधों में ढील से ईरान को अरबों डॉलर की नई आर्थिक शक्ति मिलेगी: 'यह समझौता ईरान के कुछ तेल पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटा देता है।'
रणनीतिक संतुलन पर वार्नर का आकलन
वार्नर ने कहा कि 111 दिनों के इस संघर्ष में ईरान अपेक्षा से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में उभरा है। उन्होंने कहा, 'ईरान ने अमेरिका और इजरायल दोनों का सामना किया और कम से कम मुकाबले को बराबरी पर ला खड़ा किया। दुर्भाग्य से, इसकी कीमत लंबे समय तक चुकानी पड़ेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि MOU अमेरिका को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के लिए प्रतिबद्ध करता है, जिससे देश के भीतर की अशांति के बावजूद तेहरान के नेतृत्व पर दबाव कम हो सकता है।
आगे क्या
यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी कांग्रेस में इस समझौते की समीक्षा की माँग उठ रही है। वार्नर सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं और उनकी टिप्पणियाँ द्विदलीय सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि MOU की वास्तविक परीक्षा अगले 60 दिनों की परमाणु वार्ता में होगी।