जेडी वेंस का बड़ा बयान: ईरान से परमाणु समझौता लंबा और कठिन, अमेरिका को चाहिए संतुलित रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने 6 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान के साथ किसी भी अंतिम परमाणु समझौते तक पहुँचना न तो आसान होगा और न ही जल्दी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वेंस ने कहा कि वाशिंगटन को सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
वेंस का आकलन: ईरान के भीतर दो खेमे
फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में वेंस ने कहा, 'ईरान के कुछ गुट संघर्ष खत्म करना चाहते हैं, जबकि कुछ कट्टरपंथी गुट इसे जारी रखना चाहते हैं।' उन्होंने इसी आंतरिक विभाजन को बातचीत की सबसे बड़ी रुकावट बताया। वेंस के अनुसार, 'ईरानी बहुत मुश्किल लोग हैं। दूसरी बात, उनका सिस्टम टूटा हुआ है। हमारा काम इससे निपटना है और अमेरिका और राष्ट्रपति के लिए सबसे अच्छा नतीजा निकालना है।'
परमाणु हथियार पर अमेरिका का सख्त रुख
वेंस ने दोहराया कि अमेरिका की नीति अटल है — ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'रास्ता आसान नहीं है, यह मुश्किल भरा रहेगा, लेकिन विश्वास है कि हम अंत में जरूर पहुँचेंगे। तेल की कीमत गिरेगी और नीचे ही रहेगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता के कई दौर बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो चुके हैं।
ईरानी सेना का जवाब: पूरी तरह तैयार हैं
वेंस के बयान के अगले दिन गुरुवार को ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अमीर अकरामिनिया ने दावा किया कि सेना किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सैन्य प्रणालियों को आधुनिक बनाया जा रहा है और घरेलू तकनीक से नए उपकरण शामिल किए जा रहे हैं।
अकरामिनिया ने कहा, 'नई सैन्य सामग्री मिलने के साथ ही सेना अपने हथियारों और उपकरणों की तैनाती भी जरूरत के मुताबिक बदल रही है, ताकि किसी भी चुनौती का तुरंत जवाब दिया जा सके।' यह बयान ईरान की ओर से एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वह दबाव में आने को तैयार नहीं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अमेरिका की तीन-स्तरीय रणनीति — सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक संवाद — की परीक्षा होनी अभी बाकी है। विश्लेषकों के अनुसार, ईरान के भीतरी खेमों में मतभेद किसी भी वार्ता को और जटिल बना सकते हैं। वेंस का यह बयान संकेत देता है कि वाशिंगटन फिलहाल किसी त्वरित समाधान की उम्मीद नहीं रख रहा।