ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता: कालीबाफ बोले — एमओयू की 5 शर्तें पूरी हों, तभी अंतिम समझौता
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने 1 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि जब तक 18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के पाँच प्रारंभिक प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हो जाते, तब तक ईरान अमेरिका के साथ किसी अंतिम परमाणु समझौते की बातचीत में प्रवेश नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोहा में अगले दौर की वार्ता की तैयारियाँ चल रही हैं।
पाँच प्रावधान — ईरान की अनिवार्य शर्तें
सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में कालीबाफ ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की हालिया स्विट्जरलैंड यात्रा का उद्देश्य एमओयू की उन पाँच शर्तों को लागू कराना था, जिन पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। ये पाँच शर्तें हैं — लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलना, ईरानी कच्चे तेल के निर्यात के लिए अमेरिकी छूट जारी करना, और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को मुक्त करना।
कालीबाफ ने साफ कहा कि जब तक ये पाँच प्रारंभिक प्रावधान पूरे नहीं होते, एमओयू के शेष प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं होगी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच 22 जून को स्विट्जरलैंड में वार्ता शुरू हुई थी — जो पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से संभव हुई।
लेबनान पर संयुक्त समिति का गठन
कालीबाफ ने यह भी खुलासा किया कि ईरान, अमेरिका और लेबनान युद्धविराम लागू करने, लेबनान में संघर्ष समाप्त करने और उसकी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने बताया कि तीन पक्षों में से दो — ईरान और अमेरिका — ने इस समिति के लिए अपने प्रतिनिधि पहले ही नामित कर दिए हैं।
गौरतलब है कि कालीबाफ ने ईरान की दोहरी नीति का भी संकेत दिया — कूटनीति और यदि आवश्यक हो तो बलपूर्वक जवाब देने की क्षमता, दोनों को एक साथ बनाए रखना।
ट्रंप का रुख और दोहा वार्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि दोहा में होने वाली अगली वार्ता से पहले ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा, "दोहा में इस बारे में एक बैठक होगी। देखते हैं कि वह कैसी रहती है। दोहा की बैठक शायद अहम हो, या शायद न हो। यह हमें पता चल जाएगा।"
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका का कूटनीतिक पलड़ा भारी हुआ है और तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अमेरिकी अधिकारी मंगलवार को प्रस्तावित वार्ता के लिए कतर रवाना हो चुके हैं।
समझौते की पृष्ठभूमि
18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 22 जून को पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से स्विट्जरलैंड में उच्च-स्तरीय बातचीत का दौर शुरू हुआ। अब दोनों पक्षों के बीच एमओयू की शर्तों के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जो आगामी दोहा वार्ता की दिशा तय करेंगे।