15 अगस्त 2026
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ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता: कालीबाफ बोले — एमओयू की 5 शर्तें पूरी हों, तभी अंतिम समझौता

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ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता: कालीबाफ बोले — एमओयू की 5 शर्तें पूरी हों, तभी अंतिम समझौता

सारांश

ईरानी संसद स्पीकर कालीबाफ ने साफ कर दिया — 18 जून के एमओयू की पाँच शर्तें पूरी हुए बिना अमेरिका से कोई अंतिम परमाणु समझौता नहीं। होर्मुज, नाकेबंदी और फ्रीज संपत्ति — ये तीन मुद्दे दोहा वार्ता से पहले सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

मुख्य बातें

ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने 1 जुलाई 2026 को कहा कि एमओयू की पाँच शर्तें पूरी होने तक अंतिम समझौते की वार्ता नहीं होगी।
पाँच शर्तों में शामिल हैं — लेबनान में युद्ध समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज स्ट्रेट खोलना, तेल निर्यात छूट और फ्रीज संपत्ति की वापसी।
ईरान, अमेरिका और लेबनान युद्धविराम निगरानी के लिए संयुक्त समिति बनाने पर सहमत; ईरान और अमेरिका ने अपने प्रतिनिधि नामित किए।
मूल समझौते पर 18 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए; 22 जून को स्विट्जरलैंड में वार्ता शुरू हुई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है; दोहा में अगली बैठक प्रस्तावित।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने 1 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि जब तक 18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के पाँच प्रारंभिक प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हो जाते, तब तक ईरान अमेरिका के साथ किसी अंतिम परमाणु समझौते की बातचीत में प्रवेश नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोहा में अगले दौर की वार्ता की तैयारियाँ चल रही हैं।

पाँच प्रावधान — ईरान की अनिवार्य शर्तें

सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में कालीबाफ ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की हालिया स्विट्जरलैंड यात्रा का उद्देश्य एमओयू की उन पाँच शर्तों को लागू कराना था, जिन पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। ये पाँच शर्तें हैं — लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलना, ईरानी कच्चे तेल के निर्यात के लिए अमेरिकी छूट जारी करना, और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को मुक्त करना।

कालीबाफ ने साफ कहा कि जब तक ये पाँच प्रारंभिक प्रावधान पूरे नहीं होते, एमओयू के शेष प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं होगी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच 22 जून को स्विट्जरलैंड में वार्ता शुरू हुई थी — जो पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से संभव हुई।

लेबनान पर संयुक्त समिति का गठन

कालीबाफ ने यह भी खुलासा किया कि ईरान, अमेरिका और लेबनान युद्धविराम लागू करने, लेबनान में संघर्ष समाप्त करने और उसकी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने बताया कि तीन पक्षों में से दो — ईरान और अमेरिका — ने इस समिति के लिए अपने प्रतिनिधि पहले ही नामित कर दिए हैं।

गौरतलब है कि कालीबाफ ने ईरान की दोहरी नीति का भी संकेत दिया — कूटनीति और यदि आवश्यक हो तो बलपूर्वक जवाब देने की क्षमता, दोनों को एक साथ बनाए रखना।

ट्रंप का रुख और दोहा वार्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि दोहा में होने वाली अगली वार्ता से पहले ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा, "दोहा में इस बारे में एक बैठक होगी। देखते हैं कि वह कैसी रहती है। दोहा की बैठक शायद अहम हो, या शायद न हो। यह हमें पता चल जाएगा।"

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका का कूटनीतिक पलड़ा भारी हुआ है और तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अमेरिकी अधिकारी मंगलवार को प्रस्तावित वार्ता के लिए कतर रवाना हो चुके हैं।

समझौते की पृष्ठभूमि

18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 22 जून को पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से स्विट्जरलैंड में उच्च-स्तरीय बातचीत का दौर शुरू हुआ। अब दोनों पक्षों के बीच एमओयू की शर्तों के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जो आगामी दोहा वार्ता की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सीधे अमेरिकी सैन्य उपस्थिति से जुड़े हैं, क्या दोहा वार्ता से पहले हल होने की कोई वास्तविक संभावना है। ट्रंप का 'पलड़ा भारी' वाला दावा और ईरान की 'शर्तें पहले' वाली माँग — ये दोनों रुख एक साथ आगे नहीं बढ़ सकते। जब तक दोनों पक्ष क्रियान्वयन के क्रम पर सहमत नहीं होते, दोहा वार्ता प्रतीकात्मक बनकर रह सकती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने अमेरिका के साथ अंतिम समझौते पर रोक क्यों लगाई है?
ईरान ने स्पष्ट किया है कि 18 जून 2026 को हस्ताक्षरित एमओयू की पाँच प्रारंभिक शर्तें — नाकेबंदी हटाना, होर्मुज स्ट्रेट खोलना, तेल निर्यात छूट, फ्रीज संपत्ति मुक्त करना और लेबनान में युद्ध समाप्ति — पूरी होने तक अंतिम वार्ता नहीं होगी। स्पीकर कालीबाफ ने इसे ईरान की आधिकारिक शर्त बताया है।
दोहा में प्रस्तावित ईरान-अमेरिका वार्ता में क्या होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार दोहा में होने वाली बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आगे की कूटनीतिक दिशा पर चर्चा होगी। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है, हालाँकि ईरान की ओर से इस पर कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान-अमेरिका एमओयू पर हस्ताक्षर कब और कैसे हुए?
18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से 22 जून को स्विट्जरलैंड में उच्च-स्तरीय वार्ता का दौर शुरू हुआ।
लेबनान पर बनने वाली संयुक्त समिति में कौन शामिल होगा?
ईरान, अमेरिका और लेबनान तीनों पक्ष इस संयुक्त समिति में शामिल होंगे, जिसका उद्देश्य युद्धविराम लागू करना और लेबनान की संप्रभुता सुनिश्चित करना है। कालीबाफ के अनुसार ईरान और अमेरिका ने अपने प्रतिनिधि पहले ही नामित कर दिए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट का इस समझौते में क्या महत्व है?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिसके माध्यम से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल प्राप्त करता है। ईरान ने इसे पुनः खोलने को एमओयू की अनिवार्य शर्त बताया है, जिससे यह वार्ता का सबसे जटिल बिंदु बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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