ऑपरेशन ग्लोबल हंट: एनसीबी ने चार अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों का प्रत्यर्पण कराया, ₹13,000 करोड़ के कार्टेल का मास्टरमाइंड भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने विशेष अभियान 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' के तहत चार कुख्यात अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों का सफलतापूर्वक प्रत्यर्पण कराया है। इन तस्करों में ₹13,000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का कथित मास्टरमाइंड भी शामिल है। 15 अगस्त को सामने आई यह कार्रवाई भारत की नशामुक्ति नीति के तहत विदेशों में बैठे ड्रग सरगनाओं को कानून के दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रत्यर्पित किए गए चार प्रमुख आरोपी
प्रत्यर्पित किए गए आरोपियों में सबसे पहला नाम वीरेंद्र सिंह बसोया का है, जिसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बसोया को ₹13,000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का कथित मास्टरमाइंड माना जाता है।
दूसरे आरोपी सलीम डोला को मलेशिया में गिरफ्तार कर तुर्किये के रास्ते भारत लाया गया। सलीम डोला को कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी बताया जाता है।
तीसरे आरोपी प्रभदीप सिंह का प्रत्यर्पण अजरबैजान से हुआ, जबकि चौथे आरोपी — सीमा पार लॉजिस्टिक्स सप्लायर के रूप में पहचाने जाने वाले ऋतिक बजाज — को UAE से वापस लाया गया। ये चारों आरोपी अलग-अलग देशों में रहकर भारत में ड्रग सप्लाई चेन को कथित रूप से संचालित कर रहे थे।
कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रत्यर्पणों को संभव बनाने में केंद्र सरकार के कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका रही। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझाने में सफलता हासिल की कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चलाने वाले सरगनाओं को शरण देना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
एनसीबी ने यह भी सुनिश्चित किया कि प्रत्यर्पण अनुरोध मजबूत साक्ष्यों के साथ भेजे जाएं — जिनमें वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और संगठित तस्करी में आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े विस्तृत दस्तावेज शामिल थे। एक अधिकारी ने कहा, 'इससे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलती है।'
एनसीबी की रणनीति: नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना
अधिकारियों के अनुसार, हालिया जांचों की सफलता का मुख्य कारण मादक पदार्थों की तस्करी को एक आपस में जुड़े नेटवर्क के रूप में देखना है। स्थानीय स्तर के ड्रग विक्रेताओं, लॉजिस्टिक्स सप्लायरों, बिचौलियों और अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं की अलग-अलग जांच करने के बजाय पूरी शृंखला को एक साथ जोड़कर देखा जाता है।
इसी रणनीति के तहत एनसीबी 'टॉप-टू-बॉटम' और 'बॉटम-टू-टॉप' — दोनों तरीके अपनाती है। यानी जांच एजेंसी नेटवर्क के शीर्ष पर बैठे सरगनाओं से लेकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले तस्करों तक और निचले स्तर से ऊपर तक पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगालती है। इस रणनीति का उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे ड्रग कार्टेल और उसके तंत्र को ध्वस्त करना है।
घरेलू नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज
गौरतलब है कि जब से सरकार ने भारत को ड्रग-मुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित किया है, एनसीबी ने स्थानीय सप्लायरों, बिचौलियों, डिस्ट्रीब्यूटरों और डीलरों के खिलाफ अपनी कार्रवाई भी तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों के कारोबार को खत्म करने के लिए एजेंसियों को घरेलू नेटवर्क से आगे बढ़कर विदेशों से इस कारोबार को नियंत्रित करने वाले मुख्य सरगनाओं की पहचान करनी होगी।
यह ऑपरेशन ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अपनी वैश्विक कूटनीतिक पहुंच को लगातार मजबूत कर रहा है। आने वाले महीनों में एनसीबी के इस अभियान के और विस्तार की संभावना है।