14 अगस्त 2026
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यूएई से ड्रग किंगपिन बसोया भारत लाया गया, एनसीबी ने दिल्ली एयरपोर्ट पर किया गिरफ्तार

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यूएई से ड्रग किंगपिन बसोया भारत लाया गया, एनसीबी ने दिल्ली एयरपोर्ट पर किया गिरफ्तार

सारांश

यूएई में जून से हिरासत में रहा ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया आखिरकार भारत लाया गया — इंटरपोल रेड नोटिस और दो देशों की एजेंसियों के समन्वय का नतीजा। 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन से जुड़े इस मामले ने एनसीबी के 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' को नई धार दी है।

मुख्य बातें

एनसीबी ने 14 अगस्त 2026 को वांछित भगोड़े वीरेंद्र सिंह बसोया को यूएई से भारत लाकर दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया।
बसोया को जून 2026 में इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर यूएई में हिरासत में लिया गया था।
इस मामले में कुल 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद हुई — पुणे से 867 किलोग्राम और दिल्ली से 970 किलोग्राम ।
अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक अलग मामले में बसोया का नाम 1,300 किलोग्राम से अधिक कोकीन, मेफेड्रोन और हाइड्रोपोनिक वीड की बरामदगी से जुड़ा।
यह गिरफ्तारी एनसीबी के 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' और 'ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029)' के तहत की गई।
इससे पहले तुर्की से मोहम्मद सलीम डोला और मलेशिया से नवीन चिचकर को भी इसी अभियान के तहत वापस लाया गया था।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 14 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के वांछित भगोड़े वीरेंद्र सिंह बसोया (उर्फ वीरू) को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत प्रत्यर्पित कर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट, नई दिल्ली पर गिरफ्तार किया। बसोया दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित पिलंजी का निवासी है और मेफेड्रोन तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का कथित संचालक बताया जाता है।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

एनसीबी के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर बसोया को जून 2026 में यूएई में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने यूएई के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर उसकी स्वदेश वापसी सुनिश्चित की। शुक्रवार सुबह जैसे ही वह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरा, एनसीबी की टीम ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

मामले की पृष्ठभूमि और बरामदगी

यह मामला फरवरी 2024 में पुणे से शुरू हुआ, जब पुणे सिटी पुलिस ने 500 ग्राम मेफेड्रोन जब्त किया। जाँच का दायरा बढ़ने पर पुणे से लगभग 867 किलोग्राम और दिल्ली से 970 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद हुई, जिससे कुल बरामदगी लगभग 1,837 किलोग्राम तक पहुँच गई। इस विशाल जब्ती के बाद मामले को आगे की जाँच के लिए एनसीबी की मुंबई ज़ोनल यूनिट को सौंपा गया।

जाँच में बसोया की पहचान एक अहम विदेशी ऑपरेटिव और कथित साजिशकर्ता के रूप में हुई। वह कथित तौर पर विदेश से सिंडिकेट की गतिविधियों को समन्वित करता था और भारत से अन्य देशों में मेफेड्रोन की खेप भेजने में मदद करता था। दिल्ली में बरामद 970 किलोग्राम की खेप, कथित तौर पर उसके कूरियर चैनलों के ज़रिए निर्यात की तैयारी में थी।

कोकीन तस्करी से भी संबंध

बसोया का नाम अंतरराष्ट्रीय कोकीन तस्करी से जुड़े दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक अलग मामले में भी सामने आया है। अक्टूबर 2024 में स्पेशल सेल ने दिल्ली, हापुड़, गाजियाबाद और गुजरात के अंकलेश्वर में एक फैक्ट्री समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें 1,300 किलोग्राम से अधिक कोकीन, मेफेड्रोन और हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुई। जाँच में बसोया की इस गिरोह में कोकीन की खरीद, परिवहन, भंडारण और वितरण के प्रबंधन में कथित भूमिका सामने आई।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और सख्त रवैया अपनाते हुए उनके पूरे नेटवर्क को खत्म कर रही है। नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए एनसीबी ने यूएई से फरार ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी सुनिश्चित की। अपराधी का पता लगाने के लिए टॉप टु बॉटम और बॉटम टु टॉप अप्रोच के जरिए, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।'

ऑपरेशन ग्लोबल-हंट और आगे की राह

बसोया की वापसी एनसीबी के 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' का हिस्सा है, जिसे विदेशों से संचालित होने वाले बड़े ड्रग तस्करों और भगोड़ों की पहचान, पता लगाने और गिरफ्तारी के लिए शुरू किया गया था। इससे पहले तुर्की से मोहम्मद सलीम डोला और मलेशिया से नवीन चिचकर की सफल वापसी भी इसी अभियान की उपलब्धियाँ रही हैं। यह पहल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी 'ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029)' के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है। एनसीबी का कहना है कि ड्रग्स के बड़े सरगनाओं, फाइनेंसरों और भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर — 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन — उत्पादन और वितरण का नेटवर्क इतने लंबे समय तक कैसे सक्रिय रहा। गुजरात के अंकलेश्वर में फैक्ट्री और दिल्ली-एनसीआर में गोदामों का पता अक्टूबर 2024 में चला, फिर भी मुख्य संचालक जून 2026 तक विदेश में स्वतंत्र रहा — यह खुफिया तंत्र और समन्वय की सीमाओं को उजागर करता है। 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' की सफलताएँ प्रभावशाली हैं, परंतु घरेलू सप्लाई चेन को तोड़ने की गति पर स्वतंत्र मूल्यांकन अभी बाकी है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीरेंद्र सिंह बसोया कौन है और उस पर क्या आरोप हैं?
वीरेंद्र सिंह बसोया दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित पिलंजी का निवासी है, जिसे एनसीबी ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मेफेड्रोन तस्करी सिंडिकेट का कथित विदेशी संचालक बताया है। उस पर आरोप है कि वह विदेश से नेटवर्क को समन्वित करता था और भारत से अन्य देशों में ड्रग्स की खेप भेजने में मदद करता था।
बसोया को यूएई से कैसे वापस लाया गया?
एनसीबी के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर बसोया को जून 2026 में यूएई में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने यूएई के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर 14 अगस्त 2026 को उसे दिल्ली लाया और आईजीआई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया।
इस मामले में कितनी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुई?
इस मामले में कुल लगभग 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद हुई — पुणे से लगभग 867 किलोग्राम और दिल्ली से 970 किलोग्राम। इसके अलावा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक अलग अभियान में 1,300 किलोग्राम से अधिक कोकीन, मेफेड्रोन और हाइड्रोपोनिक वीड भी बरामद की गई, जिसमें बसोया का नाम सामने आया।
एनसीबी का 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' क्या है?
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट एनसीबी का एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य विदेशों से संचालित होने वाले बड़े ड्रग तस्करों और भगोड़ों की पहचान कर उन्हें भारत वापस लाना है। यह अभियान इंटरपोल रेड नोटिस और अंतरराष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय पर आधारित है।
इस गिरफ्तारी का व्यापक ड्रग-विरोधी नीति से क्या संबंध है?
बसोया की वापसी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी 'ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029)' के लक्ष्यों का हिस्सा है, जो विदेशों में छिपे भगोड़े ड्रग तस्करों को भारत लाकर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इससे पहले तुर्की से मोहम्मद सलीम डोला और मलेशिया से नवीन चिचकर को भी इसी नीति के तहत वापस लाया जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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