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अमित शाह ने साइबर हेल्पलाइन 1930 की समीक्षा की, AI से अपग्रेड और राष्ट्रीय कॉल सेंटर के दिए निर्देश

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अमित शाह ने साइबर हेल्पलाइन 1930 की समीक्षा की, AI से अपग्रेड और राष्ट्रीय कॉल सेंटर के दिए निर्देश

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने 1930 साइबर हेल्पलाइन को AI से लैस करने और राष्ट्रीय कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए। 94 लाख बैंक खातों से धनवापसी की व्यवस्था और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SOP लागू करवाने के आदेश — यह साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ अब तक की सबसे संगठित सरकारी कोशिश है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 17 जून 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
हेल्पलाइन को AI और उन्नत IVR प्रणाली से अपग्रेड करने तथा राष्ट्रीय स्तर का 1930 कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए गए।
CFCFRMS के अंतर्गत अब तक 94 लाख बैंक खाते अपलोड; लगभग एक लाख नागरिकों को धनवापसी का लाभ।
जनवरी 2026 में जारी SOP को सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों से लागू करवाने का निर्देश दिया।
साइबर धोखाधड़ी में प्रयुक्त म्यूल बैंक खातों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया।
गृह मंत्रालय राज्यों के कॉल सेंटरों के हार्डवेयर एवं तकनीकी उन्नयन के लिए सहयोग प्रदान करेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 जून 2026 को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की व्यापक समीक्षा की और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करने के निर्देश दिए। बैठक में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को त्वरित राहत देने वाली नागरिक-केंद्रित व्यवस्थाओं की भी गहन समीक्षा की गई।

हेल्पलाइन का आधुनिकीकरण

शाह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 1930 हेल्पलाइन प्रणाली का व्यापक आधुनिकीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि AI और उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग से शिकायतों का शीघ्र पंजीकरण, इंटेलिजेंट कॉल रूटिंग और नागरिक शिकायतों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी राज्य स्तरीय कॉल सेंटरों को सुदृढ़ इंटरैक्टिव वॉयस रिस्पॉन्स (IVR) प्रणाली से अपग्रेड किया जाए, जिससे कॉलों का निर्बाध और उचित स्तर पर अग्रेषण हो सके।

गृह मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि हेल्पलाइन पर संपर्क करने वाले प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध सहायता मिले और कोई भी शिकायत अनदेखी या लंबित न रहे।

राष्ट्रीय कॉल सेंटर की स्थापना

राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से अमित शाह ने पर्याप्त मानव संसाधन एवं कॉल हैंडलिंग क्षमता से युक्त एक राष्ट्रीय स्तर के 1930 कॉल सेंटर की स्थापना के निर्देश दिए। यह केंद्र राज्यों में अनुत्तरित रह जाने वाली कॉलों को संभालेगा, ताकि कोई भी पीड़ित नागरिक सहायता से वंचित न रहे।

गृह मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1930 कॉल सेंटरों के हार्डवेयर एवं तकनीकी उन्नयन के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा, जबकि राज्यों से पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा।

CFCFRMS और मनी रिस्टोरेशन की समीक्षा

बैठक में गृह मंत्रालय की प्रमुख पहल — नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) — के कार्य-निष्पादन की भी समीक्षा की गई। यह प्रणाली बैंकिंग तंत्र के माध्यम से धोखाधड़ी वाले वित्तीय लेन-देन को त्वरित रूप से रोकने में सहायता करती है, जिससे पीड़ितों की धनराशि की वापसी की संभावना बढ़ जाती है।

अधिकारियों ने गृह मंत्री को बताया कि मनी रिस्टोरेशन एवं शिकायत निवारण व्यवस्था के अंतर्गत अब तक 94 लाख ऐसे बैंक खाते अपलोड किए जा चुके हैं जिनसे राशि लौटाई जा सकती है। इस व्यवस्था से अब तक लगभग एक लाख नागरिक लाभान्वित हो चुके हैं।

SOP और सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

शाह ने उल्लेख किया कि गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की थी। यह SOP बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करती है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी सभी उच्च न्यायालयों को इस SOP को लागू करवाने का निर्देश दिया है।

गृह मंत्री ने मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) और शिकायत निवारण मॉड्यूल (GRM) की राज्य स्तर पर भी नियमित निगरानी के निर्देश दिए, ताकि अनावश्यक रूप से फ्रीज बैंक खातों पर त्वरित कार्रवाई हो और जवाबदेही तय की जा सके।

म्यूल खातों पर कड़ा रुख

बैठक में अमित शाह ने साइबर अपराधियों द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी में प्रयुक्त म्यूल बैंक खातों की समस्या के अधिक प्रभावी समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सुरक्षित, प्रौद्योगिकी-संचालित और नागरिक-केंद्रित साइबर अपराध रोकथाम एवं प्रतिक्रिया तंत्र के निर्माण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी गृह मंत्रालय स्वयं करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा राज्यों की भागीदारी में होगी — जहाँ मानव संसाधन की कमी पुरानी समस्या रही है। सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि न्यायपालिका भी इस मुद्दे पर कार्यपालिका की गति से संतुष्ट नहीं है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 क्या है?
1930 एक केंद्रीय हेल्पलाइन है जहाँ नागरिक साइबर अपराध, विशेषकर वित्तीय साइबर धोखाधड़ी, की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत संचालित है और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इसके कॉल सेंटर कार्यरत हैं।
अमित शाह ने 1930 हेल्पलाइन को बेहतर बनाने के लिए क्या निर्देश दिए?
गृह मंत्री अमित शाह ने AI और उन्नत IVR प्रणाली से हेल्पलाइन को अपग्रेड करने, राष्ट्रीय स्तर का कॉल सेंटर स्थापित करने और राज्यों के कॉल सेंटरों को तकनीकी व मानव संसाधन से सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी शिकायत लंबित नहीं रहनी चाहिए।
CFCFRMS क्या है और इससे पीड़ितों को कैसे फायदा होता है?
CFCFRMS यानी नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली गृह मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जो बैंकिंग तंत्र के जरिए धोखाधड़ी वाले लेन-देन को त्वरित रूप से रोकती है। इससे पीड़ितों की धनराशि की वापसी की संभावना बढ़ जाती है और अब तक लगभग एक लाख नागरिक इससे लाभान्वित हो चुके हैं।
साइबर धोखाधड़ी की SOP क्या है और सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका है?
गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के त्वरित निस्तारण के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की, जो बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करती है। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों को इस SOP को लागू करवाने का निर्देश दिया है।
म्यूल बैंक खाते क्या हैं और ये साइबर अपराध से कैसे जुड़े हैं?
म्यूल बैंक खाते वे खाते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी वित्तीय धोखाधड़ी की राशि को स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इन खातों की पहचान और उन पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है, क्योंकि ये खाते धोखाधड़ी की जाँच को जटिल बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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