गुजरात डीजीपी ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने गांधीनगर साइबर सेंटर का औचक निरीक्षण किया, हेल्पलाइन 1930 के विस्तार पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने 4 अगस्त 2026 को गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का अचानक दौरा कर साइबर अपराध जांच प्रणाली, डिजिटल फोरेंसिक ढाँचे और नागरिक सहायता तंत्र की व्यापक समीक्षा की। इस निरीक्षण में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को त्वरित राहत देने और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 की पहुँच बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई।
निरीक्षण में क्या देखा गया
डीजीपी मलिक ने केंद्र की विभिन्न विशेष शाखाओं के कामकाज का बारीकी से आकलन किया। उन्होंने जाँचा कि साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें किस प्रक्रिया से दर्ज होती हैं, पीड़ितों को प्रारंभिक प्रतिक्रिया कितनी शीघ्रता से मिलती है और तकनीकी सहायता किस स्तर पर उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अतिरिक्त मोबाइल फोन और कंप्यूटर फोरेंसिक, डेटा रिकवरी प्रक्रियाओं तथा डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक संरक्षण के तरीकों की भी समीक्षा की गई, ताकि अदालतों में प्रस्तुत साक्ष्य अधिक पुख्ता और पारदर्शी हों।
उन्नत तकनीक और खुफिया विश्लेषण पर बल
वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श में मलिक ने कहा कि साइबर अपराधों की जटिलता लगातार बढ़ रही है और इससे निपटने के लिए उन्नत तकनीक तथा खुफिया विश्लेषण का व्यापक उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने पुलिस कर्मियों को आधुनिक साइबर उपकरणों और तकनीक-आधारित जांच पद्धतियों में प्रशिक्षित करने के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
साइबर हेल्पलाइन 1930 का विस्तार
निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की पहुँच और प्रभावशीलता बढ़ाने की योजनाओं पर विशेष चर्चा हुई। इसका उद्देश्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों के पीड़ितों को न्यूनतम समय में सहायता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने डीजीपी को साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों तथा महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करने वाले अपराधों पर चल रहे विशेष अभियानों की जानकारी दी।
डीजीपी के प्रमुख निर्देश
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा, 'साइबर सुरक्षा पुलिस विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी आधुनिक सुविधाएँ नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण देने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।
जारी किए गए प्रमुख निर्देशों में साइबर जाँच की गुणवत्ता को इस स्तर तक सुधारना शामिल है कि न्यायालयों में प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्य अधिक ठोस हों। साथ ही, डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के लिए चल रहे प्रयासों को और तेज करने पर भी जोर दिया गया।
आगे की राह
यह निरीक्षण गुजरात पुलिस की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसका लक्ष्य साइबर अपराधों की पहचान, जाँच और पीड़ित-सहायता की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ करना है। साइबर अपराधों की बढ़ती जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञ इन प्रयासों को समय की माँग मानते हैं। आने वाले समय में प्रशिक्षण कार्यक्रमों और हेल्पलाइन विस्तार की ठोस कार्ययोजना सामने आने की उम्मीद है।