गुजरात के नए DGP ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने संभाला कार्यभार, साइबर क्राइम और नशा नियंत्रण होंगे शीर्ष प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक (DGP) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने सोमवार, 8 जून 2026 को गांधीनगर स्थित पुलिस भवन में औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। 1993 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मलिक ने स्पष्ट किया कि तकनीक-आधारित पुलिसिंग, साइबर अपराध की रोकथाम, नशा तस्करी पर सख्त कार्रवाई और जन-शिकायत निवारण उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेंगे। उनकी नियुक्ति राज्य सरकार ने शनिवार को घोषित की थी।
पद-ग्रहण और पृष्ठभूमि
मलिक इससे पहले अहमदाबाद पुलिस आयुक्त के पद पर कार्यरत थे, जहाँ वे जुलाई 2023 से तैनात थे। उनके कार्यभार संभालने से पहले लगभग पाँच महीनों तक DGP का पद वरिष्ठ अधिकारी के.एल.एन. राव के पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में था। मलिक के पास 30 वर्षों से अधिक का पुलिस सेवा का अनुभव है। वे हरियाणा के मूल निवासी हैं और उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग तथा गुजरात विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री प्राप्त की है।
अपने करियर में उन्होंने गुजरात के विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में सेवाएँ दी हैं। इसके अलावा वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में भी तैनात रहे हैं। गौरतलब है कि वे संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो शांति मिशन में भी भाग ले चुके हैं, जो उनके व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव को दर्शाता है।
सीसीटीवी निगरानी का विस्तार
नए DGP ने अहमदाबाद के सीसीटीवी नेटवर्क को एक सफल मॉडल बताते हुए कहा कि इसे राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनता के सहयोग से अहमदाबाद में 24,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। इनमें से 3,000 से अधिक कैमरों की फीड सीधे पुलिस थानों से जुड़ी है, जबकि 7,000 से अधिक कैमरों की लाइव फीड पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुँचती है।
मलिक ने कहा कि इस व्यापक निगरानी तंत्र से चोरी, डकैती और चेन स्नैचिंग जैसे अपराधों की रोकथाम और त्वरित उद्भेदन में उल्लेखनीय सहायता मिली है।
साइबर अपराध और नशा नियंत्रण
मलिक ने साइबर अपराध को तेज़ी से उभरती चुनौती बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता में वृद्धि आवश्यक है। उन्होंने घोषणा की कि अहमदाबाद में विकसित साइबर प्रशिक्षण कार्यक्रम अब राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किए जाएंगे।
नशा तस्करी के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा तथा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की गति और तेज होगी। उन्होंने स्पष्ट किया, 'अपराध का पता लगाना ही अपराध रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। अगर किसी अपराधी को एक या दो अपराध के बाद पकड़ लिया जाए, तो आगे कई अपराध रोके जा सकते हैं।'
जन-शिकायत निवारण और पुलिस-जन संबंध
नवनियुक्त DGP ने जनता की शिकायतों के समाधान की प्रणाली को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया। उनका लक्ष्य है कि शिकायतों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो, ताकि नागरिकों को बार-बार गांधीनगर न आना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और जनता के बीच संवाद व विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात में साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी देखी जा रही है और राज्य की तटीय सीमाओं के जरिए नशा तस्करी एक सतत चुनौती बनी हुई है। मलिक के नेतृत्व में गुजरात पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।