सुकांत मजूमदार का दावा: पश्चिम बंगाल से लगभग 5,000 बांग्लादेशी नागरिक वापस भेजे गए
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 14 जून 2026 को मीडिया से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल से अब तक लगभग 5,000 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार 'पहचान, नाम हटाना और वापस भेजना' — यानी डिटेक्शन, डिलीशन और डिपोर्टेशन — की नीति पर काम कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मजूमदार ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले ही इस संख्या की पुष्टि कर चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यह प्रक्रिया जारी रहेगी और समय-समय पर मुख्यमंत्री वापस भेजे गए लोगों की संख्या के बारे में जानकारी देते रहेंगे।' यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार घुसपैठियों की पहचान और निष्कासन को प्राथमिकता दे रही है।
फर्जी हस्ताक्षर मामले में जांच
मजूमदार ने फर्जी हस्ताक्षर मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सीआईडी जांच कर रही है और यह आरोप तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर से भी उठे हैं कि उनके हस्ताक्षर फर्जी थे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की जांच की जाएगी।
टीएमसी में टूट और मानस रंजन भुनिया का इस्तीफा
पूर्व मंत्री मानस रंजन भुनिया के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने पर मजूमदार ने कहा कि भुनिया पहले कांग्रेस में थे, फिर TMC में शामिल हुए। उनके अनुसार, कथित गुंडागर्दी के कारण एक समय भुनिया को खेतों से होकर भागना पड़ा था। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे 'भरोसा इन, धरना आउट, भय आउट' का असर बताया।
गौरतलब है कि TMC में यह टूट केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं है — विधानसभा के बाद अब संसद में भी दरारें सामने आई हैं। बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके 'धृतराष्ट्र जैसे स्नेह' ने पार्टी को कमज़ोर और विभाजित कर दिया है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर ममता के अत्यधिक भरोसे को TMC के पतन की मुख्य वजह बताया।
परीक्षाओं में पारदर्शिता का आश्वासन
मजूमदार ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि पिछली सरकार के दौर में परीक्षाओं में जो गड़बड़ियाँ होती थीं, वह अब नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से बातचीत के आधार पर वे आश्वस्त हैं कि परीक्षाएँ निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएंगी।
आगे क्या
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया जारी रहने और TMC में बढ़ती आंतरिक उठापटक के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर है। BJP सरकार के लिए घुसपैठ-विरोधी अभियान एक प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बना हुआ है, जबकि विपक्षी TMC आंतरिक संकट से जूझ रही है।