जीटीए भ्रष्टाचार की जांच होगी: सीएम सुवेंदु अधिकारी का सिलीगुड़ी में बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 मई 2026 को सिलीगुड़ी में एक प्रशासनिक बैठक के दौरान घोषणा की कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के कामकाज में कथित भ्रष्टाचार की औपचारिक जांच शुरू की जाएगी। जीटीए उत्तरी बंगाल के दार्जिलिंग, कर्सियांग और कलिम्पोंग के पहाड़ी क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन संभालने वाली स्वायत्त संस्था है।
जांच की पृष्ठभूमि
जीटीए का संचालन वर्तमान में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के हाथों में है, जिसके मुख्य कार्यकारी अनित थापा हैं। बीजीपीएम पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार का सहयोगी दल रहा है। मुख्यमंत्री अधिकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली राज्य सरकार के कार्यकाल में जीटीए के कामकाज पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन गठबंधन संबंधों के चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और नीतिगत रुख
सीएम ने स्पष्ट किया कि नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति पर काम करेगी और यह नीति जीटीए पर भी समान रूप से लागू होगी। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी जीटीए में भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे अब जांच के दायरे में लिया जाएगा।
उत्तर बंगाल विकास के वादे
मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार भाजपा के चुनाव-पूर्व 'संकल्प पत्र' में उत्तर बंगाल के विकास को लेकर किए गए वादों को अगले एक वर्ष के भीतर पूरा करने का प्रयास करेगी। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब उत्तर बंगाल के पहाड़ी जिलों में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से मांगें उठती रही हैं।
जुलाई दौरे की योजना
सीएम ने बताया कि वे जुलाई में उत्तर बंगाल का पुनः दौरा करेंगे। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे उस दौरे से पहले राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रस्तावों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार रखें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उन प्रस्तावों पर यथासंभव गंभीरता से विचार करेगी।
आगे क्या होगा
जांच की औपचारिक रूपरेखा और समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम उत्तर बंगाल में भाजपा के नए प्रशासन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है और पहाड़ी क्षेत्रों में पार्टी के राजनीतिक आधार को मज़बूत करने की दिशा में एक संकेत है।