पश्चिम बंगाल पोस्ट-पोल हिंसा: चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी और सीएपीएफ को 'जीरो टॉलरेंस' के निर्देश दिए
सारांश
मुख्य बातें
चुनाव आयोग ने मंगलवार, 6 मई 2025 को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राज्य में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को पोस्ट-पोल हिंसा पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के कड़े निर्देश दिए। यह कदम तब उठाया गया जब सोमवार की शाम से राज्य के कई हिस्सों में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टें सामने आईं।
मुख्य घटनाक्रम
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया कि उसके कई पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई। दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज इलाके में पूर्व टीएमसी विधायक अरूप बिस्वास का पार्टी कार्यालय भी कथित तौर पर तोड़ दिया गया। इसी तरह बेलियाघाटा क्षेत्र में एक टीएमसी कार्यालय में तोड़फोड़ और एक कार्यकर्ता की पिटाई की सूचना है।
टीएमसी ने यह भी दावा किया कि अभिषेक बनर्जी का आम्तला स्थित कार्यालय भी भीड़ के हमले का शिकार हुआ। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
राजनीतिक बदलाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि लगभग डेढ़ दशक बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 293 में से 207 सीटें जीतकर राज्य की सत्ता हासिल की है, जबकि टीएमसी की सीटें 2021 के 215 से घटकर महज 80 रह गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता-परिवर्तन के बाद हिंसा की आशंका पहले से जताई जा रही थी।
कोलकाता पुलिस की चेतावनी और सोशल मीडिया
कोलकाता पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। पुलिस ने कहा कि शहर की स्थिति नियंत्रण में है और नागरिकों से ऐसी पोस्ट साझा न करने की अपील की। यह चेतावनी उस समय जारी हुई जब सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे थे, जिनमें चुनाव परिणामों के बाद हिंसा के दावे किए जा रहे थे।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर नारेबाजी
सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास के बाहर BJP के कई कार्यकर्ता और समर्थक इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सैकड़ों BJP समर्थक कालीघाट इलाके में 'जय श्री राम', 'भाजपा जिंदाबाद' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाते दिखे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँचकर भीड़ को तितर-बितर कर स्थिति नियंत्रित की।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें राज्य प्रशासन पर टिकी हैं कि वह जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था बहाल करने में कितना सफल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता-परिवर्तन के बाद के शुरुआती दिन बेहद संवेदनशील होते हैं और किसी भी ढिलाई से स्थिति बिगड़ सकती है।