2 अगस्त 2026
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जीटीए प्रमुख अनित थापा का इस्तीफा, भ्रष्टाचार जांच की घोषणा के 24 घंटे बाद छोड़ा पद

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जीटीए प्रमुख अनित थापा का इस्तीफा, भ्रष्टाचार जांच की घोषणा के 24 घंटे बाद छोड़ा पद

सारांश

जीटीए प्रमुख अनित थापा का इस्तीफा महज संयोग नहीं — यह भ्रष्टाचार जांच की घोषणा के ठीक 24 घंटे बाद आया। दार्जिलिंग की पहाड़ी राजनीति में यह हलचल आने वाले समय में स्वायत्त शासन के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

अनित थापा ने 17 जून 2026 को जीटीए के मुख्य कार्यकारी पद से इस्तीफा दिया।
इस्तीफा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा जीटीए में भ्रष्टाचार जांच की घोषणा के 24 घंटे बाद आया।
थापा का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था; उन्होंने एक वर्ष पूर्व ही पद छोड़ा।
अधिकारी ने जीटीए-संचालित स्कूलों में शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं पर जेल भेजने की चेतावनी दी थी।
जीटीए दार्जिलिंग , कालिम्पोंग और कुर्सियांग में 59 विभागों का संचालन करती है।

भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के संस्थापक अनित थापा ने बुधवार, 17 जून 2026 को गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के मुख्य कार्यकारी पद से इस्तीफा दे दिया — और यह कदम उस घोषणा के ठीक 24 घंटे बाद उठाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जीटीए में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने का ऐलान किया था। थापा का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने एक वर्ष पूर्व ही स्वेच्छा से पद छोड़ दिया।

मुख्य घटनाक्रम

थापा ने 2022 में जीटीए के मुख्य कार्यकारी की जिम्मेदारी संभाली थी। जीटीए दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कुर्सियांग के पहाड़ी क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन संचालित करने वाली स्वायत्त संस्था है, जो लगभग 59 विभागों — बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और लोक निर्माण सहित — का प्रशासनिक एवं वित्तीय संचालन करती है। समाचार लिखे जाने तक थापा ने अपने इस्तीफे के कारणों पर मीडिया के सामने कोई टिप्पणी नहीं की थी।

भ्रष्टाचार जांच की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कुर्सियांग में आयोजित एक जनसभा में जीटीए के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से जीटीए-संचालित स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और कहा कि इस भ्रष्टाचार में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें जेल भेजा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की पहाड़ी राजनीति में सत्ता-समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं।

जीटीए का राजनीतिक संदर्भ

बीजीपीएम पश्चिम बंगाल में पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सहयोगी पार्टी रही है। गौरतलब है कि जीटीए का गठन 2011 में केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुआ था। उसी वर्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में 34 वर्षों के वाम शासन का अंत कर सत्ता संभाली थी। जीटीए ने 1988 में गठित दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (डीजीएचसी) का स्थान लिया था।

आम जनता पर असर

जीटीए दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जिलों के हजारों निवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सेवाओं की प्राथमिक प्रशासनिक इकाई है। मुख्य कार्यकारी के अचानक इस्तीफे से इन सेवाओं की निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं, और पहाड़ी क्षेत्रों में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

क्या होगा आगे

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जीटीए के मुख्य कार्यकारी पद पर अगला नियुक्ति कब और कैसे होगी। जांच की घोषणा के बाद यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस प्रक्रिया को किस दिशा में ले जाती है। पहाड़ी राजनीति के जानकारों के अनुसार, यह घटनाक्रम आने वाले समय में दार्जिलिंग क्षेत्र की स्वायत्त शासन व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब बीजीपीएम और तृणमूल कांग्रेस के बीच का गठबंधन पहले से ही दबाव में था। मुख्यमंत्री अधिकारी की 'जेल भेजने' की भाषा राजनीतिक दबाव के रूप में भी पढ़ी जा सकती है, जो पहाड़ी क्षेत्र में भाजपा के बढ़ते प्रभाव की कोशिश को दर्शाती है। असली सवाल यह है कि जांच की प्रक्रिया स्वतंत्र और पारदर्शी होगी या यह राजनीतिक पुनर्गठन का औजार बनेगी। जीटीए जैसी स्वायत्त संस्था में अस्थिरता का सीधा असर दार्जिलिंग और कालिम्पोंग के लाखों निवासियों की बुनियादी सेवाओं पर पड़ता है — यह पहलू राजनीतिक बहस में अक्सर नजरअंदाज हो जाता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनित थापा ने जीटीए प्रमुख पद से इस्तीफा क्यों दिया?
अनित थापा ने 17 जून 2026 को जीटीए के मुख्य कार्यकारी पद से इस्तीफा दिया, जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा जीटीए में कथित भ्रष्टाचार की जांच की घोषणा के ठीक 24 घंटे बाद आया। थापा ने अभी तक अपने इस्तीफे के कारणों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।
जीटीए क्या है और यह कैसे काम करती है?
गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कुर्सियांग के पहाड़ी क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन चलाने वाली स्वायत्त संस्था है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और बुनियादी ढांचे सहित लगभग 59 विभागों का संचालन करती है और 2011 में त्रिपक्षीय समझौते के बाद गठित हुई थी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जीटीए पर क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कुर्सियांग में एक जनसभा में जीटीए के कामकाज में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने विशेष रूप से जीटीए-संचालित स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और कहा कि दोषियों की पहचान कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।
जीटीए का गठन कब और कैसे हुआ था?
जीटीए का गठन 2011 में केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुआ था। इसने 1988 में गठित दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (डीजीएचसी) का स्थान लिया था।
अनित थापा का जीटीए में कार्यकाल कितना था?
अनित थापा ने 2022 में जीटीए के मुख्य कार्यकारी का पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था। उन्होंने निर्धारित समय से एक वर्ष पहले ही स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया।
राष्ट्र प्रेस
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