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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को ₹1.25 लाख करोड़ की मंजूरी, 2030 तक 75% घरेलू माँग पूरी करने का लक्ष्य

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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को ₹1.25 लाख करोड़ की मंजूरी, 2030 तक 75% घरेलू माँग पूरी करने का लक्ष्य

सारांश

वित्त मंत्रालय की EFC ने ISM 2.0 के लिए ₹1.25 लाख करोड़ को हरी झंडी दे दी है — ISM 1.0 के ₹76,000 करोड़ से 64% अधिक। लक्ष्य है 2030 तक भारत की 75% घरेलू सेमीकंडक्टर माँग घर पर ही पूरी करना और वैश्विक चिप वैल्यू चेन में स्थायी जगह बनाना।

मुख्य बातें

वित्त मंत्रालय की EFC ने ISM 2.0 के लिए ₹1.25 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दी; अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा गया।
यह राशि ISM 1.0 के ₹76,000 करोड़ से लगभग 64% अधिक है।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक घरेलू सेमीकंडक्टर माँग का 75% स्वदेशी उत्पादन से पूरा करना है।
ISM 2.0 का दायरा इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट और MSME तक विस्तारित होगा।
गुजरात के साणंद में पायलट प्रोडक्शन शुरू; एक वर्ष में 4 और इकाइयों में उत्पादन अपेक्षित।
Applied Materials, Lam Research, Merck और Linde सप्लाई चेन में निवेश कर रही हैं।

वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (EFC) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के लिए ₹1.25 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है, जिससे भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के अगले और महत्त्वाकांक्षी चरण का रास्ता साफ हो गया है। यह प्रस्ताव पिछले सप्ताह समिति से पास हुआ और अब अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

ISM 2.0 बनाम ISM 1.0: कितना बड़ा है यह कदम

प्रस्तावित ₹1.25 लाख करोड़ का आवंटन ISM 1.0 के ₹76,000 करोड़ के बजट से लगभग 64% अधिक है। पहले चरण में सरकार ने चिप निर्माण, असेंबली और डिज़ाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर सुविधाओं को स्वीकृति दी थी। नया चरण उस आधार को विस्तार देते हुए पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है।

गौरतलब है कि गुजरात के साणंद में एक इकाई में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक वर्ष के भीतर चार और इकाइयों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

ISM 2.0 का दायरा: किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

ISM 2.0 के तहत केवल चिप फैब्रिकेशन तक सीमित न रहते हुए, इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट, MSME और सहायक आपूर्तिकर्ताओं को भी सहयोग मिलने की उम्मीद है। यह भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को शुरू से अंत तक मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

Applied Materials, Lam Research, Merck और Linde जैसी वैश्विक कंपनियाँ पहले से ही सपोर्टिंग फैक्टरियों और सप्लाई चेन में निवेश कर रही हैं, जो इस इकोसिस्टम के परिपक्व होने का संकेत है।

2030 का लक्ष्य और घरेलू माँग का समीकरण

सरकार का अनुमान है कि ISM 2.0 के जरिये भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर माँग का 75% हिस्सा स्वयं पूरा कर सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह लक्ष्य ऐसे समय में आया है जब भारत में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वार्षिक उत्पादन ₹12 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है।

इसके अतिरिक्त, AI-आधारित प्रणालियाँ, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहन — तीनों ही सेगमेंट में सेमीकंडक्टर चिप्स की माँग तेजी से बढ़ रही है, जिससे भारत के लिए वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी स्थायी जगह बनाना रणनीतिक अनिवार्यता बन गई है।

मंत्रालयों के बीच समन्वय और अगले कदम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को वित्त मंत्रालय की इस मंजूरी का लंबे समय से इंतजार था। मंत्रालयों के बीच अंतर-विभागीय बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है, और अब केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही योजना औपचारिक रूप से लागू हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कैबिनेट की मंजूरी में अधिक विलंब की संभावना नहीं है, क्योंकि सभी प्रमुख प्रशासनिक प्रक्रियाएँ पूरी हो चुकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — ISM 1.0 की 10 में से अधिकांश इकाइयाँ अभी भी निर्माणाधीन हैं। 2030 तक 75% घरेलू माँग पूरी करने का लक्ष्य तभी संभव है जब फैब से लेकर केमिकल और इक्विपमेंट तक की सप्लाई चेन एक साथ परिपक्व हो — जो ऐतिहासिक रूप से भारत की सबसे कमज़ोर कड़ी रही है। वैश्विक कंपनियों का निवेश सकारात्मक संकेत है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता और चिप टेक्नोलॉजी के तेज़ बदलाव के बीच देर से शुरू हुई दौड़ में पकड़ बनाना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्या है?
ISM 2.0 भारत सरकार की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की अगली पीढ़ी की योजना है, जिसके लिए वित्त मंत्रालय की EFC ने ₹1.25 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। यह ISM 1.0 का विस्तार है और इसमें चिप फैब्रिकेशन के साथ-साथ इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट और MSME को भी शामिल किया गया है।
ISM 2.0 को कैबिनेट की मंजूरी कब मिलेगी?
EFC ने पिछले सप्ताह इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है और अब इसे केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। मंत्रालयों के बीच अंतर-विभागीय बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है, इसलिए कैबिनेट की मंजूरी शीघ्र अपेक्षित है।
ISM 2.0 का बजट ISM 1.0 से कितना अधिक है?
ISM 2.0 का प्रस्तावित बजट ₹1.25 लाख करोड़ है, जबकि ISM 1.0 के तहत ₹76,000 करोड़ आवंटित किए गए थे। यह लगभग 64% की वृद्धि है।
2030 तक 75% घरेलू सेमीकंडक्टर माँग पूरी करने का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?
सरकार का अनुमान है कि ISM 2.0 के तहत चिप निर्माण इकाइयों के साथ-साथ सप्लाई चेन के सभी घटकों — इंडस्ट्रियल गैस, केमिकल, इक्विपमेंट — को मजबूत करने से 2030 तक घरेलू माँग का 75% स्वदेशी उत्पादन से पूरा किया जा सकेगा। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
ISM 1.0 के तहत अब तक क्या हुआ है?
ISM 1.0 के तहत सरकार ने चिप निर्माण, असेंबली और डिज़ाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर सुविधाओं को मंजूरी दी थी। गुजरात के साणंद में एक इकाई में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक वर्ष के भीतर चार और इकाइयों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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