विकसित भारत 2047: 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक्स-सेमीकंडक्टर उत्पादन ₹500 अरब डॉलर के पार ले जाने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार ने 'विकसित भारत 2047' विजन के अंतर्गत 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उत्पादन को मौजूदा 330 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। नई दिल्ली में 30 जुलाई 2026 को आयोजित इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IGCC) डायलॉग 2026 में यह जानकारी साझा की गई। सरकार का मानना है कि इस लक्ष्य की प्राप्ति से भारत वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
मुख्य घटनाक्रम
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने IGCC डायलॉग को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत 2047' को अब केवल एक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि क्षेत्रवार ठोस कार्ययोजना में रूपांतरित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक क्षेत्र के लिए 2030 तक हासिल किए जाने वाले स्पष्ट मील के पत्थर तय किए गए हैं।
भाटिया के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 500 अरब डॉलर का लक्ष्य महज एक पड़ाव है। दीर्घकालिक दृष्टि के तहत 2047 तक इस क्षेत्र को 5.3 ट्रिलियन डॉलर से 8 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक ले जाने की योजना है — जो भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक अपरिहार्य स्तंभ बना सकती है।
सुधार और कारोबारी सुगमता
भाटिया ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में निरंतर नीतिगत सुधारों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन ने भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों के लिए गठित उच्च स्तरीय समितियों ने सुधारों की गति को और तीव्र किया है।
कैबिनेट सचिवालय में स्थापित डी-रेगुलेशन सेल राज्य सरकारों के साथ समन्वय करते हुए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर करने पर सक्रिय रूप से कार्यरत है। इसका प्रमुख उद्देश्य उद्योगों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ घटाना और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
भारत-जर्मनी साझेदारी की भूमिका
भाटिया ने भारत और जर्मनी के बीच 25 वर्षों से अधिक पुरानी रणनीतिक साझेदारी और 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते एक सदी से भी अधिक पुराने हैं — कई जर्मन कंपनियों ने भारत की आज़ादी से पहले ही यहाँ अपना कारोबार शुरू कर दिया था।
उन्होंने IGCC के 2,500 से अधिक सदस्यों को दोनों देशों के मज़बूत व्यावसायिक संबंधों का प्रमाण बताया और कहा कि यह मंच भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश सहयोग को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों, निवेश और औद्योगिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज़ हो रही है और अमेरिका, यूरोप व जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र तलाश रही हैं। गौरतलब है कि भारत पहले ही PLI योजना और सेमीकंडक्टर मिशन के ज़रिये इस क्षेत्र में वैश्विक निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। 2030 का लक्ष्य इन्हीं प्रयासों को एक समयबद्ध रूपरेखा देता है।