नीति आयोग का 10 साल का सेमीकंडक्टर रोडमैप जारी, 2035 तक $120-150 अरब के इकोसिस्टम का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने 29 मई 2026 को भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक महत्वाकांक्षी 10 वर्षीय रोडमैप — 'फ्यूचर ऑफ इंडिया'स सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री' — जारी किया, जिसका लक्ष्य 2035 तक $120 से $150 अरब का घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम खड़ा करना है। यह दस्तावेज़ भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक निर्णायक स्थान दिलाने की दिशा में तैयार किया गया है।
लॉन्च और प्रमुख उपस्थिति
इस रोडमैप को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया। इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी भी उपस्थित रहे। नीति आयोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में नेतृत्व कुछ वर्षों में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक योजना, निरंतर क्षमता निर्माण और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समयपूर्व निवेश से हासिल होता है।
रोडमैप में क्या है
रोडमैप में डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में भारत के लिए रणनीतिक अवसरों की पहचान की गई है। दस्तावेज़ यह स्पष्ट करता है कि भारत एक साथ पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता — इसलिए देश को कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर गहराई से ध्यान केंद्रित करना होगा जहाँ वैश्विक बाज़ार में बड़ी छलांग संभव है। नीति आयोग के अनुसार, भारत अब केवल प्रारंभिक इकोसिस्टम निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसे गहरा और मज़बूत बनाने के चरण में प्रवेश कर चुका है।
विशेषज्ञ की राय
लाहिड़ी ने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने में अपेक्षा से कहीं अधिक तेज़ गति से प्रगति की है, लेकिन 'विकसित भारत' के लक्ष्य के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता अनिवार्य होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि देश के सामने सबसे बड़ा रणनीतिक जोखिम 'ब्लैक-बॉक्स टेक्नोलॉजी' पर बढ़ती आयात निर्भरता है। उनके अनुसार, तकनीकी संप्रभुता की शुरुआत इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर से होनी चाहिए — जहाँ सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी, ऊर्जा, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रीढ़ बनते हैं।
वैश्विक साझेदारी और आगे की राह
लाहिड़ी ने रेखांकित किया कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन, प्रारंभिक निवेश और अमेरिका, जापान तथा यूरोप के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारियों के ज़रिये देश ने मज़बूत गति पकड़ ली है। उनके अनुसार, अगले 10 वर्ष इस गति को एक स्थायी राष्ट्रीय क्षमता में बदलने के लिए निर्णायक होंगे। यह रोडमैप केवल रणनीतिक दिशा तक सीमित नहीं है — इसमें अगले दशक की प्रमुख प्राथमिकताएँ, आवश्यक नीतिगत समर्थन और उन क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान शामिल है जहाँ भारत वैश्विक नेतृत्व की स्थिति हासिल कर सकता है।
आगे क्या
यह रोडमैप ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही है और अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए रणनीतिक अवसर की खिड़की खुली है। गौरतलब है कि यह दस्तावेज़ भारत की पहली बड़ी दीर्घकालिक सेमीकंडक्टर नीति रूपरेखा है, जो क्षेत्र-विशेष प्राथमिकताओं के साथ क्रियान्वयन पर विशेष बल देती है।