15 जुलाई 2026
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सेमीकॉन 2.0 को कैबिनेट की मंजूरी: ₹1.27 लाख करोड़ से भारत बनेगा वैश्विक चिप हब

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सेमीकॉन 2.0 को कैबिनेट की मंजूरी: ₹1.27 लाख करोड़ से भारत बनेगा वैश्विक चिप हब

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने ₹1,27,500 करोड़ की 'सेमीकॉन 2.0' योजना को मंजूरी दी — यह सिर्फ नीतिगत निरंतरता नहीं, बल्कि भारत की चिप महत्वाकांक्षा का दूसरा और कहीं अधिक बड़ा दाँव है। 12 अनुमोदित इकाइयाँ, 315 विश्वविद्यालयों में प्रशिक्षण और 2028 की फैब डेडलाइन — भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर अपनी जगह पक्की करने की दौड़ में है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई 2026 को 'सेमीकॉन 2.0' योजना को ₹1,27,500 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी।
सेमीकॉन 1.0 के तहत 12 इकाइयाँ स्वीकृत, कुल प्रस्तावित निवेश ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक।
माइक्रोन , केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया; पहली सेमीकंडक्टर फैब 2028 तक शुरू होने की उम्मीद।
105 स्टार्टअप और MSME को EDA टूल्स तक पहुँच; 24 डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता स्वीकृत।
315 विश्वविद्यालयों में प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक 68,000 छात्र प्रशिक्षित।
योजना छह स्तंभों पर आधारित — चिप डिजाइन, मशीनें व कच्चा माल, नई फैब, ATMP/OSAT, R&D और मानव संसाधन।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'सेमीकॉन 2.0' योजना को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। यह निर्णय 'सेमीकॉन 1.0' की सफलता के बाद उठाया गया अगला बड़ा कदम है।

अब तक की उपलब्धियाँ

कैबिनेट के बयान के अनुसार, सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का कुल निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं।

इन परियोजनाओं में से माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य इकाई के 2026 में उत्पादन शुरू करने की संभावना जताई गई है। ये इकाइयाँ उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों की चिप आवश्यकताओं को पूरा करेंगी।

सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ

सरकार ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी।

पहला स्तंभ — चिप डिजाइन: 105 स्टार्टअप पहले ही चिप डिजाइन पर कार्य आरंभ कर चुके हैं। अब स्वदेशी चिप, सिस्टम डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

दूसरा स्तंभ — मशीनें और कच्चा माल: सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों, रसायनों और गैसों के निर्माण तथा अनुसंधान में लगी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे उच्च-परिशुद्धता विनिर्माण उद्योग की नींव मजबूत होगी।

तीसरा स्तंभ — नई फैब इकाइयाँ: पहली सेमीकंडक्टर फैब 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। अधिक वैश्विक कंपनियों को भारत में फैब स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जाएगा।

चौथा स्तंभ — ATMP और OSAT इकाइयों का विस्तार: अत्याधुनिक ATMP तकनीकों को भारत लाने और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

पाँचवाँ स्तंभ — अनुसंधान एवं विकास: भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा अभी 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से शुरू हुई है। देश-विदेश के अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से और अधिक उन्नत नोड्स विकसित किए जाएंगे।

छठा स्तंभ — कुशल मानव संसाधन: देश की 315 विश्वविद्यालयों में नवीनतम EDA टूल्स से चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं। इस कार्यक्रम को और व्यापक बनाया जाएगा।

स्टार्टअप और MSME को बढ़ावा

सरकार के अनुसार, अब तक 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 105 स्टार्टअप और MSME को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुँच उपलब्ध कराई गई है, जो पहले केवल बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास उपलब्ध थे।

आगे की राह

कैबिनेट के बयान के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया वैकल्पिक चिप आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश में है — और भारत इस अवसर को भुनाने की स्थिति में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

27,500 करोड़ की यह स्वीकृति संख्या के लिहाज़ से प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की है। सेमीकॉन 1.0 के तहत स्वीकृत 12 इकाइयों में से अभी केवल तीन ने उत्पादन शुरू किया है — यह अनुपात दर्शाता है कि स्वीकृति और वास्तविक उत्पादन के बीच की खाई अभी भी चौड़ी है। 28-110 नैनोमीटर की तकनीकी सीमा भारत को अत्याधुनिक चिप निर्माण से अभी भी कई पीढ़ी पीछे रखती है, जबकि TSMC और Samsung 2-3 नैनोमीटर पर काम कर रहे हैं। 2028 की फैब डेडलाइन महत्वाकांक्षी है — और बिना पारदर्शी मील के पत्थरों व स्वतंत्र निगरानी के, यह योजना भी उन घोषणाओं की सूची में जुड़ सकती है जो सुर्खियाँ तो बनाती हैं, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सूई नहीं हिलातीं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन 2.0 योजना क्या है?
सेमीकॉन 2.0 केंद्र सरकार की ₹1,27,500 करोड़ की सेमीकंडक्टर नीति है, जिसे 15 जुलाई 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसका उद्देश्य भारत में चिप डिजाइन, फैब निर्माण, ATMP इकाइयाँ और कुशल मानव संसाधन विकसित कर देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाना है।
सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ कौन-से हैं?
सेमीकॉन 2.0 छह स्तंभों पर आधारित है — चिप डिजाइन, मशीनें व कच्चा माल, नई फैब इकाइयाँ, ATMP/OSAT विस्तार, अनुसंधान एवं विकास (R&D), और कुशल मानव संसाधन तैयार करना। प्रत्येक स्तंभ भारत की सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के एक अलग कमज़ोर पहलू को संबोधित करता है।
भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब कब तक शुरू होगी?
सरकार के अनुसार, भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब 2028 तक उत्पादन शुरू करने की स्थिति में होगी। अभी तक माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य इकाई 2026 में उत्पादन शुरू करने की राह पर है।
सेमीकॉन 2.0 से स्टार्टअप और MSME को क्या फायदा होगा?
सेमीकॉन 2.0 के तहत 105 स्टार्टअप और MSME को अत्याधुनिक EDA (इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन) टूल्स तक पहुँच दी जाएगी और 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इससे छोटी कंपनियाँ भी वैश्विक चिप डिजाइन बाज़ार में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।
सेमीकॉन 2.0 में मानव संसाधन विकास की क्या योजना है?
देश की 315 विश्वविद्यालयों में EDA टूल्स के माध्यम से चिप डिजाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं। सेमीकॉन 2.0 के तहत इस कार्यक्रम को और व्यापक व गहन बनाया जाएगा ताकि कॉलेज स्तर पर ही उद्योग-तैयार प्रतिभाएँ तैयार हो सकें।
राष्ट्र प्रेस
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