सेमीकॉन 2.0 को कैबिनेट की मंजूरी: ₹1.27 लाख करोड़ से भारत बनेगा वैश्विक चिप हब
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'सेमीकॉन 2.0' योजना को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। यह निर्णय 'सेमीकॉन 1.0' की सफलता के बाद उठाया गया अगला बड़ा कदम है।
अब तक की उपलब्धियाँ
कैबिनेट के बयान के अनुसार, सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का कुल निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं।
इन परियोजनाओं में से माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य इकाई के 2026 में उत्पादन शुरू करने की संभावना जताई गई है। ये इकाइयाँ उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों की चिप आवश्यकताओं को पूरा करेंगी।
सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ
सरकार ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी।
पहला स्तंभ — चिप डिजाइन: 105 स्टार्टअप पहले ही चिप डिजाइन पर कार्य आरंभ कर चुके हैं। अब स्वदेशी चिप, सिस्टम डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दूसरा स्तंभ — मशीनें और कच्चा माल: सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों, रसायनों और गैसों के निर्माण तथा अनुसंधान में लगी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे उच्च-परिशुद्धता विनिर्माण उद्योग की नींव मजबूत होगी।
तीसरा स्तंभ — नई फैब इकाइयाँ: पहली सेमीकंडक्टर फैब 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। अधिक वैश्विक कंपनियों को भारत में फैब स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जाएगा।
चौथा स्तंभ — ATMP और OSAT इकाइयों का विस्तार: अत्याधुनिक ATMP तकनीकों को भारत लाने और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
पाँचवाँ स्तंभ — अनुसंधान एवं विकास: भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा अभी 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से शुरू हुई है। देश-विदेश के अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से और अधिक उन्नत नोड्स विकसित किए जाएंगे।
छठा स्तंभ — कुशल मानव संसाधन: देश की 315 विश्वविद्यालयों में नवीनतम EDA टूल्स से चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं। इस कार्यक्रम को और व्यापक बनाया जाएगा।
स्टार्टअप और MSME को बढ़ावा
सरकार के अनुसार, अब तक 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 105 स्टार्टअप और MSME को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुँच उपलब्ध कराई गई है, जो पहले केवल बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास उपलब्ध थे।
आगे की राह
कैबिनेट के बयान के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया वैकल्पिक चिप आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश में है — और भारत इस अवसर को भुनाने की स्थिति में है।