भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले वाणिज्य मंत्रालय की उद्योग जगत से बड़ी बैठक, निर्यातकों की चिंताओं पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य मंत्रालय मंगलवार, 2 सितंबर 2026 को प्रमुख उद्योग संगठनों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ एक अहम बैठक करेगा, जिसका केंद्र भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर जारी वार्ता है। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन की समीक्षा के साथ-साथ अमेरिकी बाज़ार में भारतीय निर्यातकों के सामने खड़ी बाधाओं पर विस्तृत चर्चा होगी।
बैठक की अध्यक्षता और एजेंडा
बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे, जो भारत-अमेरिका BTA के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार भी हैं। बैठक में हाल के व्यापारिक रुझानों, क्षेत्रवार निर्यात आँकड़ों और अमेरिकी बाज़ार में मौजूदा शुल्क व्यवस्था के प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श होने की संभावना है।
बैठक में फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग, वस्त्र, कृषि, रसायन, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, हस्तशिल्प और प्लास्टिक उद्योग के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। इसके अलावा भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI), एसोसिएटेड चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) और फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइज़ेशन्स (FIEO) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
गोयल की अमेरिका यात्रा से पहले अहम तैयारी
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं। वे 30 सितंबर से मिल्वौकी में आयोजित G-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस पृष्ठभूमि में उद्योग जगत से सीधा फीडबैक जुटाना सरकार की रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।
गोयल ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि BTA का पहला चरण तभी लागू होगा जब अमेरिका यह सुनिश्चित करे कि भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम से कम तुलनात्मक लाभ प्राप्त हो। यह शर्त वार्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।
वार्ता की स्थिति और सकारात्मक संकेत
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा कि भारत और अमेरिका दोनों फरवरी में तय किए गए ढाँचे के आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है और वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव अपने चरम पर है।
नई चुनौतियाँ: शुल्क और रूसी तेल का मसला
हालाँकि, वार्ता के रास्ते में कुछ नई बाधाएँ भी उभरी हैं। वर्तमान में भारतीय निर्यात पर अमेरिका में सेक्शन 301 जाँच के तहत लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क का असर पड़ रहा है, जो कथित जबरन श्रम संबंधी चिंताओं से जुड़ा है।
इसके अलावा, अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में एक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों के निर्यात पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जो बड़ी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात करते हैं — जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही।
इस पर वाणिज्य सचिव ने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है और भारत फिलहाल व्यापार समझौते पर रचनात्मक बातचीत जारी रखे हुए है।
आगे की राह
मंगलवार की बैठक से निकले सुझाव और चिंताएँ सीधे गोयल की मिल्वौकी यात्रा की तैयारी में शामिल होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि BTA की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अमेरिकी शुल्क बाधाओं और रूसी तेल के मसले को एक साथ कैसे संभालता है। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की नई इबारत किस दिशा में लिखी जाएगी।