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बेंगलुरु में एमबीबीएस सीट के नाम पर ₹1.40 करोड़ की ठगी, डॉक्टर समेत दो पर एफआईआर

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बेंगलुरु में एमबीबीएस सीट के नाम पर ₹1.40 करोड़ की ठगी, डॉक्टर समेत दो पर एफआईआर

सारांश

बेंगलुरु में एक डॉक्टर ने कथित तौर पर निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट दिलाने का झांसा देकर एक दंपति से ₹1.40 करोड़ ऐंठे — नकद और बैंक ट्रांसफर दोनों के ज़रिए। नीट में सफल न हो सकी बेटी के माता-पिता की बेबसी का फायदा उठाया गया। बागलगुंटे पुलिस ने 7 जून को एफआईआर दर्ज की है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु में एमबीबीएस मैनेजमेंट कोटा सीट के नाम पर एक दंपति से कथित तौर पर ₹1.40 करोड़ की ठगी की गई।
शिल्पा अरावली (तुमकुर रोड, प्रक्रिया अस्पताल) और पी.
किरण कुमार के खिलाफ 7 जून 2024 को एफआईआर दर्ज हुई।
पहले ₹35 लाख नकद लिए गए, फिर जुलाई–सितंबर 2023 के बीच चार किश्तों में ₹1.05 करोड़ बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए।
28 दिसंबर 2023 को डॉक्टर ने सीट दिलाने में असमर्थता जताई; 23 मार्च 2024 की व्यक्तिगत मुलाकात के बाद भी पैसे नहीं लौटाए गए।
आरोपियों पर आईपीसी धारा 406, 420 और 34 के तहत मामला दर्ज; जांच जारी।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एमबीबीएस की मैनेजमेंट कोटा सीट दिलाने का झांसा देकर एक दंपति से कथित तौर पर ₹1.40 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। बागलगुंटे पुलिस ने 7 जून 2024 को एक डॉक्टर सहित दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब पीड़ित दंपति ने लंबे इंतजार और बार-बार टालमटोल के बाद पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

मामले की पृष्ठभूमि

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता दंपति अपनी बेटी के लिए किसी निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की मैनेजमेंट कोटा सीट की तलाश कर रहे थे, क्योंकि उनकी बेटी नीट परीक्षा के अंकों के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने में सफल नहीं हो सकी थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने कथित तौर पर उनसे संपर्क किया।

आरोपियों ने कैसे बिछाया जाल

एफआईआर के अनुसार, आरोपी डॉ. शिल्पा अरावली (ए-1), जो उस समय तुमकुर रोड स्थित प्रक्रिया अस्पताल में कार्यरत थीं, ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर दावा किया कि उनके और उनके सहयोगियों के निजी मेडिकल कॉलेजों में मजबूत संपर्क हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मैनेजमेंट कोटा के तहत एमबीबीएस सीट दिलवा सकती हैं। इस आश्वासन पर भरोसा करते हुए दंपति ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की सहमति दे दी।

धन का लेन-देन

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने सबसे पहले प्रक्रिया अस्पताल के पार्किंग क्षेत्र के पास शिकायतकर्ता से ₹35 लाख नकद लिए। इसके बाद शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि शेष राशि आरटीजीएस के माध्यम से दूसरे आरोपी पी. किरण कुमार (ए-2) के बैंक खाते में भेजी जाए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जुलाई से सितंबर 2023 के बीच चार अलग-अलग किश्तों में कुल ₹1.05 करोड़ आरोपी के खाते में स्थानांतरित किए गए। इस प्रकार आरोपियों को कुल ₹1.40 करोड़ का भुगतान किया गया।

टालमटोल और धोखा

पूरी राशि प्राप्त करने के बाद भी आरोपियों ने कथित तौर पर विभिन्न बहाने बनाकर दाखिले की प्रक्रिया को लगातार टालना शुरू कर दिया। शिकायत के अनुसार, 28 दिसंबर 2023 को डॉ. शिल्पा अरावली ने शिकायतकर्ता को सूचित किया कि वह एमबीबीएस सीट की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं और अतिरिक्त समय की मांग की। 23 मार्च 2024 को प्रक्रिया अस्पताल में दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, लेकिन आरोपियों ने न तो पैसे लौटाए और न ही कोई समाधान प्रस्तुत किया।

कानूनी कार्रवाई और जांच

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग), धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 34 (समान आशय से किया गया अपराध) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस धन के लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। यह मामला उस बड़ी समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जिसमें मेडिकल प्रवेश की बेताबी का फायदा उठाकर ठग परिवारों को निशाना बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो साबित करते हैं कि मेडिकल प्रवेश प्रणाली में पारदर्शिता की कमी एक संरचनात्मक कमजोरी बन चुकी है। चिंताजनक यह है कि इस मामले में खुद एक डॉक्टर पर आरोप हैं, जो पेशेवर विश्वसनीयता का दुरुपयोग करके परिवारों को फंसाने का काम करती थीं। जब तक मैनेजमेंट कोटा आवंटन की प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता और रियल-टाइम सत्यापन नहीं होगा, तब तक ऐसे ठग इसी भ्रम का फायदा उठाते रहेंगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु एमबीबीएस सीट ठगी मामला क्या है?
बेंगलुरु में एक डॉक्टर और उनके सहयोगी ने कथित तौर पर एक दंपति को निजी मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटा सीट दिलाने का झांसा देकर ₹1.40 करोड़ ठगे। बागलगुंटे पुलिस ने 7 जून 2024 को दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
इस मामले में आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपी डॉ. शिल्पा अरावली हैं, जो तुमकुर रोड स्थित प्रक्रिया अस्पताल में कार्यरत थीं। दूसरे आरोपी पी. किरण कुमार हैं, जिनके बैंक खाते में शिकायतकर्ता ने ₹1.05 करोड़ आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए थे।
पीड़ित दंपति ने आरोपियों को कुल कितना पैसा दिया और कैसे?
पीड़ित दंपति ने कुल ₹1.40 करोड़ का भुगतान किया — पहले ₹35 लाख नकद प्रक्रिया अस्पताल के पार्किंग क्षेत्र के पास दिए गए, और फिर जुलाई से सितंबर 2023 के बीच चार किश्तों में ₹1.05 करोड़ आरटीजीएस से बैंक खाते में भेजे गए।
आरोपियों के खिलाफ कौन-सी धाराओं में मामला दर्ज हुआ है?
पुलिस ने दोनों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग), धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 34 (समान आशय से किया गया अपराध) के तहत मामला दर्ज किया है।
क्या पीड़ित दंपति को उनके पैसे वापस मिले?
नहीं। शिकायत के अनुसार, 23 मार्च 2024 को प्रक्रिया अस्पताल में दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, लेकिन आरोपियों ने न तो पैसे लौटाए और न ही कोई समाधान प्रस्तुत किया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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