बेंगलुरु में एमबीबीएस सीट के नाम पर ₹1.40 करोड़ की ठगी, डॉक्टर समेत दो पर एफआईआर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एमबीबीएस की मैनेजमेंट कोटा सीट दिलाने का झांसा देकर एक दंपति से कथित तौर पर ₹1.40 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। बागलगुंटे पुलिस ने 7 जून 2024 को एक डॉक्टर सहित दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब पीड़ित दंपति ने लंबे इंतजार और बार-बार टालमटोल के बाद पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
मामले की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता दंपति अपनी बेटी के लिए किसी निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की मैनेजमेंट कोटा सीट की तलाश कर रहे थे, क्योंकि उनकी बेटी नीट परीक्षा के अंकों के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने में सफल नहीं हो सकी थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने कथित तौर पर उनसे संपर्क किया।
आरोपियों ने कैसे बिछाया जाल
एफआईआर के अनुसार, आरोपी डॉ. शिल्पा अरावली (ए-1), जो उस समय तुमकुर रोड स्थित प्रक्रिया अस्पताल में कार्यरत थीं, ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर दावा किया कि उनके और उनके सहयोगियों के निजी मेडिकल कॉलेजों में मजबूत संपर्क हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मैनेजमेंट कोटा के तहत एमबीबीएस सीट दिलवा सकती हैं। इस आश्वासन पर भरोसा करते हुए दंपति ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की सहमति दे दी।
धन का लेन-देन
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने सबसे पहले प्रक्रिया अस्पताल के पार्किंग क्षेत्र के पास शिकायतकर्ता से ₹35 लाख नकद लिए। इसके बाद शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि शेष राशि आरटीजीएस के माध्यम से दूसरे आरोपी पी. किरण कुमार (ए-2) के बैंक खाते में भेजी जाए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जुलाई से सितंबर 2023 के बीच चार अलग-अलग किश्तों में कुल ₹1.05 करोड़ आरोपी के खाते में स्थानांतरित किए गए। इस प्रकार आरोपियों को कुल ₹1.40 करोड़ का भुगतान किया गया।
टालमटोल और धोखा
पूरी राशि प्राप्त करने के बाद भी आरोपियों ने कथित तौर पर विभिन्न बहाने बनाकर दाखिले की प्रक्रिया को लगातार टालना शुरू कर दिया। शिकायत के अनुसार, 28 दिसंबर 2023 को डॉ. शिल्पा अरावली ने शिकायतकर्ता को सूचित किया कि वह एमबीबीएस सीट की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं और अतिरिक्त समय की मांग की। 23 मार्च 2024 को प्रक्रिया अस्पताल में दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, लेकिन आरोपियों ने न तो पैसे लौटाए और न ही कोई समाधान प्रस्तुत किया।
कानूनी कार्रवाई और जांच
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग), धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 34 (समान आशय से किया गया अपराध) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस धन के लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। यह मामला उस बड़ी समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जिसमें मेडिकल प्रवेश की बेताबी का फायदा उठाकर ठग परिवारों को निशाना बनाते हैं।