रेजीनगर उपचुनाव: घोषणा से पहले हुमायूं कबीर ने बेटे के लिए शुरू किया दीवार प्रचार, जीत का दावा
सारांश
मुख्य बातें
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के अध्यक्ष और नवादा विधायक हुमायूं कबीर ने 15 अगस्त 2026 को मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में अपने बेटे के पक्ष में दीवार लेखन (ग्रैफिटी) अभियान की शुरुआत कर दी — यह तब हुआ जब चुनाव आयोग ने अभी तक उपचुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है। कबीर ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उनके बेटे गोलाम नबी आजाद उर्फ रॉबिन एजेयूपी के चुनाव चिन्ह बांसुरी पर रेजीनगर से मैदान में उतरेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
हुमायूं कबीर ने शनिवार को रेजीनगर की दीवारों पर अपने बेटे के समर्थन में प्रचार लिखवाना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि अंततः एजेयूपी की ही जीत होगी। उन्होंने कहा, 'गोलाम नबी आजाद रेजीनगर से चुनाव जीतेंगे।'
गौरतलब है कि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा — दोनों सीटों से एजेयूपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। रेजीनगर में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार बपन घोष को 58,876 मतों से हराया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार अताउर रहमान के मुकाबले जीत का अंतर 81,818 वोटों का रहा था। कबीर को कुल 51.62 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे।
सीट खाली होने की पृष्ठभूमि
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उन्होंने भवानीपुर और नंदीग्राम — दोनों सीटों से चुनाव जीता था। इसी तरह हुमायूं कबीर ने भी रेजीनगर सीट छोड़ दी। इस प्रकार दोनों सीटें रिक्त हुईं और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अगले दो महीनों में उपचुनाव संभावित हैं, हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
भाजपा और प्रशासन पर आरोप
हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि रेजीनगर में कई लोग BJP के साथ जुड़े हुए हैं और प्रशासन भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बावजूद रेजीनगर में 'कमल नहीं खिल पाएगा।' इन आरोपों पर प्रशासन या भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
BJP की तैयारी और विकास के वादे
10 जुलाई को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी रेजीनगर में एक संगठनात्मक बैठक में पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने रामनगर घाट पर भागीरथी नदी पर पुल निर्माण सहित कई विकास परियोजनाओं का वादा किया था। उन्होंने अगस्त में रेजीनगर में एक और जनसभा करने की भी घोषणा की थी।
क्या होगा आगे
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनाव का मुकाबला राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सत्तारूढ़ दल की साख दाँव पर है, तो दूसरी ओर एजेयूपी अपने गढ़ को बरकरार रखने की कोशिश में है। चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होते ही चुनावी समीकरण और स्पष्ट होंगे।