भोपाल में रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल की हत्या, कांग्रेस ने मोहन यादव सरकार पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र स्थित पनघट कॉलोनी में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल अपने घर के कमरे में मृत पाए गए। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर गला रेतकर उनकी हत्या की गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है, और विपक्षी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर सीधा हमला बोला है।
घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या
शुरुआती जाँच के अनुसार, राकेश अग्रवाल और उनकी पत्नी अलग-अलग कमरों में सोते थे। तड़के करीब 4 बजे जब उनकी पत्नी की नींद खुली, तो उन्होंने पाया कि उनके कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद था। उन्होंने दूसरे केयरटेकर अमर को फ़ोन किया, जिसने आकर दरवाज़ा खोला। इसके बाद अग्रवाल के कमरे का दरवाज़ा भी बाहर से बंद मिला और अंदर उनका शव पड़ा था।
रातीबड़ पुलिस को हत्या की सूचना सुबह करीब 5.30 बजे मिली। एसीपी जोन-1 अंकिता खटारकर ने बताया, 'सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस टीम और वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।' कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे और जाँच-पड़ताल की।
मुख्य संदिग्ध: फ़रार केयरटेकर
पुलिस की जाँच फ़िलहाल वरुण कुमार नाम के एक केयरटेकर पर केंद्रित है, जिसे घटना से केवल तीन दिन पहले एक एजेंसी के ज़रिए 24 घंटे के केयरटेकर और मेल नर्स के रूप में काम पर रखा गया था। वारदात के बाद से वह लापता है और पुलिस को शक है कि वह फ़रार हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, घर से उसका अधिकांश सामान भी गायब मिला — केवल एक जोड़ी कपड़े छोड़कर।
एसीपी खटारकर ने स्पष्ट किया कि हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया हथियार अभी तक बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'आगे की जाँच जारी है और लापता केयरटेकर की तलाश की जा रही है।'
कांग्रेस का तीखा हमला
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह हत्या 'सरकार की नाक के नीचे' हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'देश के सबसे असफल गृह मंत्री होने का गौरव हासिल करने के बाद भी यदि सत्ता, व्यवस्था या सरकार में कोई सुधार नहीं होता है तो आपका पूरा तंत्र बेबस और बेशर्म हो चुका है।' पटवारी ने यह भी कहा कि जनता सरकार को सबक सिखाएगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, 'इस सरकार में अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं और प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी लोग सुरक्षित नहीं हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।' सिंघार ने सवाल उठाया कि जब राज्य की राजधानी में एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अपने घर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर पहले से ही विपक्ष सरकार को घेरता रहा है। गौरतलब है कि भोपाल जैसी राज्य राजधानी में एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी की उनके अपने आवास में हत्या ने व्यापक चिंता को जन्म दिया है। आलोचकों का कहना है कि केयरटेकर की बैकग्राउंड जाँच और सत्यापन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठते हैं।
आगे की जाँच
पुलिस अब लापता वरुण कुमार का पता लगाने में जुटी है। साथ ही हत्या की वजह और घटना से पहले व दौरान हुए पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने की कोशिश जारी है। हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी भी जाँच की प्राथमिकता में है। मामले के आगे के घटनाक्रम पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।