सेवानिवृत्त IAS राकेश अग्रवाल हत्याकांड: CM मोहन यादव ने SIT गठन का दिया निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 21 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया। 30 सितंबर को भोपाल के सूरज नगर स्थित उनके आवास में हुई इस हत्या के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद यह निर्देश आया है। मामले की जांच अभी तक भोपाल पुलिस कर रही थी।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और ज्ञापन
बुधवार शाम मध्य प्रदेश IAS अधिकारी संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री यादव से उनके आवास समत्व भवन में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में संघ के अध्यक्ष एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव और वरिष्ठ IAS अधिकारी वी.एस. चौधरी कोलसानी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।
संघ ने एक ज्ञापन सौंपकर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की और इस घटना पर प्रशासनिक तंत्र तथा समाज के बीच व्याप्त गहरी चिंता को रेखांकित किया। अधिकारियों ने बताया कि SIT गठन का उद्देश्य भोपाल पुलिस की चल रही जांच को और मजबूत करना तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या
मध्य प्रदेश कैडर के 1982 बैच के अधिकारी राकेश अग्रवाल 30 सितंबर की सुबह रतिबाद पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत सूरज नगर स्थित अपने आवास 'सिद्धशिला' में गला कटा हुआ मृत पाए गए थे। उनकी पत्नी ने अपने कमरे का दरवाजा बाहर से बंद पाकर शव की खोज की।
अग्रवाल जिला कलेक्टर, सचिव और प्रतिष्ठित आरसीवीपी नोरोन्हा प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ पदों पर सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। जांचकर्ताओं को घर में आग लगाने के प्रयास के संकेत भी मिले — घर में LPG सिलेंडर के पाइप कटे हुए पाए गए।
मुख्य संदिग्ध अभी भी फरार
पुलिस के अनुसार, पंजाब के पटियाला जिले के नाभा निवासी वरुण कुमार (27) — जो कि एक होम हेल्थकेयर एजेंसी के माध्यम से कुछ ही दिन पहले केयरटेकर-सह-पुरुष नर्स के रूप में नियुक्त हुआ था — घटना के बाद से लापता है और मुख्य संदिग्ध बना हुआ है।
कई राज्यों में तलाशी अभियान चलाए जाने और उसकी गिरफ्तारी में सहायक सूचना देने पर इनाम की घोषणा के बावजूद वरुण कुमार अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह ऐसे समय में आया है जब IAS समुदाय में सेवानिवृत्त अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
SIT की संरचना और आगे का रास्ता
SIT की संरचना और उसके कार्यक्षेत्र की विस्तृत जानकारी शीघ्र ही जारी होने की संभावना है। गौरतलब है कि यह निर्देश IAS संघ के हस्तक्षेप के बाद आया — जो अपने आप में असाधारण है, क्योंकि नौकरशाहों का अपने ही समुदाय के किसी सदस्य से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री से औपचारिक जांच की मांग करना बेहद कम देखा जाता है।
आने वाले दिनों में SIT के गठन की आधिकारिक अधिसूचना और उसकी जांच की दिशा तय होने के साथ यह मामला और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।