30 सितंबर 2026
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एलपीयू हिंसा: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से माँगी स्टेटस रिपोर्ट, 8 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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एलपीयू हिंसा: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से माँगी स्टेटस रिपोर्ट, 8 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सारांश

फगवाड़ा की एलपीयू में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के बाद पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट सक्रिय हो गया है। अदालत ने पंजाब सरकार से पुलिस कमिश्नर हस्ताक्षरित रिपोर्ट माँगी है और यह भी पूछा है कि वायरल पोस्ट की कथित घटना सच थी या नहीं। 8 अक्टूबर को अगली सुनवाई निर्णायक हो सकती है।

मुख्य बातें

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार से एलपीयू हिंसा पर पुलिस कमिश्नर हस्ताक्षरित स्टेटस रिपोर्ट माँगी।
अदालत ने स्पष्ट करने को कहा कि 26 सितंबर को वायरल हुए सोशल मीडिया पोस्ट में जिस कथित दुष्कर्म का ज़िक्र था, वह वास्तव में हुआ था या नहीं।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच छात्र रवि राज की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें सीबीआई जाँच की माँग है।
पंजाब पुलिस ने हिंसा में तीन एफआईआर दर्ज की हैं और एसआईटी गठित की है।
मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पंजाब सरकार से पुलिस कमिश्नर के हस्ताक्षर वाली स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि जिस कथित यौन उत्पीड़न की घटना के बाद हिंसा भड़की, वह वास्तव में घटित हुई थी या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित है।

मुख्य घटनाक्रम

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच एलपीयू के छात्र रवि राज की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में हिंसा की जाँच सीबीआई से कराने की माँग की गई है, हालाँकि अदालत ने अभी इस पर कोई आदेश नहीं दिया है।

हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि 26 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्ट में जिस कथित घटना का उल्लेख था, वह सच थी या नहीं। अदालत ने यह भी पूछा कि यदि ऐसी कोई घटना नहीं हुई, तो उस भ्रामक पोस्ट को हटाने और उसके प्रसार को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।

हिंसा की पृष्ठभूमि

सोशल मीडिया पर एक अपुष्ट पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि यूनिवर्सिटी कैंपस में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ और बाद में उसे घर भेज दिया गया। इस पोस्ट के बाद अफवाहें फैलीं और छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया जो बाद में हिंसक रूप ले गया।

प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की, संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और जालंधर-फगवाड़ा हाईवे के एक हिस्से को जाम कर दिया। यह ऐसे समय में हुआ जब देश भर में कैंपस सुरक्षा को लेकर पहले से ही बहस जारी है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

पंजाब पुलिस ने हिंसा के मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं। आगजनी, लूट और पुलिसकर्मियों पर हमले समेत विभिन्न आरोपों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन भी किया गया है। पंजाब सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है और कथित घटना के साथ-साथ हिंसा की भी जाँच जारी है।

हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी ने अस्थायी रूप से शैक्षणिक गतिविधियाँ रोक दी थीं और कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

अदालत के सवाल

हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि हिंसा के लिए कौन ज़िम्मेदार था और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि अदालत ने सरकार को पुलिस कमिश्नर के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देकर मामले की जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी। तब तक पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। सीबीआई जाँच की माँग पर निर्णय भी अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा, जो इस मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असल में यह सवाल है कि क्या राज्य की पुलिस अफवाहों को रोकने में सक्षम है। तीन एफआईआर और एसआईटी के बावजूद, अदालत को अलग से पुलिस कमिश्नर स्तर की रिपोर्ट माँगनी पड़ी — यह इस बात का संकेत है कि सरकारी जवाबदेही अभी भी अदालती दबाव पर निर्भर है। सीबीआई जाँच की माँग पर फैसला 8 अक्टूबर को जो रुख लेगा, वह पंजाब में कैंपस सुरक्षा और ऑनलाइन अफवाहों से निपटने की सरकारी इच्छाशक्ति की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलपीयू में हिंसा क्यों हुई?
सोशल मीडिया पर एक अपुष्ट पोस्ट वायरल हुई जिसमें दावा किया गया था कि एलपीयू कैंपस में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ। इस पोस्ट के बाद अफवाहें फैलीं, छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू किया जो बाद में हिंसक हो गया और तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएँ हुईं।
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को पुलिस कमिश्नर के हस्ताक्षर वाली स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि 26 सितंबर की वायरल पोस्ट में जिस घटना का उल्लेख था, वह हुई थी या नहीं, और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की गई।
एलपीयू हिंसा मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी। तब तक पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
क्या एलपीयू हिंसा की जाँच सीबीआई करेगी?
एलपीयू के छात्र रवि राज की जनहित याचिका में सीबीआई जाँच की माँग की गई है, लेकिन हाई कोर्ट ने अभी इस पर कोई आदेश नहीं दिया है। फिलहाल पंजाब पुलिस द्वारा गठित एसआईटी मामले की जाँच कर रही है।
पंजाब पुलिस ने एलपीयू हिंसा में क्या कार्रवाई की है?
पंजाब पुलिस ने हिंसा के मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं और आगजनी, लूट व पुलिसकर्मियों पर हमले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) भी गठित किया है। पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट के स्रोत का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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