डूसू चुनाव हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट माँगी, काउंटिंग रोकने की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) चुनाव के दौरान कथित हिंसा और नियम उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों की कार्रवाई से अदालत संतुष्ट नहीं हुई, तो वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगाई जा सकती है। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले का पृष्ठभूमि और याचिका
वकील प्रशांत मनचंदा की अर्जी पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह सख्त टिप्पणी की। मनचंदा ने 2026-27 डूसू चुनाव के दौरान लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों, विरूपण-रोधी दिशानिर्देशों और चुनाव आचार संहिता को कड़ाई से लागू करने की माँग की थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नॉर्थ कैंपस में उम्मीदवारों, समर्थकों और बाहरी व्यक्तियों के बीच हिंसा की घटनाएँ हुईं, जिनमें हथियारों के इस्तेमाल और प्रोफेसरों व छात्रों पर हमले के दावे भी शामिल हैं। इसके अलावा तोड़-फोड़, झड़पों और कैंपस में बाहरी लोगों के कथित तौर पर घुसने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह 18 सितंबर को निर्धारित मतदान पर अभी रोक नहीं लगा रही, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यदि हालात नहीं सँभाले गए तो कड़ा आदेश दिया जाएगा। अदालत ने कहा, 'कोर्ट कोई बहाना नहीं सुनेगा। हम साफ कर देना चाहते हैं कि भले ही चुनाव पर रोक नहीं लगा रहे हैं या उसे टाल नहीं रहे हैं, लेकिन अगर हम आपकी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुए, तो हम वोटों की गिनती या नतीजों की घोषणा पर रोक लगाने का कड़ा आदेश दे सकते हैं।'
अदालत ने यह भी जोड़ा, 'हमें अच्छी तरह पता है कि हम एक लोकतांत्रिक समाज हैं, लेकिन हमें यह भी पता है कि इस लोकतंत्र को आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता।'
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने हिंसा की घटना को 'पूरी तरह निंदनीय' बताया और कहा कि दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए। हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे हुड़दंग, लिंगदोह कमेटी की गाइडलाइंस, अदालती आदेशों और चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन पर की गई कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे निर्धारित है। चीफ जस्टिस उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर आगे के आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र राजनीति को लेकर हिंसा की घटनाएँ पहले भी कई बार सवालों के घेरे में आ चुकी हैं और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें लागू करने की माँग वर्षों से उठती रही है।