7 अक्टूबर 2026
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हुमायूं कबीर का ऐलान: सुवेंदु अधिकारी के CM रहते पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाऊंगा

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हुमायूं कबीर का ऐलान: सुवेंदु अधिकारी के CM रहते पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाऊंगा

सारांश

रेजीनगर उपचुनाव के दौरान 12 घंटे हिरासत में रखे जाने के बाद विधायक हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान — सुवेंदु अधिकारी के CM रहते विधानसभा नहीं जाऊंगा। विधायक पद और सक्रिय राजनीति छोड़ने की चेतावनी भी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया भूचाल।

मुख्य बातें

हुमायूं कबीर ने 7 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री रहते वह पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाएंगे।
कबीर को रेजीनगर उपचुनाव के मतदान के दौरान गिरफ्तार कर 12 घंटे हिरासत में रखा गया था।
उन पर बूथ प्रबंधन उल्लंघन, मतदाताओं को प्रभावित करने और पुलिसकर्मियों को डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए।
उनके बेटे गोलाम नबी आजाद रेजीनगर उपचुनाव में एजेयूपी के उम्मीदवार हैं।
कबीर ने नाओदा के लोगों की राय के आधार पर विधायक पद और सक्रिय राजनीति छोड़ने की संभावना भी जताई।
उन्होंने विधानसभा की समितियों, सर्वदलीय बैठकों और सीट नंबर 88 को खाली रखने का ऐलान किया।

आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक और विधायक हुमायूं कबीर ने 7 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि जब तक सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने रहेंगे, वह राज्य विधानसभा के किसी भी सत्र में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने सक्रिय राजनीति से स्वैच्छिक संन्यास लेने का संकेत भी दिया।

हुमायूं कबीर की घोषणा

कबीर ने बुधवार दोपहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'जब तक सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री हैं, मैं पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाऊंगा और न ही सदन के किसी सत्र में हिस्सा लूंगा। इसके लिए मैं मुर्शिदाबाद जिले के नाओदा विधानसभा क्षेत्र के लोगों से माफी भी मांगूंगा। जरूरत पड़ी तो मैं अपने राजनीतिक जीवन से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लूंगा।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह विधानसभा की अल्पसंख्यक मामलों की समिति, हाउस कमेटी, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी, सर्वदलीय बैठकों या विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनके अनुसार, सदन में उनके लिए निर्धारित सीट नंबर 88 अब खाली रहेगी।

गिरफ्तारी और हिरासत — घटनाक्रम

इस ऐलान की पृष्ठभूमि में मंगलवार को हुई घटना है। रेजीनगर उपचुनाव के मतदान के दौरान कबीर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर बिना अनुमति एक बूथ से दूसरे बूथ जाने, मतदाताओं को प्रभावित करने, पुलिसकर्मियों को डराने-धमकाने और ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ने के आरोप लगाए गए। उन्हें रेजीनगर थाने में 12 घंटे तक हिरासत में रखने के बाद रिहा किया गया।

कबीर ने इस हिरासत को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा, 'क्या यही लोकतंत्र है, जहां एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर किसी विधायक को जबरन उठाकर बिना किसी ठोस वजह के 12 घंटे तक हिरासत में रख सकता है?'

सुवेंदु अधिकारी पर सीधा निशाना

कबीर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी एक साथ मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस मंत्री भी हैं, और पिछले दो महीनों से रेजीनगर के लोगों को पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हुमायूं कबीर ऐसे किसी की दया पर राजनीति नहीं करेगा।' साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें उनके अपने पार्टी कार्यालय से घसीटकर ले गई।

रेजीनगर उपचुनाव और पारिवारिक दांव

गौरतलब है कि रेजीनगर उपचुनाव इसलिए हुआ क्योंकि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में कबीर मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों — नाओदा और रेजीनगर — से निर्वाचित हुए थे। उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखकर रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था। मंगलवार को हुए उपचुनाव में उनके बेटे गोलाम नबी आजाद एजेयूपी के उम्मीदवार थे, जिससे यह चुनाव उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण था।

आगे क्या होगा

कबीर ने संकेत दिया कि वह नाओदा के लोगों की राय लेंगे। उन्होंने कहा, 'अगर वे अनुमति देंगे तो मैं विधायक पद भी छोड़ सकता हूं। यदि वे कहेंगे, तो मैं सक्रिय राजनीति भी छोड़ दूंगा।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा न जाते हुए भी वह नाओदा क्षेत्र के लोगों की सेवा का काम जारी रखेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही तीखी खींचतान से गुजर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जवाबदेही के ढांचे को और कमज़ोर करता है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाज़ी पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि छोटी क्षेत्रीय पार्टियाँ सत्ता के ऐसे दबाव में कितनी असुरक्षित हैं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा का बहिष्कार क्यों किया?
हुमायूं कबीर ने विधानसभा का बहिष्कार इसलिए किया क्योंकि रेजीनगर उपचुनाव के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर 12 घंटे हिरासत में रखा गया। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में देखा।
हुमायूं कबीर को कब और क्यों गिरफ्तार किया गया था?
हुमायूं कबीर को मंगलवार को रेजीनगर उपचुनाव के मतदान के दौरान गिरफ्तार किया गया। उन पर बिना अनुमति एक बूथ से दूसरे बूथ जाने, मतदाताओं को प्रभावित करने, पुलिसकर्मियों को डराने-धमकाने और एक पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ने के आरोप लगाए गए।
रेजीनगर उपचुनाव क्यों हुआ और इसमें कौन उम्मीदवार है?
रेजीनगर उपचुनाव इसलिए हुआ क्योंकि हुमायूं कबीर इस साल हुए विधानसभा चुनाव में नाओदा और रेजीनगर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था। इस उपचुनाव में उनके बेटे गोलाम नबी आजाद एजेयूपी के उम्मीदवार हैं।
क्या हुमायूं कबीर विधायक पद छोड़ देंगे?
हुमायूं कबीर ने विधायक पद और सक्रिय राजनीति छोड़ने की संभावना जताई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह पहले नाओदा क्षेत्र के लोगों की राय लेंगे। उनके अनुसार, लोगों की सहमति मिली तो वह यह निर्णय ले सकते हैं।
एजेयूपी पार्टी और हुमायूं कबीर कौन हैं?
हुमायूं कबीर आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक और मुर्शिदाबाद जिले के नाओदा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में वह नाओदा और रेजीनगर — दोनों सीटों से निर्वाचित हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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