हुमायूं कबीर का ऐलान: सुवेंदु अधिकारी के CM रहते पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाऊंगा
सारांश
मुख्य बातें
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक और विधायक हुमायूं कबीर ने 7 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि जब तक सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने रहेंगे, वह राज्य विधानसभा के किसी भी सत्र में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने सक्रिय राजनीति से स्वैच्छिक संन्यास लेने का संकेत भी दिया।
हुमायूं कबीर की घोषणा
कबीर ने बुधवार दोपहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'जब तक सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री हैं, मैं पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाऊंगा और न ही सदन के किसी सत्र में हिस्सा लूंगा। इसके लिए मैं मुर्शिदाबाद जिले के नाओदा विधानसभा क्षेत्र के लोगों से माफी भी मांगूंगा। जरूरत पड़ी तो मैं अपने राजनीतिक जीवन से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लूंगा।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह विधानसभा की अल्पसंख्यक मामलों की समिति, हाउस कमेटी, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी, सर्वदलीय बैठकों या विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनके अनुसार, सदन में उनके लिए निर्धारित सीट नंबर 88 अब खाली रहेगी।
गिरफ्तारी और हिरासत — घटनाक्रम
इस ऐलान की पृष्ठभूमि में मंगलवार को हुई घटना है। रेजीनगर उपचुनाव के मतदान के दौरान कबीर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर बिना अनुमति एक बूथ से दूसरे बूथ जाने, मतदाताओं को प्रभावित करने, पुलिसकर्मियों को डराने-धमकाने और ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ने के आरोप लगाए गए। उन्हें रेजीनगर थाने में 12 घंटे तक हिरासत में रखने के बाद रिहा किया गया।
कबीर ने इस हिरासत को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा, 'क्या यही लोकतंत्र है, जहां एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर किसी विधायक को जबरन उठाकर बिना किसी ठोस वजह के 12 घंटे तक हिरासत में रख सकता है?'
सुवेंदु अधिकारी पर सीधा निशाना
कबीर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी एक साथ मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस मंत्री भी हैं, और पिछले दो महीनों से रेजीनगर के लोगों को पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हुमायूं कबीर ऐसे किसी की दया पर राजनीति नहीं करेगा।' साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें उनके अपने पार्टी कार्यालय से घसीटकर ले गई।
रेजीनगर उपचुनाव और पारिवारिक दांव
गौरतलब है कि रेजीनगर उपचुनाव इसलिए हुआ क्योंकि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में कबीर मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों — नाओदा और रेजीनगर — से निर्वाचित हुए थे। उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखकर रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था। मंगलवार को हुए उपचुनाव में उनके बेटे गोलाम नबी आजाद एजेयूपी के उम्मीदवार थे, जिससे यह चुनाव उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण था।
आगे क्या होगा
कबीर ने संकेत दिया कि वह नाओदा के लोगों की राय लेंगे। उन्होंने कहा, 'अगर वे अनुमति देंगे तो मैं विधायक पद भी छोड़ सकता हूं। यदि वे कहेंगे, तो मैं सक्रिय राजनीति भी छोड़ दूंगा।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा न जाते हुए भी वह नाओदा क्षेत्र के लोगों की सेवा का काम जारी रखेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही तीखी खींचतान से गुजर रही है।