हुमायूं कबीर का आरोप: उपचुनाव में 12 घंटे हिरासत, फोन जब्त — अब विधानसभा नहीं जाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
मुर्शीदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर ने 7 अक्टूबर 2026 को पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, यह कहते हुए कि रेजिनगर उपचुनाव के दौरान उन्हें 12 घंटे हिरासत में रखा गया, उनका फोन छीन लिया गया और रिहाई के वक्त उन्हें 'ज़ुबान संभालने' की चेतावनी दी गई। इन घटनाओं के विरोध में उन्होंने विधानसभा और उसकी समितियों की बैठकों से अनिश्चितकाल के लिए दूरी बनाने की घोषणा की है।
हिरासत का घटनाक्रम
विधायक कबीर के अनुसार, पुलिस उन्हें रात 8 बजे उठा ले गई, उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया और उन्हें एक अलग मकान में बैठाकर रखा। उन्होंने बताया कि हिरासत के दौरान अंदर मौजूद एक इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर गोपाल सरकार ने उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया तथा खाने-पीने का ध्यान रखा।
हालाँकि, रिहाई के समय उन्हें कथित तौर पर चेताया गया कि 'ज़ुबान संभाल कर चलनी चाहिए।' इस पर कबीर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'कोई पुलिस वाला मुझे बताएगा कि मैं ज़ुबान से क्या बोलूंगा और क्या नहीं बोलूंगा — वह मैं नहीं मानूंगा।'
पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस पिछले दो महीनों से आम नागरिकों पर अत्याचार कर रही है — झूठे मामलों में फँसाना, घरों में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और मतदाताओं के प्रमाण-पत्र छीनना। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों से अपील की कि वे इस स्थिति पर ध्यान दें।
गौरतलब है कि रेजिनगर सीट पर उपचुनाव मंगलवार को हुआ था। विधायक का कहना है कि उपचुनाव के दिन से ही पुलिस ने मतदाताओं के साथ जो व्यवहार किया, वह 'बर्दाश्त से बाहर' था, लेकिन हिरासत में होने के कारण वे कोई प्रतिकार नहीं कर पाए।
रेजिनगर की जनता से माफी
कबीर ने रेजिनगर के मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस की जबरदस्ती के खिलाफ वह कुछ नहीं कर सके, और इसी नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने क्षमा-याचना की।
विधानसभा बहिष्कार का ऐलान
विरोध के तौर पर विधायक कबीर ने घोषणा की कि वे विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे, परंतु अगले सत्र तक किसी भी बैठक, समिति की बैठक या विधानसभा कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री सदन में उपस्थित न हों, तब वे जाकर वापस लौट सकते हैं।
राजनीति छोड़ने की अफवाहों को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उनका यह बयान राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए असुविधाजनक स्थिति उत्पन्न कर सकता है, विशेष रूप से उपचुनाव परिणामों की पृष्ठभूमि में।