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हुमायूं कबीर का आरोप: उपचुनाव में 12 घंटे हिरासत, फोन जब्त — अब विधानसभा नहीं जाएंगे

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हुमायूं कबीर का आरोप: उपचुनाव में 12 घंटे हिरासत, फोन जब्त — अब विधानसभा नहीं जाएंगे

सारांश

मुर्शीदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर का आरोप — रेजिनगर उपचुनाव की रात 12 घंटे हिरासत, फोन जब्त, और रिहाई पर 'ज़ुबान संभालो' की धमकी। जवाब में विधानसभा बहिष्कार का ऐलान और जनता से माफी। सत्तारूढ़ सरकार के लिए यह अंदरूनी दबाव का संकेत है।

मुख्य बातें

विधायक हुमायूं कबीर को रेजिनगर उपचुनाव की रात पुलिस ने रात 8 बजे हिरासत में लिया और 12 घंटे बाद रिहा किया।
हिरासत के दौरान उनका मोबाइल फोन जब्त किया गया और एक अलग मकान में रखा गया।
रिहाई के समय कथित तौर पर उन्हें 'ज़ुबान संभाल कर चलने' की चेतावनी दी गई।
कबीर ने पुलिस पर आम नागरिकों को झूठे मामलों में फँसाने, मतदाताओं के प्रमाण-पत्र छीनने और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
उन्होंने विधानसभा और उसकी सभी समितियों की बैठकों से अनिश्चितकाल के लिए दूरी बनाने की घोषणा की।
रेजिनगर के मतदाताओं से सार्वजनिक माफी माँगी; राजनीति छोड़ने की अटकलों को फिलहाल खारिज किया।

मुर्शीदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर ने 7 अक्टूबर 2026 को पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, यह कहते हुए कि रेजिनगर उपचुनाव के दौरान उन्हें 12 घंटे हिरासत में रखा गया, उनका फोन छीन लिया गया और रिहाई के वक्त उन्हें 'ज़ुबान संभालने' की चेतावनी दी गई। इन घटनाओं के विरोध में उन्होंने विधानसभा और उसकी समितियों की बैठकों से अनिश्चितकाल के लिए दूरी बनाने की घोषणा की है।

हिरासत का घटनाक्रम

विधायक कबीर के अनुसार, पुलिस उन्हें रात 8 बजे उठा ले गई, उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया और उन्हें एक अलग मकान में बैठाकर रखा। उन्होंने बताया कि हिरासत के दौरान अंदर मौजूद एक इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर गोपाल सरकार ने उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया तथा खाने-पीने का ध्यान रखा।

हालाँकि, रिहाई के समय उन्हें कथित तौर पर चेताया गया कि 'ज़ुबान संभाल कर चलनी चाहिए।' इस पर कबीर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'कोई पुलिस वाला मुझे बताएगा कि मैं ज़ुबान से क्या बोलूंगा और क्या नहीं बोलूंगा — वह मैं नहीं मानूंगा।'

पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस पिछले दो महीनों से आम नागरिकों पर अत्याचार कर रही है — झूठे मामलों में फँसाना, घरों में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और मतदाताओं के प्रमाण-पत्र छीनना। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों से अपील की कि वे इस स्थिति पर ध्यान दें।

गौरतलब है कि रेजिनगर सीट पर उपचुनाव मंगलवार को हुआ था। विधायक का कहना है कि उपचुनाव के दिन से ही पुलिस ने मतदाताओं के साथ जो व्यवहार किया, वह 'बर्दाश्त से बाहर' था, लेकिन हिरासत में होने के कारण वे कोई प्रतिकार नहीं कर पाए।

रेजिनगर की जनता से माफी

कबीर ने रेजिनगर के मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस की जबरदस्ती के खिलाफ वह कुछ नहीं कर सके, और इसी नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने क्षमा-याचना की।

विधानसभा बहिष्कार का ऐलान

विरोध के तौर पर विधायक कबीर ने घोषणा की कि वे विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे, परंतु अगले सत्र तक किसी भी बैठक, समिति की बैठक या विधानसभा कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री सदन में उपस्थित न हों, तब वे जाकर वापस लौट सकते हैं।

राजनीति छोड़ने की अफवाहों को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उनका यह बयान राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए असुविधाजनक स्थिति उत्पन्न कर सकता है, विशेष रूप से उपचुनाव परिणामों की पृष्ठभूमि में।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस आंतरिक दरार का संकेत है जो चुनावी हिंसा और प्रशासनिक दमन को लेकर पश्चिम बंगाल में उभर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में उपचुनावों के दौरान मतदाताओं पर दबाव के आरोप नियमित रूप से सामने आते हैं, और विपक्ष इन्हें राष्ट्रीय मंच पर उठाता रहा है। विधायक की स्वयं स्वीकारोक्ति — कि वे कुछ नहीं कर पाए — यह भी उजागर करती है कि निर्वाचित प्रतिनिधि भी प्रशासनिक तंत्र के सामने कितने बेबस हो सकते हैं। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के लिए यह चुनौती है कि वे इसे महज एक विधायक की व्यक्तिगत नाराज़गी बताकर नज़रअंदाज करें, या आंतरिक जवाबदेही की कोई ठोस प्रक्रिया शुरू करें।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विधायक हुमायूं कबीर को किस कारण हिरासत में लिया गया था?
विधायक हुमायूं कबीर के अनुसार, उन्हें रेजिनगर उपचुनाव की रात पुलिस ने हिरासत में लिया। उन्होंने हिरासत का कोई औपचारिक कारण नहीं बताया, लेकिन इसे उपचुनाव के दौरान पुलिस की कार्रवाइयों से जोड़ा।
हुमायूं कबीर ने विधानसभा बहिष्कार क्यों घोषित किया?
उन्होंने 12 घंटे की हिरासत और पुलिस द्वारा फोन जब्त किए जाने के विरोध में विधानसभा बहिष्कार की घोषणा की। उनका कहना है कि इस दौरान पुलिस ने मतदाताओं के प्रमाण-पत्र छीने और आम नागरिकों पर अत्याचार किया, जिसका वे प्रतिकार नहीं कर सके।
क्या हुमायूं कबीर राजनीति छोड़ रहे हैं?
नहीं, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी राजनीति छोड़ने का कोई निर्णय नहीं लिया है। वे विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे, लेकिन बैठकों और कार्यक्रमों में फिलहाल हिस्सा नहीं लेंगे।
विधायक ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार के बारे में क्या कहा?
कबीर ने कहा कि हिरासत के दौरान अंदर मौजूद इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर गोपाल सरकार ने उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया और खाने-पीने का ध्यान रखा। हालाँकि, रिहाई के समय उन्हें 'ज़ुबान संभालने' की चेतावनी दी गई, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया।
रेजिनगर की जनता से विधायक ने माफी क्यों माँगी?
उन्होंने माफी इसलिए माँगी क्योंकि उपचुनाव के दौरान पुलिस ने मतदाताओं के साथ जो दुर्व्यवहार किया, उसका वे हिरासत में होने के कारण प्रतिकार नहीं कर सके। उन्होंने इसे अपनी नाकामी मानते हुए जनता से क्षमा-याचना की।
राष्ट्र प्रेस
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